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Mahendragarh-Narnaul News: आज से सावन माह, शुरू दो महीने तक शिवालयों में गूंजेंगे बम-बम के जयकारे
Tue, 04 Jul 2023 12:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 04 Jul 2023 12:41 AM IST
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सज गए भोलेनाथ... श्रावण शुरू होते ही मोदाश्रम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सजाया गया शिवलिंग।
महेंद्रगढ़। सावन महीना आज से शुरू हो गया है। क्षेत्र में शिवालय आज से बम-बम के जयकारों से गुंजायमान होगा। मलमास होने की वजह इस साल 59 दिनों तक बाबा चंद्रमोली का जलाभिषेक किया जाएगा। इसके लिए मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसी महीने शिवरात्रि पर भक्त हरिद्वार तथा गोमुख से कांवड लाकर मंदिरों में चढ़ाएंगे।
पंडित रविदत्त शर्मा ने बताया कि सावन माह में सोमवार का व्रत करनाऔर सावन में स्नान की परंपरा है। इस महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अतिफलदायी माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को स्नान आदि कर जलाभिषेक करना चाहिए तथा भगवना शंभू को बिलपत्र आदि चढ़ाना चाहिए। दिन में एक समय भोजन करना चाहिए। साथ ही जमीन पर बिछाकर सोना चाहिए। दूध चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। सच्चे भाव से उनकी पूजा अर्चना करने से मनवांच्छित फल मिलता है।
उन्होंने बताया कि इस बार 13 माह का साल होगा। इसमें सावन पांचवां सोमवार अधिमास होगा। 19 वर्षों के बाद ऐसा संयोग बना है। ऐसे में भक्तों को शिव की आराधना के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। मलमास या पुरुषोत्तम मास के कारण चतुर्मास इस साल चार की बजाय पांच सूर्य ग्रहण महीने का होगा और सभी व्रत त्योहार देर से आएंगे। पंचांग के अनुसार सावन चार जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। अधिक मास 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त को समाप्त होगा। 17 जुलाई को सोमवती अमावस्या पड़ेगी। महाशिवरात्रि 15 जुलाई को होगी। मलमास ढाई वर्ष 16 दिन के अंतराल पर लगता है।
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पंडित रविदत्त शर्मा ने बताया कि सावन माह में सोमवार का व्रत करनाऔर सावन में स्नान की परंपरा है। इस महीने शिवलिंग पर जलाभिषेक करना अतिफलदायी माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को स्नान आदि कर जलाभिषेक करना चाहिए तथा भगवना शंभू को बिलपत्र आदि चढ़ाना चाहिए। दिन में एक समय भोजन करना चाहिए। साथ ही जमीन पर बिछाकर सोना चाहिए। दूध चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। सच्चे भाव से उनकी पूजा अर्चना करने से मनवांच्छित फल मिलता है।
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उन्होंने बताया कि इस बार 13 माह का साल होगा। इसमें सावन पांचवां सोमवार अधिमास होगा। 19 वर्षों के बाद ऐसा संयोग बना है। ऐसे में भक्तों को शिव की आराधना के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। मलमास या पुरुषोत्तम मास के कारण चतुर्मास इस साल चार की बजाय पांच सूर्य ग्रहण महीने का होगा और सभी व्रत त्योहार देर से आएंगे। पंचांग के अनुसार सावन चार जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। अधिक मास 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त को समाप्त होगा। 17 जुलाई को सोमवती अमावस्या पड़ेगी। महाशिवरात्रि 15 जुलाई को होगी। मलमास ढाई वर्ष 16 दिन के अंतराल पर लगता है।
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