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शांति के लिए संघर्ष के कारणों का समाधान जरूरी : डॉ. प्रदीप
Mon, 22 Sep 2025 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 22 Sep 2025 11:31 PM IST
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महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज के तहत व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान विधि पीठ के अधिष्ठाता डाॅ. प्रदीप सिंह ने कहा कि शांति के लिए संघर्ष के कारणों का समाधान होना जरूरी है।
यह कार्यक्रम न्यायमूर्ति वीआर कृष्णा अय्यर को श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित किया गया था। डाॅ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सच्ची शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है बल्कि न्याय की सक्रिय खोज है। उन्होंने कहा कि शांति केवल बंदूकों की खामोशी नहीं है, यह एक निष्क्रिय अवस्था नहीं है।
सच्ची शांति संघर्षों के कारणों के न्यायपूर्ण, सक्रिय और सतत समाधान में निहित है। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम से लेकर आधुनिक पंचशील सिद्धांतों तक के इतिहास का उल्लेख किया। कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक सौहार्द का पक्षधर रहा है।
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उन्होंने शिक्षा को शांति निर्माण का सबसे प्रभावी साधन बताते हुए कहा कि पाठ्यक्रमों को सामाजिक न्याय और नैतिक विकास के उपकरण के रूप में विकसित करना होगा, ताकि स्थायी शांति की संस्कृति स्थापित की जा सके।
उन्होंने कहा कि शक्ति का अर्थ है दृढ़ विश्वास, न्यायपूर्ण उद्देश्य की शक्ति और अंतिम उपाय के रूप में कार्रवाई का संकल्प। एक राष्ट्र को अपने सिद्धांतों में मजबूत और अपने दृष्टिकोण में धर्मनिष्ठ होना चाहिए ताकि वह शांति स्थापित कर सके और उसे बनाए रख सके।
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यह कार्यक्रम न्यायमूर्ति वीआर कृष्णा अय्यर को श्रद्धांजलि स्वरूप आयोजित किया गया था। डाॅ. प्रदीप सिंह ने कहा कि सच्ची शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है बल्कि न्याय की सक्रिय खोज है। उन्होंने कहा कि शांति केवल बंदूकों की खामोशी नहीं है, यह एक निष्क्रिय अवस्था नहीं है।
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सच्ची शांति संघर्षों के कारणों के न्यायपूर्ण, सक्रिय और सतत समाधान में निहित है। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम से लेकर आधुनिक पंचशील सिद्धांतों तक के इतिहास का उल्लेख किया। कहा कि भारत हमेशा से वैश्विक सौहार्द का पक्षधर रहा है।
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उन्होंने शिक्षा को शांति निर्माण का सबसे प्रभावी साधन बताते हुए कहा कि पाठ्यक्रमों को सामाजिक न्याय और नैतिक विकास के उपकरण के रूप में विकसित करना होगा, ताकि स्थायी शांति की संस्कृति स्थापित की जा सके।
उन्होंने कहा कि शक्ति का अर्थ है दृढ़ विश्वास, न्यायपूर्ण उद्देश्य की शक्ति और अंतिम उपाय के रूप में कार्रवाई का संकल्प। एक राष्ट्र को अपने सिद्धांतों में मजबूत और अपने दृष्टिकोण में धर्मनिष्ठ होना चाहिए ताकि वह शांति स्थापित कर सके और उसे बनाए रख सके।