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आरक्षण पर जाटों का अधिकार, सरकार की मजबूत पैरवी की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Jan 2017 12:02 AM IST
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धरना देते जाट समुदाय के लोग
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आरक्षण पर जाटों का पूरा अधिकार है, सरकार की लचर व्यवस्था के चलते उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा है। समाधान होने तक जाट आरक्षण समिति शांति पूर्वक धरना जारी रखेगी। यह बात जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय सचिव हजारीलाल लंबोरा व जिला प्रधान कवरसिंह ने संयुक्त रूप से धरना स्थल पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न जातियों को आरक्षण मुहैया करवा दिया गया लेकिन जाट बिरादरी वंचित है। जिसके लिए जाट समुदाय के लोग पिछले कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां आरक्षण देने को तैयार नहीं है। जाटों को भटकाने के मकसद से विशेष कैटेगरी बनाकर आरक्षण दिया गया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। पिछले साल प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया गया था, उस दौरान सीएम द्वारा कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई थी जिसमें जाटों समेत विभिन्न बिरादरी को आरक्षण का लाभ दिया गया था लेकिन नामजद लोगों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। इस दौरान सरकार ने मजबूत पैरवी नहीं की जिस कारण रोक लगा दी गई जिससे आक्रोशित जाट समाज द्वारा दोबारा आंदोलन की रणनीति बनाई गई। सरकार ने मुआवजा देकर जाटों को बरगलाने का प्रयास किया। सफलता नहीं मिलने पर मृतकों के एक-एक परिजनों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी गई। उन्होंने कहा कि नौकरी देना ही पर्याप्त नहीं, आरक्षण मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। इससे पहले करीब 11 बजे धरना स्थल पर प्रधान कवरसिंह समेत 8-10 लोग पहुंचे। दोपहर एक बजे बजे तक मुश्किल से 60 लोगों ने हाजिरी दर्ज कराई।
भाईचारा नहीं बिगड़ने देंगे
आरक्षण समिति के राष्ट्रीय सचिव व रामकुवार मकसूसपुरिया आदि ने बताया कि आरक्षण की लड़ाई सरकार के साथ है। विभिन्न जातियों के प्रति द्वेष भावना नहीं है, उनके साथ भाईचारा कायम रहेगा। धरने में शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए विशेष कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि आरक्षण पर जाटों का अधिकार है और मिलने तक चुप नहीं बैठेंगे।
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कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट
एसएचओ शफीउद्दीन ने बताया कि आरक्षण की आड़ में कानून व्यवस्था किसी भी सूरत में नहीं बिगड़ने दी जाएगी। पुलिस पूरी तरह अलर्ट है, हुड़दंगियों के खिलाफ सख्ती पूर्वक निपटा जाएगा। सोमवार को शाम चार बजे धरना शांति पूर्वक समाप्त हुआ है।
रविवार की अपेक्षा कम रही भीड़
एक फरवरी को बंसत पंचमी के सावे है। जिसके लग्न व प्रीतिभोज के कार्यक्रम सोमवार को संपन्न हो गए। जिस कारण धरने पर रविवार की अपेक्षा भीड़ कम रही दूसरा कारण प्रशासन की सख्ती भी माना जा रहा है। क्योंकि डीजीपी ने रोड जाम या अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न जातियों को आरक्षण मुहैया करवा दिया गया लेकिन जाट बिरादरी वंचित है। जिसके लिए जाट समुदाय के लोग पिछले कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां आरक्षण देने को तैयार नहीं है। जाटों को भटकाने के मकसद से विशेष कैटेगरी बनाकर आरक्षण दिया गया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। पिछले साल प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया गया था, उस दौरान सीएम द्वारा कैबिनेट की मीटिंग बुलाई गई थी जिसमें जाटों समेत विभिन्न बिरादरी को आरक्षण का लाभ दिया गया था लेकिन नामजद लोगों द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी गई। इस दौरान सरकार ने मजबूत पैरवी नहीं की जिस कारण रोक लगा दी गई जिससे आक्रोशित जाट समाज द्वारा दोबारा आंदोलन की रणनीति बनाई गई। सरकार ने मुआवजा देकर जाटों को बरगलाने का प्रयास किया। सफलता नहीं मिलने पर मृतकों के एक-एक परिजनों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी गई। उन्होंने कहा कि नौकरी देना ही पर्याप्त नहीं, आरक्षण मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। इससे पहले करीब 11 बजे धरना स्थल पर प्रधान कवरसिंह समेत 8-10 लोग पहुंचे। दोपहर एक बजे बजे तक मुश्किल से 60 लोगों ने हाजिरी दर्ज कराई।
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भाईचारा नहीं बिगड़ने देंगे
आरक्षण समिति के राष्ट्रीय सचिव व रामकुवार मकसूसपुरिया आदि ने बताया कि आरक्षण की लड़ाई सरकार के साथ है। विभिन्न जातियों के प्रति द्वेष भावना नहीं है, उनके साथ भाईचारा कायम रहेगा। धरने में शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए विशेष कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि आरक्षण पर जाटों का अधिकार है और मिलने तक चुप नहीं बैठेंगे।
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कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस अलर्ट
एसएचओ शफीउद्दीन ने बताया कि आरक्षण की आड़ में कानून व्यवस्था किसी भी सूरत में नहीं बिगड़ने दी जाएगी। पुलिस पूरी तरह अलर्ट है, हुड़दंगियों के खिलाफ सख्ती पूर्वक निपटा जाएगा। सोमवार को शाम चार बजे धरना शांति पूर्वक समाप्त हुआ है।
रविवार की अपेक्षा कम रही भीड़
एक फरवरी को बंसत पंचमी के सावे है। जिसके लग्न व प्रीतिभोज के कार्यक्रम सोमवार को संपन्न हो गए। जिस कारण धरने पर रविवार की अपेक्षा भीड़ कम रही दूसरा कारण प्रशासन की सख्ती भी माना जा रहा है। क्योंकि डीजीपी ने रोड जाम या अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं।