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एसडीएम करेंगे पंचों के फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 24 May 2017 10:22 PM IST
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नारनौल। गांव भुंगारका में शराब का ठेका खुलवाने के मामले में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल बुधवार को जिला प्रमुख राजेश देवी के नेतृत्व में डीसी से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने आबकारी विभाग को सरपंच जगत सिंह द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव में पंचों के करवाए गए फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उपायुक्त ने ग्रामीणों को उक्त मामले की आगामी दो दिन में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट गए।
गौरतलब है कि गांव भुगारंका के सरपंच जगत सिंह ने आबकारी विभाग को पंचों के फर्जी हस्ताक्षर युक्त प्रस्ताव देकर गांव में शराब का ठेका खुलवा दिया है। जिसका पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद सहित अन्य ग्रामीण पिछले काफी दिनों से पुरजोर विरोध कर रहे हैं। शराब के ठेके को बंद करने के लिए ग्रामीणों ने उपायुक्त व आबकारी विभाग से गुहार लगाई थी। इसी दौरान ग्रामीणों को आबकारी विभाग से जानकारी लगी की शराब का ठेका खुलवाने के लिए ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव दे रखा है। इस प्रस्ताव में गांव पंचों के भी हस्ताक्षर करवाए थे। जबकि पंच भी अन्य ग्रामीणों की भांति गांव में शराब के ठेका को बंद करने के पक्ष में थे। इसके बाद पंचों ने उपायुक्त को शपथ देकर आबकारी विभाग को ग्राम पंचायत द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव में उनके द्वारा किए गए हस्ताक्षरों को फर्जी करार देते हुए इस मामले की जांच करवाकर वर्तमान सरपंच जगत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग थी।
उपायुक्त ने इस मामले की जांच एडीसी सुजान सिंह सौंप दी। एडीसी ने इस मामले की जांच हेतु पूछताछ के लिए एक-दो बार ग्रामीणों व पंचों को अपने कार्यालय बुलाया था, लेकिन ग्रामीणों से पूछताछ नहीं हो पाई। इसी दौरान एडीसी का तबादला हो गया और जांच अधर में ही लटक गई। ग्रामीणों का आरोप है कि एडीसी का तबादला होने के साथ ही पुलिस ने पूर्व सरपंच को शराब के ठेके पर तोड़-फोड़ व आगजनी करने का षड्यंत्र रचने पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूर्व सरपंच की गिरफ्तार व वर्तमान सरपंच के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण व पंच लघु सचिवालय पहुंचकर प्रशासन के विरुद्ध जमकर रोष प्रकट किया। वहीं दस पंचों ने भी सामूहिक रूप से अपना त्याग पत्र सीटीएम सुनील कुमार को सौंप दिया। इसके बाद ग्रामीण मंगलवार को दोबारा से उपायुक्त से मिलने पहुंचे, लेकिन उपायुक्त सरकारी कार्य से बाहर होने के कारण ग्रामीणों की मुलाकात नहीं हो पाई।
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इस ग्रामीण दोबारा से सीटीएम से मिलकर शराब के ठेके का बंद करवाने की मांग रखी थी। परंतु सीटीएम ने शराब के ठेका का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण प्रशासन कोई भी कार्रवाई करने में असमर्थ है। इसके बाद ग्रामीण बुधवार को एक बार फिर से उपायुक्त ने मिलने पहुंचे, जहां आज उनकी मुलाकात उनके कैंप कार्यालय में हुई। इस दौरान ग्रामीणों का प्रतिनिधि मंडल जिला प्रमुख राजेश देवी के नेतृत्व में उक्त मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों की मांग पर उपायुक्त ने उक्त मामले की जांच एसडीएम सतीश कुमार को सौंप दी। जोकि आगामी दो दिन में इस मामले की जांच कर उपायुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जाएगी।
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गौरतलब है कि गांव भुगारंका के सरपंच जगत सिंह ने आबकारी विभाग को पंचों के फर्जी हस्ताक्षर युक्त प्रस्ताव देकर गांव में शराब का ठेका खुलवा दिया है। जिसका पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद सहित अन्य ग्रामीण पिछले काफी दिनों से पुरजोर विरोध कर रहे हैं। शराब के ठेके को बंद करने के लिए ग्रामीणों ने उपायुक्त व आबकारी विभाग से गुहार लगाई थी। इसी दौरान ग्रामीणों को आबकारी विभाग से जानकारी लगी की शराब का ठेका खुलवाने के लिए ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव दे रखा है। इस प्रस्ताव में गांव पंचों के भी हस्ताक्षर करवाए थे। जबकि पंच भी अन्य ग्रामीणों की भांति गांव में शराब के ठेका को बंद करने के पक्ष में थे। इसके बाद पंचों ने उपायुक्त को शपथ देकर आबकारी विभाग को ग्राम पंचायत द्वारा सौंपे गए प्रस्ताव में उनके द्वारा किए गए हस्ताक्षरों को फर्जी करार देते हुए इस मामले की जांच करवाकर वर्तमान सरपंच जगत सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग थी।
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उपायुक्त ने इस मामले की जांच एडीसी सुजान सिंह सौंप दी। एडीसी ने इस मामले की जांच हेतु पूछताछ के लिए एक-दो बार ग्रामीणों व पंचों को अपने कार्यालय बुलाया था, लेकिन ग्रामीणों से पूछताछ नहीं हो पाई। इसी दौरान एडीसी का तबादला हो गया और जांच अधर में ही लटक गई। ग्रामीणों का आरोप है कि एडीसी का तबादला होने के साथ ही पुलिस ने पूर्व सरपंच को शराब के ठेके पर तोड़-फोड़ व आगजनी करने का षड्यंत्र रचने पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूर्व सरपंच की गिरफ्तार व वर्तमान सरपंच के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण व पंच लघु सचिवालय पहुंचकर प्रशासन के विरुद्ध जमकर रोष प्रकट किया। वहीं दस पंचों ने भी सामूहिक रूप से अपना त्याग पत्र सीटीएम सुनील कुमार को सौंप दिया। इसके बाद ग्रामीण मंगलवार को दोबारा से उपायुक्त से मिलने पहुंचे, लेकिन उपायुक्त सरकारी कार्य से बाहर होने के कारण ग्रामीणों की मुलाकात नहीं हो पाई।
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इस ग्रामीण दोबारा से सीटीएम से मिलकर शराब के ठेके का बंद करवाने की मांग रखी थी। परंतु सीटीएम ने शराब के ठेका का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण प्रशासन कोई भी कार्रवाई करने में असमर्थ है। इसके बाद ग्रामीण बुधवार को एक बार फिर से उपायुक्त ने मिलने पहुंचे, जहां आज उनकी मुलाकात उनके कैंप कार्यालय में हुई। इस दौरान ग्रामीणों का प्रतिनिधि मंडल जिला प्रमुख राजेश देवी के नेतृत्व में उक्त मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों की मांग पर उपायुक्त ने उक्त मामले की जांच एसडीएम सतीश कुमार को सौंप दी। जोकि आगामी दो दिन में इस मामले की जांच कर उपायुक्त को रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इस जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जाएगी।