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स्टेज कैरिज संशोधन पॉलिसी के विरोध में दिया धरना

Thu, 04 Aug 2022 11:18 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 04 Aug 2022 11:18 PM IST
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Protest against Stage Carriage Amendment Policy
नारनौल। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने वीरवार को स्टेज कैरिज संशोधन पॉलिसी 2017 के विरोध में नारनौल डिपो में दो घंटे तक धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन कार्यशाला प्रबंधक अनित कुमार को ज्ञापन सौंप कर पॉलिसी को रद्द करने की मांग की।
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इस मौके पर यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार स्टेज कैरिज पॉलिसी 2017 में संशोधन करके 952 मार्गों पर बिना जनता एवं प्रतिनिधियों की मांग के परमिट देना चाहती है। यह पॉलिसी न तो आम जनता के हित में है और ना ही विभाग के हित में है। पूर्व में भी सरकार द्वारा 1993 में ग्रामीण अंचल में रहने वाली जनता को परिवहन सेवा देने के नाम पर प्राइवेट परमिट दिए गए थे। उस समय सरकार द्वारा यह भी कहा गया था कि गांव में परिवहन सेवा मिलेगी और बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा। 1993 की पॉलिसी के परिणाम सरकार व आम जनता के सामने हैं। परिवहन समिति की बस किसी गांव में सेवा नहीं दे रही है। अब यह बसें पूंजीपति लोगों के अधीन हैं और केवल लाभ के रूटों पर ही चल रही है।
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कोरोना महामारी काल में भी रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह न करके आम जनता को दूसरे राज्य में भी उनके गंतव्य तक पहुंचाया है। दूसरी ओर परिवहन समितियों के मालिक सरकार के किसी भी आदेश को नहीं मानते हैं। आदेश चाहे छात्राओं को निशुल्क यात्रा करवाने के हो या बुजुर्ग महिलाओं को आज आधी टिकट पर यात्रा करवाने के हो। समिति की एक बस सरकार के खजाने में एक महीने में केवल 14 हजार रुपये जमा करवाती है। लंबी दूरी के परमिट व मुख्य मार्गों पर प्राइवेट परमिट देकर सरकार मोटर व्हीकल एक्ट 1961 का उल्लंघन कर रही है। पूर्व में रोडवेज कर्मचारियों ने संघर्ष करके विभाग एवं जनहित में 2016 स्टेज कैरिज पॉलिसी के दुष्परिणाम बताकर निवर्तमान परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में 2017 में इस पॉलिसी को रद्द करवाया था। सरकार यूनियन व परिवहन मंत्री की मीटिंग में हुए समझौते को तोड़कर वादाखिलाफी भी कर रही है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा पुन: मांग करता है कि स्टेज कैरिज संशोधित परमिट पॉलिसी 2017 न तो जनहित में है और ना ही विभाग हित में है। इसलिए उक्त पॉलिसी को रद्द करके प्रदेश की बढ़ती आबादी अनुसार रोडवेज बेड़े में नई सरकारी बसें शामिल की जाए। ताकि जनता को बेहतर एवं सुरक्षित परिवहन सेवा के साथ बेरोजगार युवाओं को स्थायी रोजगार मिले और सरकार के खजाने में राजस्व के रूप में भी बढ़ोतरी हो सके। धरने में रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रधान अनिल भीलवाड़ा, सचिव कर्मवीर, चीफ ऑडिटर देवव्रत सिहोर, प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र, चालक संघ के राज्य उप प्रधान बिट्टू हुडिना, इंटक प्रधान हंसराज, युजवेंद्र, प्रीतम बागड़ी, सुरेंद्र एडवोकेट, नीरज, अजय, मुकेश, सुंदर बेवल सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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