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नारनौल: बच्चों का रिकवरी रेट शत-प्रतिशत, तीन माह में 85 को हुआ कोरोना, सबने दी मात  

Thu, 20 May 2021 03:15 PM IST
निवेदिता वर्मा पवन शर्मा, अमर उजाला, नारनौल (हरियाणा)
पवन शर्मा, अमर उजाला, नारनौल (हरियाणा) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 20 May 2021 03:15 PM IST
सार

डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मां-बाप इस समय अस्पताल आने से डर रहे हैं लेकिन इससे बीमारी के बढ़ने की आशंका बहुत ज्यादा हो जाती है। अतः बच्चे को थोड़े से लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

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Recovery Rate of Children is High in Narnaul of Haryana
बच्चों में कोरोना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की दूसरी लहर में बड़ों के साथ साथ बच्चे भी पॉजिटिव मिल रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि दो माह से लेकर 12 वर्ष के आयु के बच्चे इससे ज्यादा प्रभावित हैं। नारनौल में कोरोना के कुल केस अभी तक 19067 है। इसमें से तीन माह में लगभग 85 बच्चे संक्रमित मिले हैं जिनकी आयु दो माह से लेकर 12 वर्ष तक है। अच्छी बात यह है कि ये सभी बच्चे कोरोना से लड़कर जीत चुके हैं। सामान्य अस्पताल में तीन माह के दौरान 11 महिलाओं ने नवजात को जन्म दिया है। इनमें से किसी भी महिला का नवजात पॉजिटिव नहीं मिला। 

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नसीबपुर के ईश्वर शर्मा ने बताया कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद उनकी पत्नी की जब जांच हुई तो वह भी पॉजिटिव ही मिली। इसके बाद दो साल की बेटी ज्योति की जब जांच हुई तो उसका परिणाम भी ये ही मिला। ऐसे में सबसे अधिक चिंता उस नन्ही जान की थी। तीनों ने घर पर ही आइसोलेट होकर अपना इलाज किया। उनकी बेटी केवल पांच दिन में ही निगेटिव हो गई जबकि उनको इसके लिए दस से बारह दिन का इंतजार करना पड़ा। 
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कुछ ऐसा ही नारनौल के रहने वाले राधकिशन के बेटे 18 माह के दक्ष के साथ हुआ। दक्ष को हल्का बुखार हुआ। उसे अस्पताल ले जाया गया।चिकित्सकों ने दवा दी और उसको दूसरे बच्चों से दूर रखने की सलाह दी। इनका पालन किया गया और केवल सप्ताह में ही बच्चा ठीक हो गया।

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सामान्य अस्पताल में 11 पॉजिटिव महिलाओं की डिलीवरी, सभी बच्चे निगेटिव

सामान्य अस्पताल में तीन माह के दौरान 11 महिलाओं की डिलीवरी हुई। इनमें से किसी भी महिला का नवजात पॉजिटिव नहीं मिला। एक बच्चे को जन्म के बाद हल्का बुखार हुआ था उसको रैफर कर दिया गया था। जिसके बाद वह भी ठीक हो गया था, लेकिन उसकी रिपोर्ट निगेटिव थी।

क्या कहते हैं बाल रोग विशेषज्ञ
सामान्य अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप यादव का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर में बच्चे भी बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। रोजाना ओपीडी में बहुत सारे बच्चे देखते हैं जिनमें कोरोना के लक्षण हैं। अबकी बार दूसरी लहर में कोरोना के कुछ लक्षणों में बदलाव है। इसमें बच्चे को 4 से 5 दिन लगातार तेज बुखार रहता है उसके बाद उसको हल्की खांसी और जुखाम शुरू होता है। काफी बच्चों में उल्टी दस्त व शरीर पर दाने के लक्षण भी दिखाई दिए। डॉ. संदीप बताते हैं दूसरी लहर बच्चों में ज्यादा गंभीर नहीं हैं अगर समय पर इलाज मिले तो बीमारी के बढ़ने के आशंका कम हो जाती है। उनका मानना है कि बच्चों में बुखार के लक्षण दिखाई देते ही तुरंत दवा शुरू कर देनी चाहिए और गंभीर बीमारी के लक्षण जैसे बच्चे का बहुत ज्यादा उल्टी होना, बहुत ज्यादा दस्त होना, ज्यादा खांसी होना, सांस लेने में तकलीफ होना, पसलियां चलना जैसे लक्षण दिखने पर उनको तुरंत बच्चों के डॉक्टर को दिखाएं।

सरकारी अस्पताल की ओपीडी बच्चों के लिए है खुली
डॉ. संदीप यादव का कहना है कि सरकारी अस्पताल में बच्चों की ओपीडी लगातार खुली हुई है। इसलिए अस्पताल दिखाने से घबराएं नहीं। बच्चों को बाहर न जाने दें। उनके खाने पीने का उचित ध्यान रखें। अस्पताल में छोटे बच्चों के लिए अलग से वार्ड बनाया हुआ है। लोग कोरोना संक्रमण के चलते नागरिक अस्पताल में आने से घबराते है। जिससे बच्चों को सही इलाज नहीं मिल रहा पाता है। जिसके कारण बच्चे में बीमारी अधिक फैल जाती है। जिससे बच्चे को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।

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