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Mahendragarh-Narnaul News: शोध छात्रा की करंट लगने से मौत, घर में पसरा मातम
Wed, 29 Jul 2026 12:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 29 Jul 2026 12:15 AM IST
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फोटो संख्या:-72 ककराला स्थित ज्योति का घर। संवाद
कनीना। चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में गांव ककराला निवासी 28 वर्षीय शोधार्थी ज्योति की करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना की सूचना परिवार में मातम छा गया और घर व आसपास में सन्नाटा पसरा हुआ है।
इसकी जानकारी मिलने पर परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे परिजन चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए। ज्योति का अंतिम संस्कार बुधवार को उसके पैतृक गांव ककराला में किया जाएगा।
ज्योति के पिता रविंद्र किसान हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। उसका भाई पवन गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत है। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि ज्योति बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी, अनुशासित और मेहनती थी।
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प्रारंभिक शिक्षा गांव से करने के बाद महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) से बीएससी, हिसार से एमएससी की और अब पंजाब यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी विषय में पीएचडी कर रही थी। परिजनों ने बताया कि ज्योति करीब दो महीने पहले ही अपने घर आई थी।
बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध कर वैज्ञानिक के रूप में देश की सेवा करना उनका सपना था। वह अपने शोध कार्य को लेकर बेहद गंभीर रहती थी। घर आने पर भी वह पौधों पर शोध और प्रयोग करती रहती थी।
ज्योति के मामा सुरेंद्र ने बताया कि फोन पर हादसे की सूचना मिलने पर पूरा परिवार सदमे में है और बहन राजबाला सहित सभी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि अभी तक परिजनों की ओर से कोई आरोप- प्रत्यारोप नहीं लगाए गए हैं।
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इसकी जानकारी मिलने पर परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे परिजन चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए। ज्योति का अंतिम संस्कार बुधवार को उसके पैतृक गांव ककराला में किया जाएगा।
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ज्योति के पिता रविंद्र किसान हैं। परिवार में एक भाई और एक बहन हैं। उसका भाई पवन गुरुग्राम की एक निजी कंपनी में कार्यरत है। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि ज्योति बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी, अनुशासित और मेहनती थी।
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प्रारंभिक शिक्षा गांव से करने के बाद महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) से बीएससी, हिसार से एमएससी की और अब पंजाब यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी विषय में पीएचडी कर रही थी। परिजनों ने बताया कि ज्योति करीब दो महीने पहले ही अपने घर आई थी।
बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में शोध कर वैज्ञानिक के रूप में देश की सेवा करना उनका सपना था। वह अपने शोध कार्य को लेकर बेहद गंभीर रहती थी। घर आने पर भी वह पौधों पर शोध और प्रयोग करती रहती थी।
ज्योति के मामा सुरेंद्र ने बताया कि फोन पर हादसे की सूचना मिलने पर पूरा परिवार सदमे में है और बहन राजबाला सहित सभी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हालांकि अभी तक परिजनों की ओर से कोई आरोप- प्रत्यारोप नहीं लगाए गए हैं।

फोटो संख्या:-72 ककराला स्थित ज्योति का घर। संवाद