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Mahendragarh-Narnaul News: लुवास के वैज्ञानिकों ने रेबीज से बचाव के प्रति जागरूक किया
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नारनौल।
लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ व पशु रोग जांच प्रयोगशाला की ओर से रेबीज जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आनंद पाण्डेय के निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. ज्योति शुंथवाल व डॉ. देवेंद्र सिंह द्वारा हुडिना के पशु चिकित्सक डॉ. मधु सुदन के सहयोग से किया गया। जागरूकता अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीम अलग अलग स्कूलों में विशेषकर 15 साल तक के बच्चों को रेबीज से बचाव के तरीकों पर जागरूक किया। गांव हुडिना व महरमपुर के स्कूलों में अध्यापकों के सहयोग से जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
वैज्ञानिकों ने बच्चों को बताया कि रेबीज विषाणु से होने वाला एक पशु जन्य रोग हैं जो शत प्रतिशत घातक बीमारी है। जिसके लक्षण आने पर व्यक्ति की मृत्यु तय है, परंतु सही समय पर सही बचाव व इलाज से इस जानलेवा रोग को शत प्रतिशत रोका भी जा सकता है। यह बीमारी मुख्यत: कुत्तों के काटने से होती है और रेबीज से 15 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जिसका कारण छोटे बच्चों को इस खतरनाक बीमारी की कम जानकारी होना, अपने माता पिता के डांट के भय से ऐसी बात छिपाना हैं।
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डॉ. ज्योति ने बताया कि आवारा कुत्तों से दूरी बनाए, उनके अधिक नजदीक ना जाए। अगर आपको कुत्ता काट ले तो तुरंत घाव का उपचार करे। घाव को चलते पानी के नीचे साबुन के साथ लगातार 15 मिनट तक अच्छे से धोएं।
डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि पालतू कुत्तों को रेबीज से सुरक्षित करने के लिए पालतू कुत्तों का एंटी रेबीज टीकाकरण जरूर कराएं। वैज्ञानिकों ने सभी स्कूलों के अध्यापकों का धन्यवाद किया।
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लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ व पशु रोग जांच प्रयोगशाला की ओर से रेबीज जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. आनंद पाण्डेय के निर्देशन में वैज्ञानिक डॉ. ज्योति शुंथवाल व डॉ. देवेंद्र सिंह द्वारा हुडिना के पशु चिकित्सक डॉ. मधु सुदन के सहयोग से किया गया। जागरूकता अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीम अलग अलग स्कूलों में विशेषकर 15 साल तक के बच्चों को रेबीज से बचाव के तरीकों पर जागरूक किया। गांव हुडिना व महरमपुर के स्कूलों में अध्यापकों के सहयोग से जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
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वैज्ञानिकों ने बच्चों को बताया कि रेबीज विषाणु से होने वाला एक पशु जन्य रोग हैं जो शत प्रतिशत घातक बीमारी है। जिसके लक्षण आने पर व्यक्ति की मृत्यु तय है, परंतु सही समय पर सही बचाव व इलाज से इस जानलेवा रोग को शत प्रतिशत रोका भी जा सकता है। यह बीमारी मुख्यत: कुत्तों के काटने से होती है और रेबीज से 15 साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जिसका कारण छोटे बच्चों को इस खतरनाक बीमारी की कम जानकारी होना, अपने माता पिता के डांट के भय से ऐसी बात छिपाना हैं।
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डॉ. ज्योति ने बताया कि आवारा कुत्तों से दूरी बनाए, उनके अधिक नजदीक ना जाए। अगर आपको कुत्ता काट ले तो तुरंत घाव का उपचार करे। घाव को चलते पानी के नीचे साबुन के साथ लगातार 15 मिनट तक अच्छे से धोएं।
डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि पालतू कुत्तों को रेबीज से सुरक्षित करने के लिए पालतू कुत्तों का एंटी रेबीज टीकाकरण जरूर कराएं। वैज्ञानिकों ने सभी स्कूलों के अध्यापकों का धन्यवाद किया।