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सी-आर्म मशीन के लिए 15 लाख रुपये नहीं

Mon, 22 Aug 2022 11:27 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 11:27 PM IST
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Rs 15 lakh for C-arm machine
नारनौल। जिला नागरिक अस्पताल में हड्डी जोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन नहीं है। पिछले तीन वर्षों में सरकार को दस बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है, लेकिन भी अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। सड़क दुर्घटना में घायल एवं गिरकर हड्डी टूटे जाने वालों को रेफर किया जाता है। जिले में चार आर्थोपेडिक्स चिकित्सक हैं। जिनको सरकार लगभग चार लाख रुपये प्रतिमाह (सालाना वेतन 48 लाख) वेतन दे रही है, लेकिन सरकार 15 लाख रुपये का एक मशीन खरीदकर नहीं दे पा रही। इसी वजह से लगभग 11 लाख की आबादी वाले जिले के मरीजों को इन चिकित्सकों का लाभ नहीं मिल पा रहा। गरीब एवं असहाय मरीजों को निजी अस्पताल में इलाज करवाना पड़ता है।
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सरकारी अस्पताल अब गरीबों का अस्पताल माने जाने लगा है। अस्पताल के अंदर गरीब एवं असहाय लोग ही इलाज के लिए आते हैं। उच्च एवं मध्यम वर्ग के अधिकतर लोग निजी अस्पताल में इलाज करवाने जाते हैं। जिले में प्रति माह 150 से 200 मरीज हड्डी टूटे हुए आते हैं जिनका सीआर्म मशीन से इलाज संभव होता है। मशीन के अभाव में मरीज को एडमिट न कर हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। कई लोग घायलों को निजी अस्पताल में ले जाते हैं जहां पर उनको 35 से 50 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। गरीब एवं असहाय तीमारदारों को कर्जा कर अपने मरीजों का इलाज करवाना पड़ता है। जिले में प्रतिदिन हड्डी के मरीजों की 250 ओपीडी हो रही है। नारनौल में 150 तथा महेंद्रगढ़ 100 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। प्रतिमाह जिले में 200 घायल आते हैं जो हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं। चिकित्सक मरीज को उपलब्ध संसाधनों से बेहतर से बेहतर इलाज करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कई बार मशीनों के अभाव में बीमारी ठीक से पकड़ में नहीं आती। इस कारण से इस गंभीर बीमारी के मरीजों को रोहतक या अन्य किसी और शहर के लिए रेफर करना पड़ता है।
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इंसेट
जिले में दो सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन की जरूरत
जिले में महेंद्रगढ़ एवं नारनौल दो नागरिक अस्पताल हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ केके यादव ने बताया कि सिविल अस्पताल की सबसे बड़ी जरूरत सी-आर्म इमेज इंटेंसिफायर मशीन की है। इसके अलावा एक ऑपरेशन थियेटर तथा उसमें काम करने वाले कर्मचारियों की आवश्यकता है। ओटी बना दिया गया है, लेकिन अभी तक ओटी में प्रयोग होने वाली मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। ये दोनों उपलब्ध हो जाएं तो मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। मरीज को यहीं पर सस्ता इलाज मिल पाएगा।
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इंसेट
रॉड डालने के काम आती है सी-आर्म मशीन
डॉ. केके यादव ने बताया कि सी-आर्म मशीन हड्डी से जुड़े ऑपरेशन के काम में आती है। यह मशीन 15 से 20 लाख रुपये की आती है। इस मशीन के जरिये डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान हड्डी या अंदर की जगह को स्क्रीन पर देख पाते हैं। इसके जरिये माइनर से लेकर बड़ा ऑपरेशन किया जा सकता है। इसके अलावा रॉड डालने तथा जोड़ों के पास टूटी हड्डी को जोड़ने के काम आती है। इससे यह पता चल जाता है कि कौन सा स्क्रू, रॉड कहां डालना है। इस मशीन के बिना ऑपरेशन करना असंभव होता है।

वर्जन
माइनिंग के बजट से मशीन का खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। इसका मीटिंग में प्रस्ताव भी किया हुआ है। इसकी मांग ऊपर भी भेजी हुई थी, लेकिन अभी अप्रूव नहीं हो पाई है।- डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन, नारनौल।
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