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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि में गीता योग से किशोर मानसिक स्वास्थ्य पर होगा शोध
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फोटो संख्या:66- रिसर्च परियोजना स्वीकृत होने के पश्चात कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार के साथ डॉ. र
- फोटो : File Photo
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) के मनोविज्ञान विभाग के सहआचार्य डॉ. रवि प्रताप पांडेय को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) की ओर से 18 लाख रुपये की रिसर्च परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके तहत श्रीमद्भगवद्गीता में बताए गए योग अभ्यासों का किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने डॉ. रवि प्रताप पांडेय को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह शोध समाज के लिए उपयोगी साबित होगा और किशोरों के बेहतर मानसिक विकास में मदद करेगा।
इस परियोजना का शीर्षक रोल ऑफ योगिक प्रैक्टिसिज एंबेडेड इन श्रीमद्भगवदगीता फॉर एंहांसिंग द वैलबिंग ऑफ स्कूल गोइंग एडोल्सेंट्स है। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि गीता में बताए गए योग अभ्यास स्कूल जाने वाले किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास को किस तरह मजबूत कर सकते हैं।
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यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली के प्रो. शांतेश कुमार सिंह के सहयोग से पूरी की जाएगी। वे इस शोध में सह-अन्वेषक की भूमिका निभाएंगे।
डॉ. रवि प्रताप पांडेय ने आईसीएसएसआर का आभार जताते हुए कहा कि शोध के परिणाम किशोरों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित बेहतर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने में मददगार होंगे। इससे स्कूलों में विद्यार्थियों के तनाव, भावनात्मक समस्याओं और मानसिक मजबूती से जुड़े प्रयासों को नई दिशा मिल सकेगी।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने डॉ. रवि प्रताप पांडेय को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह शोध समाज के लिए उपयोगी साबित होगा और किशोरों के बेहतर मानसिक विकास में मदद करेगा।
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इस परियोजना का शीर्षक रोल ऑफ योगिक प्रैक्टिसिज एंबेडेड इन श्रीमद्भगवदगीता फॉर एंहांसिंग द वैलबिंग ऑफ स्कूल गोइंग एडोल्सेंट्स है। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि गीता में बताए गए योग अभ्यास स्कूल जाने वाले किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास को किस तरह मजबूत कर सकते हैं।
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यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली के प्रो. शांतेश कुमार सिंह के सहयोग से पूरी की जाएगी। वे इस शोध में सह-अन्वेषक की भूमिका निभाएंगे।
डॉ. रवि प्रताप पांडेय ने आईसीएसएसआर का आभार जताते हुए कहा कि शोध के परिणाम किशोरों के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित बेहतर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम तैयार करने में मददगार होंगे। इससे स्कूलों में विद्यार्थियों के तनाव, भावनात्मक समस्याओं और मानसिक मजबूती से जुड़े प्रयासों को नई दिशा मिल सकेगी।