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Mahendragarh-Narnaul News: टीबी जांच शिविर में 17 संभावित मरीजों के सैंपल जांच को भेजे
Sun, 05 Apr 2026 02:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 05 Apr 2026 02:26 AM IST
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फोटो संख्या:60- उप स्वास्थ्य केंद्र देवास में मरीजों की स्वास्थ्य की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी
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महेंद्रगढ़। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उप स्वास्थ्य केंद्र देवास में टीबी जांच शिविर एवं जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया। टीबी जांच शिविर में 97 लोगों की स्क्रीनिंग की जिनमें 17 टीबी के संभावित लोगों के बलगम के सैंपल कनीना लैब में जांच के लिए भेजे हैं।
शिविर के बाद एक स्वास्थ्य जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया इसकी अध्यक्षता सीएचओ हिमांशु ने की और संचालन स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल ने किया। इस अवसर टीबी यूनिट कनीना से एसटीएस पवन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सीएचओ डॉ. हिमांशु व एसटीएस पवन कुमार एवं स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी होने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं। चिकित्सक की सलाह पर एक्स-रे करवाएं एवं अपने बलगम की जांच करवाए।
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जांच में टीबी की पुष्टि होने पर डॉट्स प्रणाली को अपनाए और टीबी की नियमित दवाई लें। फेफड़ों की टीबी छह माह दवा का पूरा कोर्स लेने से मरीज ठीक हो जाता हैं। हड्डी की टीबी, गांठ वाली टीबी, पेट की टीबी आदि जिनको एक्स्ट्रा पलमानरी टीबी कहते है उसको पूरी तरह ठीक होने में छह माह से अधिक समय लग सकता है।
टीबी के मरीज को सरकार द्वारा खुराक लेने के लिए एक हजार रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस बैठक में स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल, रोशनी देवी, आशा वर्कर सुनीता देवी, पवन, जितेंद्र, रघुबीर, अमित आर्य मौजूद रहे।
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शिविर के बाद एक स्वास्थ्य जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया इसकी अध्यक्षता सीएचओ हिमांशु ने की और संचालन स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल ने किया। इस अवसर टीबी यूनिट कनीना से एसटीएस पवन कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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सीएचओ डॉ. हिमांशु व एसटीएस पवन कुमार एवं स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक समय से लगातार खांसी होने पर अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं। चिकित्सक की सलाह पर एक्स-रे करवाएं एवं अपने बलगम की जांच करवाए।
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जांच में टीबी की पुष्टि होने पर डॉट्स प्रणाली को अपनाए और टीबी की नियमित दवाई लें। फेफड़ों की टीबी छह माह दवा का पूरा कोर्स लेने से मरीज ठीक हो जाता हैं। हड्डी की टीबी, गांठ वाली टीबी, पेट की टीबी आदि जिनको एक्स्ट्रा पलमानरी टीबी कहते है उसको पूरी तरह ठीक होने में छह माह से अधिक समय लग सकता है।
टीबी के मरीज को सरकार द्वारा खुराक लेने के लिए एक हजार रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस बैठक में स्वास्थ्यकर्मी सतीश खैरवाल, रोशनी देवी, आशा वर्कर सुनीता देवी, पवन, जितेंद्र, रघुबीर, अमित आर्य मौजूद रहे।