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Mahendragarh-Narnaul News: कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी को मिला निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान
Wed, 19 Feb 2025 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 19 Feb 2025 12:21 AM IST
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फोटो नंबर- 15कार्यक्रम में डॉ. त्रिलोकचंद फतेहपुरी को सम्मानित करते अतिथि। स्रोत-स्वयं
मंडी अटेली। राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान समारोह 2025 का आयोजन कलानौर रोहतक में किया गया। इस कार्यक्रम में देश के जाने-माने कवि व साहित्यकार उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अटेली निवासी कवि व साहित्यकार डॉ. त्रिलोकचंद फतेहपुरी को निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया। सम्मान राष्ट्रीय हिंदी हरियाणवी सेवा, भाषा, साहित्य अनुवाद क्षेत्र व भारतीय संस्कृति के प्रति अनवरत लेखन के लिए दिया गया है। कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी को प्रशस्ति पत्र मोमेंटो, शाल व अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इनकी दो पुस्तकों रतनपुर की महामाया चंपू संग्रह व हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अनुदान से प्रकाशित ये हीरे हिंदुस्तान का लोकार्पण किया गया। प्रज्ञा प्रतिष्ठान रोहतक के संस्थापक डॉक्टर मधुकांत ने भी अंग वस्त्र, शाॅल व मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता प्रोफेसर बाबू राम ने की। साथ ही मुख्य अतिथि डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी निदेशक हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला व विशिष्ट अतिथि रामफल खटकड़, हास्य कवि हलचल हरियाणवी, डॉ. एसके शर्मा, डॉ. मधुकांत, डॉ. जयभगवान सिंगला व डॉ. अशोक कुमार मंगलेश रहे। तीन सत्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रथम सत्र में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिए जाने पर उपस्थित विद्वानों द्वारा वक्तव्य व विचार विमर्श किया गया। दूसरे सत्र में पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम व तीसरे सत्र में उपस्थित इकत्तीस साहित्यकारों और कवियों को सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर अटेली निवासी कवि व साहित्यकार डॉ. त्रिलोकचंद फतेहपुरी को निराला हिंदी साहित्य रत्न सम्मान 2025 से सम्मानित किया गया। सम्मान राष्ट्रीय हिंदी हरियाणवी सेवा, भाषा, साहित्य अनुवाद क्षेत्र व भारतीय संस्कृति के प्रति अनवरत लेखन के लिए दिया गया है। कवि त्रिलोक चंद फतेहपुरी को प्रशस्ति पत्र मोमेंटो, शाल व अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इनकी दो पुस्तकों रतनपुर की महामाया चंपू संग्रह व हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के अनुदान से प्रकाशित ये हीरे हिंदुस्तान का लोकार्पण किया गया। प्रज्ञा प्रतिष्ठान रोहतक के संस्थापक डॉक्टर मधुकांत ने भी अंग वस्त्र, शाॅल व मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
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सम्मान समारोह की अध्यक्षता प्रोफेसर बाबू राम ने की। साथ ही मुख्य अतिथि डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी निदेशक हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला व विशिष्ट अतिथि रामफल खटकड़, हास्य कवि हलचल हरियाणवी, डॉ. एसके शर्मा, डॉ. मधुकांत, डॉ. जयभगवान सिंगला व डॉ. अशोक कुमार मंगलेश रहे। तीन सत्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रथम सत्र में हरियाणवी बोली को भाषा का दर्जा दिए जाने पर उपस्थित विद्वानों द्वारा वक्तव्य व विचार विमर्श किया गया। दूसरे सत्र में पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम व तीसरे सत्र में उपस्थित इकत्तीस साहित्यकारों और कवियों को सम्मानित किया गया।
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