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सत्संग से मिलती है परिवार में मिल-जुलकर रहने की प्रेरणा : स्वामी ज्ञानानंद
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फोटो नंबर-05दिव्य गीता सत्संग कार्यक्रम में गीताजी की आरती करते विधायक ओमप्रकाश यादव व अन्य।
नारनौल। श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार द्वारा आयोजित दिव्य गीता सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन वीरवार को गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को गीता के संदेश और पारिवारिक जीवन के महत्व से अवगत कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक ओमप्रकाश यादव ने श्रीमद्भगवद्गीता का पूजन कर किया। संस्था के संरक्षक डॉ. अशोक आहुजा और प्रधान सुरेंद्र यादव ने अतिथियों का स्वागत किया।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि परिवारों के टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। सत्संग से दूरी इसका एक प्रमुख कारण है। सत्संग परिवार में प्रेम, त्याग और आपसी सहयोग की प्रेरणा देता है। उन्होंने भगवान राम और भरत के जीवन का उदाहरण दिया। राम ने वनवास सहजता से स्वीकारा। भरत ने चरण पादुका से राज्य का संचालन किया। उनके जीवन में त्याग और प्रेम की भावना थी, जिससे समाज को सीख लेनी चाहिए।
स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अध्यात्म और भौतिकवाद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मीरा और कंस का उदाहरण देते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य का सही मार्गदर्शन कर सकती है। गीता के श्लोकों को केवल पढ़ने के बजाय दैनिक जीवन के आचरण में उतारना चाहिए। वीरवार दोपहर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्री अनाथ गोशाला पहुंचकर गो पूजन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को गोसेवा के लिए प्रेरित किया।
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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि परिवारों के टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। सत्संग से दूरी इसका एक प्रमुख कारण है। सत्संग परिवार में प्रेम, त्याग और आपसी सहयोग की प्रेरणा देता है। उन्होंने भगवान राम और भरत के जीवन का उदाहरण दिया। राम ने वनवास सहजता से स्वीकारा। भरत ने चरण पादुका से राज्य का संचालन किया। उनके जीवन में त्याग और प्रेम की भावना थी, जिससे समाज को सीख लेनी चाहिए।
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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अध्यात्म और भौतिकवाद पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मीरा और कंस का उदाहरण देते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य का सही मार्गदर्शन कर सकती है। गीता के श्लोकों को केवल पढ़ने के बजाय दैनिक जीवन के आचरण में उतारना चाहिए। वीरवार दोपहर स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने श्री अनाथ गोशाला पहुंचकर गो पूजन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को गोसेवा के लिए प्रेरित किया।
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