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Mahendragarh-Narnaul News: छह अस्वीकृत पशु औषधालयों का वीएलडीए पर पड़ रहा अतिरिक्त भार
Sat, 27 Jul 2024 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 27 Jul 2024 11:42 PM IST
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फोटो संख्या:72-हुड्डा पार्क में बैठक करते वीएलडीए--संवाद
महेंद्रगढ़। प्रदेश सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में प्रदेश के आठ जिलों में पशु औषधायलों व चिकित्सालयों को स्वीकृति प्रदान की गई है, लेकिन महेंद्रगढ़ जिले में पिछले 30 सालों से मांग के बावजूद भी सरकार से राहत नहीं मिली। शनिवार को शहर के हुडा पार्क में बैठक का आयोजन कर रोष व्यक्त किया है। साथ ही छह अस्वीकृत पशु विभाग की संस्थाओं के कारण वीएलडीए पर पड़ रहे अनावश्यक बोझ को लेकर मंथन किया।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे वीएलडीए एसोसिएशन के पूर्व जिला प्रधान रामफल शर्मा ने बताया कि जिले में छह अस्वीकृत संस्थाएं मलड़ा, बारडा, ऊष्मापुर, बुडीन, रामबास व महासर हैं जिनका अतिरिक्त चार्ज वीएलडीए के पास है। इन संस्थाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं हैं ऐसे में इन संस्थाओं का काम सुचारू रूप से चलाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ संस्थाओं का चार्ज उच्च अधिकारियों ने 20 किलोमीटर दूर पदस्थ वीएलडीए को दिया है जो वीएलडीए के लिए पशु पालकों को सुविधाएं देना किसी चुनौती से कम नहीं है। पूर्व में भेजे गए इन पशु संस्थाओं की मंजूरी के प्रस्तावों पर कुछ गलत एवं अनावश्यक व तथ्यहीन टिप्पणी की गई हैं जोकि उच्च अधिकारियों की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि या तो इन संस्थाओं को स्वीकृत किया जाएं या फिर स्वीकृती प्रदान कर इनमें पद सृजित कर तैनाती की जाए। यह संस्थाएं 30 से 40 साल पूरानी हैं तथा पशु संख्या में जिले में अव्वल रहने वाले गांवों में स्थित हैं। वीएलडीए वर्ग की एलटीसी, एसीपी समय पर जारी न होने पर उच्च अधिकारियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया। समस्याओं को लेकर महानिदेशक पशुपालन को उपमंडल अधिकारी व उप निदेशक के माध्यम से शिष्टमंडल द्वारा ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया। वहीं वीएलडीए सुरेंद्र सिंह ने ने उच्च अधिकारियों से समस्याओं का निराकरण व संस्था की स्वीकृति कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है। इस अवसर पर वीएलडीए एसोसिएशन के पूर्व राज्य कार्यकारिणी सदस्य अतर सिंह, राजेन्द्र सिंह, अनूप, आलोक, दीपक सहित जिला कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।
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बैठक की अध्यक्षता कर रहे वीएलडीए एसोसिएशन के पूर्व जिला प्रधान रामफल शर्मा ने बताया कि जिले में छह अस्वीकृत संस्थाएं मलड़ा, बारडा, ऊष्मापुर, बुडीन, रामबास व महासर हैं जिनका अतिरिक्त चार्ज वीएलडीए के पास है। इन संस्थाओं में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं हैं ऐसे में इन संस्थाओं का काम सुचारू रूप से चलाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ संस्थाओं का चार्ज उच्च अधिकारियों ने 20 किलोमीटर दूर पदस्थ वीएलडीए को दिया है जो वीएलडीए के लिए पशु पालकों को सुविधाएं देना किसी चुनौती से कम नहीं है। पूर्व में भेजे गए इन पशु संस्थाओं की मंजूरी के प्रस्तावों पर कुछ गलत एवं अनावश्यक व तथ्यहीन टिप्पणी की गई हैं जोकि उच्च अधिकारियों की मंशा पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
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बैठक में निर्णय लिया गया कि या तो इन संस्थाओं को स्वीकृत किया जाएं या फिर स्वीकृती प्रदान कर इनमें पद सृजित कर तैनाती की जाए। यह संस्थाएं 30 से 40 साल पूरानी हैं तथा पशु संख्या में जिले में अव्वल रहने वाले गांवों में स्थित हैं। वीएलडीए वर्ग की एलटीसी, एसीपी समय पर जारी न होने पर उच्च अधिकारियों के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया। समस्याओं को लेकर महानिदेशक पशुपालन को उपमंडल अधिकारी व उप निदेशक के माध्यम से शिष्टमंडल द्वारा ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया। वहीं वीएलडीए सुरेंद्र सिंह ने ने उच्च अधिकारियों से समस्याओं का निराकरण व संस्था की स्वीकृति कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है। इस अवसर पर वीएलडीए एसोसिएशन के पूर्व राज्य कार्यकारिणी सदस्य अतर सिंह, राजेन्द्र सिंह, अनूप, आलोक, दीपक सहित जिला कार्यकारिणी सदस्य मौजूद रहे।
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