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चेयरपर्सन पक्ष के अधिवक्ता बोले - प्रधान को बैठक बुलाने का पूरा हक

Mon, 23 Dec 2019 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 23 Dec 2019 11:51 PM IST
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pradhan in not meeting come in order
नगर पालिका के छह पार्षदों की सदस्यता रद्द करने को लेकर चल रहे केस में सोमवार को डीसी कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। पार्षद पक्ष के अधिवक्ता करण सिंह ने कहा कि नगर पालिका अधिनियम के अनुसार नपा प्रधान को मीटिंग बुलाने का अधिकार नहीं होता इसलिए प्रधान द्वारा बुलाई गई सभी मीटिंग अवैध थी इसलिए पार्षद मीटिंग में नहीं गए। चेयरपर्सन पक्ष के अधिवक्ता रणवीर सिंह ने दावा किया कि प्रधान की नपा का सर्वेसर्वा होता है। इसलिए उसको मीटिंग बुलाने का अधिकार होता है। उन्होंने कहा कि इस बारे में उच्च न्यायालय के आदेश भी हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद उपायुक्त ने अगली तारीख 13 जनवरी की दी है।
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रीना गर्ग ने अगस्त माह में नपा की लगातार चार मीटिंग में पार्षदों के शामिल नहीं होने का हवाला देकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में नपा के उप प्रधान रमेश बोहरा, पार्षद डॉ. तरुण, कृष्ण शर्मा, देवेंद्र सैनी, बबीता सैनी, विष्णु वाल्मीकि की सदस्यता रद्द करने की मांग थी। चेयरपर्सन ने अपनी याचिका में बताया कि 13 जुलाई 2017, 16 फरवरी 2018, 4 जनवरी 2019, 9 जनवरी 2019 की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। लगातार चार बैठकों में नहीं आने के कारण पार्षदों की सदस्यता को रद्द किया जाए। उच्च न्यायालय ने 4 सितंबर को इस याचिका को कोर्ट में निपटान कर मामला संबंधित अधिकारी को भेज दिया। पार्षदों के निलंबन, सदस्यता रद्द करने के बारे में शहरी स्थानीय निकाय के निदेशक के पास शक्तियां हैं। निदेशक ने इस मामले में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। डीसी ने इस मामले में 25 नवंबर , दो दिसंबर को सुनवाई थी। 9 दिसंबर को पार्षदों ने इसका जबाव दाखिल किया था।
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आज उपायुक्त ने दोनों पक्षों की बहस के बाद 13 जनवरी अगली तारीख दी है। हरियाणा म्युनिसिपल एक्ट 229 के तहत प्रधान मीटिंग बुला सकता है। सचिव तो नोटिस देने का माध्यम है। अगर सचिव नोटिस नहीं देता है तो नोटिस देने की पॉवर प्रधान के पास भी है। अगर कोई मीटिंग स्थगित हो जाती है तो भी प्रधान अगली मीटिंग बुला सकता है।
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- रणबीर सिंह, अधिवक्ता (नपा प्रधान पक्ष)
हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट के तहत प्रधान को मीटिंग बुलाने का कोई हक नहीं है। मीटिंग सचिव बुला सकता है। चार मीटिंग में से एक मीटिंग तो स्वयं सचिव ने कैंसिल की थी। बैठकों को सचिव द्वारा नहीं बुलाया गया था और न ही पार्षदों के पास नोटिस सचिव द्वारा भेजे गए। प्रधान सिर्फ मीटिंग की तारीख, समय और जगह निर्धारित कर सकता है।
- करण सिंह, अधिवक्ता, (पार्षद पक्ष)
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