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श्रीकृष्ण का जन्म सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक : सुरेश चंद्र
Sat, 06 Sep 2025 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 06 Sep 2025 11:47 PM IST
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फोटो संख्या:74- कनीना में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन सुनती महिलाएं--स्रोत- आयोजक
कनीना। कनीना मंडी स्थित गोविंद बाई धर्मशाला में श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई।
कथा व्यास आचार्य सुरेश चंद्र शर्मा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष में सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है। जब-जब धरती पर पाप और अधर्म का भार बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं और दुष्टों का संहार करते हैं।
आचार्य सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। कृष्ण जन्मोत्सव हमें यह भी प्रेरणा देता है कि जैसे कारागार की घोर अंधकारमय रात में भगवान का जन्म हुआ। वैसे ही हर कठिनाई के बाद आशा और प्रकाश का नया मार्ग खुलता है।
कथा पंडाल में नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजन और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। महिलाओं ने मटकी सजाकर झूमते हुए भक्ति नृत्य किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया गया। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और जीवन को सही दिशा देने का साधन है।
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उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कथा से मिले संदेशों को जीवन में उतारकर समाज को और बेहतर बनाने में योगदान दें। रविवार को कथा का समापन दिवस होगा। इसमें रासलीला और सत्संग का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।
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कथा व्यास आचार्य सुरेश चंद्र शर्मा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष में सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है। जब-जब धरती पर पाप और अधर्म का भार बढ़ता है, तब-तब भगवान अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं और दुष्टों का संहार करते हैं।
आचार्य सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म संदेश देता है कि हमें अपने जीवन में सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए। कृष्ण जन्मोत्सव हमें यह भी प्रेरणा देता है कि जैसे कारागार की घोर अंधकारमय रात में भगवान का जन्म हुआ। वैसे ही हर कठिनाई के बाद आशा और प्रकाश का नया मार्ग खुलता है।
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कथा पंडाल में नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजन और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। महिलाओं ने मटकी सजाकर झूमते हुए भक्ति नृत्य किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया गया। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और जीवन को सही दिशा देने का साधन है।
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उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कथा से मिले संदेशों को जीवन में उतारकर समाज को और बेहतर बनाने में योगदान दें। रविवार को कथा का समापन दिवस होगा। इसमें रासलीला और सत्संग का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।