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करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी अंधेरा कायम
नारनौल/महेंद्रगढ़
Updated Fri, 28 Aug 2015 12:50 AM IST
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शहर की सड़कों और वार्डों की 70 प्रतिशत लाइटें खराब पड़ी हैं। केवल बाजार के अंदर की ही लाइटें ठीक हैं, उनमें से भी कुछ लाइटें बंद रहती हैं। नगरपालिका ने शहर के सौंदर्यीकरण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए थे। लेकिन इसके बाद भी रात में शहर अंधेरे में डूबा रहता है। लोग कई बार खराब पड़ी लाइटों की शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं लेकिन इन पर अमल नहीं हो पा रहा है। मंत्री का इलाका होने के बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
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नगरपालिका पार्षद सुरेंद्र बंटी ने बताया कि 2010-15 की योजना में 935 सोडियम लाइटें लगाई गई थी जिन पर करोड़ों रुपये की लागत आई थी। इसके अलावा दो हजार से अधिक ट्यूब लाइटें लगाई गई थीं। जबकि 400 के करीब सीएफएल लाइटें लगाई गई थीं। इसके बाद भी शहर में रोशनी दिखाई नहीं देती । इस समय शहर की 70 फीसदी लाइटें खराब पड़ी हैं।
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टेंडर की फाइल गायब
नगरपालिका की लापरवाही की कोई सीमा ही नहीं है। ऑफिस रिकार्ड भी मेंटेन नहीं रखा जाता। मंगलवार को नगरपालिका सचिव से उक्त लाइटों के बारे में जानकारी मांगने पर उन्होंने एक कर्मचारी को इसके बारे में कहा तो कर्मचारी का कहना था कि टेंडर की फाइल गायब हो गई है जिसके कारण वह जानकारी नहीं दे सकते।
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कहां-कहां बंद है लाइटें
सैनीपुरा से लेकर कैंची मोड़ तक सभी लाइटें बंद पड़ी हैं। ये लाइटें पिछले कई दिनों बंद पड़ी हैं।
मसानी चौक से माजरा चुंगी में आधी लाइटें जलती हैं और आंधी बंद पड़ी हैं।
माजरा चुंगी से रिवासा ओवरब्रिज से अधिकतर लाइटें बंद हैं।
एसवार्ड की 40 प्रतिशत लाइटें बंद हैं।
वार्डों की सोडियम लाइटें 70 प्रतिशत बंद हैं।
नयी लगाई गई सीएफ लाइटें भी बहुत सी बंद पड़ी हैं।