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Mahendragarh-Narnaul News: न्याययिक प्रक्रिया में आई सरलता, तय समयसीमा से थानों व अदालतों में नहीं बढ़ेगी भीड़

Tue, 02 Jul 2024 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 02 Jul 2024 11:35 PM IST
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Simplification in judicial process, fixed time limit will not increase crowd in police stations and courts
फोटो संख्या: 53 एडवोकेट रेखा यादव---संवाद
महेंद्रगढ़। तीन नए आपराधिक कानूनों में आधुनिक को जोड़ने से अब न्याय की प्रक्रिया और अधिक सरल हो गई है। जीरो एफआईआर, पुलिस शिकायतों का ऑनलाइन पंजीकरण, एसएमएस जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न्याय प्रक्रिया और अधिक सरल हो जाएगी। युवाओं का मानना है कि महिला व बाल अपराधों पर यह नए कानून काफी हद तक अंकुश लगाने में सहायक होंगे। साथ ही महिला व बाल अपराधाें का ग्राफ भी लगातार नीचे गिरेगा।
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युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि नए कानूनों को न्याय प्रक्रिया में सरलता है। वहीं आपराधिक मामलों में पुलिस हिरासत व हिट एंड रन मामलों में कुछ बाधाएं हो सकती हैं। हिट एंड रन मामलों में प्राय: बड़े वाहन चालकों को दोषी माना जाता है, जबकि छोटे वाहन चालक भी कई बार लापरवाही करते हैं। ऐसे में यह कानून केवल छोटे वाहन चालकों को राहत प्रदान करेगा, जबकि बड़े वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ेंगी। वहीं पुलिस हिरासत को लेकर पुलिस की स्वतंत्रता से पुलिस विभाग की मनमर्जी भी हावी हो सकती है।
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बाल व महिला अपराधों पर तय समय में सभी प्रकार की जांच प्रक्रिया पूरी करने से न्याय पाना सुलभ होगा। थानों व अदालतों में अनावश्यक भीड़ भी नहीं बढ़ेगी साथ ही नए कानून बाल एवं महिला अपराध पर अंकुश लगाने में काफी हद तक कारगर साबित होंगे। पुलिस हिरासत को लेकर पुलिस की शक्ति बढ़ाने से पुलिस की मनमर्जी बढ़ने की आशंका है। वहीं हिट एंड रन मामले को लेकर नए कानूनों में बड़े वाहन चालकों को ही टारगेट किया गया है, जबकि कई बार छोटे वाहन चालक भी लापरवाही कर हादसों का कारण बनते हैं।
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रेखा यादव, महिला अधिवक्ता, बार एसोसिएशन महेंद्रगढ़।
नए कानूनों के तहत तीन साल में आपराधिक मामलों में न्याय मिलेगा, जिससे आमजन को लाभ होगा। इसके कारण अपराध पर भी नियंत्रण होगा व लंबी चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से निजात मिलेगी। नए कानूनों में न्याय प्रणाली के लिए समय-सीमा तय होने से लोगों को भी राहत मिलेगी।
संजय, निवासी मालड़ा
नए कानूनों में एक जैसी धाराओं को मिलाकर इसका सरलीकरण कर दिया गया है। भारतीय दंड संहिता में पहले कुल 511 धाराएं थीं, लेकिन अब इनकी संख्या घटाकर 358 कर दिया गया है। इसमें आधुनिकता को शामिल कर आमजन के लिए और अधिक सरल कर दिया गया है। वहीं महिला व बाल अपराधों को लेकर किए गए बदलावों से अपराध पर भी लगाम लग सकेगी।

हिमांशी शर्मा, छात्रा
तीनों कानून न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्षता पर आधारित हैं। वहीं बच्चों व महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में न्याय को लेकर सराहनीय भूमिका निभाएंगे। इस प्रकार के मामलों में जांच रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर देनी होगी। एसएमएस के माध्यम से समन, घटना की वीडियोग्राफी, अपराधों में आधुनिक साक्ष्य को मान्य कर न्याय प्रणाली को और अधिक सरल बनाया गया है।
लक्की सीगड़ा, चेयरमैन बीएमडी फाउंडेशन

फोटो संख्या: 53 एडवोकेट रेखा यादव---संवाद

फोटो संख्या: 53 एडवोकेट रेखा यादव---संवाद

फोटो संख्या: 53 एडवोकेट रेखा यादव---संवाद

फोटो संख्या: 53 एडवोकेट रेखा यादव---संवाद

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