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Mahendragarh-Narnaul News: मरीजों को नहीं मिला समय पर उपचार, एंबुलेंस सेवा भी रही ठप
Sat, 27 Jul 2024 12:35 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 27 Jul 2024 12:35 AM IST
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नारनौल।
आमजन को पहले ही चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मियों के हड़ताल पर जाने से मरीजों का दर्द और बढ़ गया। शुक्रवार को नारनौल के नागरिक अस्पताल में फिजिशियन सहित एक दो ओपीडी को छोड़कर दूसरे दिन भी ज्यादातर ओपीडी बंद रही। इससे मरीजों को बिना उपचार के ही घर वापस जाना पड़ा। अस्पताल में ज्यादातर ओपीडी तो दिनभर बंद रही।
वहीं, कुछ ओपीडी में एनएचएम के तहत लगे चिकित्सक मरीजों को देखने में जुटे रहे। उस ओपीडी के बाहर मरीजों का घंटों इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आ रहा था। शुक्रवार को भी नेत्र रोग विशेषज्ञ, मनोरोग और ईएनटी की ओपीडी सुबह से बंद रही। वहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ हड़ताल पर जाने से उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। बता दे कि जिले भर में 80 से ज्यादा चिकित्सक हड़ताल पर चले गए हैं।
एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फोन की बजती रही घंटी :
चिकित्सकों के बाद अब एनएचएम कर्मियों ने भी हड़ताल शुरू कर दी है। इससे नागरिक अस्पताल में प्रसूति वार्ड, एंबुलेंस कंट्रोल रूम, नवजात शिशु नर्सरी, एनआरसी, वरिष्ठ नागरिक ओपीडी, डीईआईसी, आयुष विंग, सिविल सर्जन कार्यालय की एनएचएम शाखा का कार्य बाधित रहा। वहीं एंबुलेंस कंट्रोल रूप में जहां प्रतिदिन 50 से 55 काल आने पर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। वहीं शुक्रवार को हड़ताल पर कर्मी होने से एंबुलेंस कंट्रोल रूम में लगे फोन की घंटी बजती रही। वहीं शुक्रवार शाम तक मात्र 7 जगहों पर एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध हो सकी।
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1000 से ऊपर रहने वाली ओपीडी 603 पर सिमटी
शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से 603 मरीजों को ही उपचार मिल सका। हालांकि अन्य दिनों में नागरिक अस्पताल की ओपीडी 1000 से ऊपर रहती है। शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में 1 पोस्टमार्टम, 22 मरीजों को भर्ती, 9 महिलाओं का प्रसव करवाया गया। इसके अलावा 3 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया।
कुछ दिनों से आंखों में जलन हो रही थी। शुक्रवार काे वरिष्ठ नागरिक ओपीडी में चिकित्सक से दवाइयां भी लेनी थी। मगर चिकित्सकों की हड़ताल के कारण आंखों का उपचार भी नहीं हुआ। वरिष्ठ नागरिक ओपीडी से दवाइयां भी नहीं लिखवा पाई। मेरे गांव से नागरिक अस्पताल बहुत दूर हैं। इसलिए सुबह 9 बजे तक अस्पताल पहुंच गई थी ताकि समस्या का सामना नहीं करना पड़े। मगर हड़ताल होने के कारण मजबूरन बिना उपचार के घर वापस जाना पडे़गा।
रोशनी, मुलोदी।
जाखनी गांव में कुछ दिनों पहले हुई दुर्घटना में मेरी बहन के पैर में कुछ चोट आई थी। जिसका उपचार नागरिक अस्पताल नारनौल के हड्डी रोग विशेषज्ञ से चल रहा था। शुक्रवार को भी हम उपचार के लिए अस्पताल आए हुए थे। मगर हड़ताल होने के कारण चिकित्सक कम थे और मरीज ज्यादा जिस कारण उपचार के लिए करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
नीरज, जाखनी।
चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से मरीजों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। इमरजेंसी सहित अन्य जरूरी सेवाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में 603 ओपीडी रही है। वहीं एक पोस्टमार्टम भी किया गया है। इसके अलावा सामान्य प्रसव व सिजेरियन भी किए गए हैं।
डॉ. रमेश चंद्र आर्य, सिविल सर्जन नारनौल।
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आमजन को पहले ही चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मियों के हड़ताल पर जाने से मरीजों का दर्द और बढ़ गया। शुक्रवार को नारनौल के नागरिक अस्पताल में फिजिशियन सहित एक दो ओपीडी को छोड़कर दूसरे दिन भी ज्यादातर ओपीडी बंद रही। इससे मरीजों को बिना उपचार के ही घर वापस जाना पड़ा। अस्पताल में ज्यादातर ओपीडी तो दिनभर बंद रही।
वहीं, कुछ ओपीडी में एनएचएम के तहत लगे चिकित्सक मरीजों को देखने में जुटे रहे। उस ओपीडी के बाहर मरीजों का घंटों इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आ रहा था। शुक्रवार को भी नेत्र रोग विशेषज्ञ, मनोरोग और ईएनटी की ओपीडी सुबह से बंद रही। वहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ हड़ताल पर जाने से उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। बता दे कि जिले भर में 80 से ज्यादा चिकित्सक हड़ताल पर चले गए हैं।
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एंबुलेंस कंट्रोल रूम में फोन की बजती रही घंटी :
चिकित्सकों के बाद अब एनएचएम कर्मियों ने भी हड़ताल शुरू कर दी है। इससे नागरिक अस्पताल में प्रसूति वार्ड, एंबुलेंस कंट्रोल रूम, नवजात शिशु नर्सरी, एनआरसी, वरिष्ठ नागरिक ओपीडी, डीईआईसी, आयुष विंग, सिविल सर्जन कार्यालय की एनएचएम शाखा का कार्य बाधित रहा। वहीं एंबुलेंस कंट्रोल रूप में जहां प्रतिदिन 50 से 55 काल आने पर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। वहीं शुक्रवार को हड़ताल पर कर्मी होने से एंबुलेंस कंट्रोल रूम में लगे फोन की घंटी बजती रही। वहीं शुक्रवार शाम तक मात्र 7 जगहों पर एंबुलेंस की सेवा उपलब्ध हो सकी।
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1000 से ऊपर रहने वाली ओपीडी 603 पर सिमटी
शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से 603 मरीजों को ही उपचार मिल सका। हालांकि अन्य दिनों में नागरिक अस्पताल की ओपीडी 1000 से ऊपर रहती है। शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में 1 पोस्टमार्टम, 22 मरीजों को भर्ती, 9 महिलाओं का प्रसव करवाया गया। इसके अलावा 3 महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया।
कुछ दिनों से आंखों में जलन हो रही थी। शुक्रवार काे वरिष्ठ नागरिक ओपीडी में चिकित्सक से दवाइयां भी लेनी थी। मगर चिकित्सकों की हड़ताल के कारण आंखों का उपचार भी नहीं हुआ। वरिष्ठ नागरिक ओपीडी से दवाइयां भी नहीं लिखवा पाई। मेरे गांव से नागरिक अस्पताल बहुत दूर हैं। इसलिए सुबह 9 बजे तक अस्पताल पहुंच गई थी ताकि समस्या का सामना नहीं करना पड़े। मगर हड़ताल होने के कारण मजबूरन बिना उपचार के घर वापस जाना पडे़गा।
रोशनी, मुलोदी।
जाखनी गांव में कुछ दिनों पहले हुई दुर्घटना में मेरी बहन के पैर में कुछ चोट आई थी। जिसका उपचार नागरिक अस्पताल नारनौल के हड्डी रोग विशेषज्ञ से चल रहा था। शुक्रवार को भी हम उपचार के लिए अस्पताल आए हुए थे। मगर हड़ताल होने के कारण चिकित्सक कम थे और मरीज ज्यादा जिस कारण उपचार के लिए करीब तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
नीरज, जाखनी।
चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से मरीजों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। इमरजेंसी सहित अन्य जरूरी सेवाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में 603 ओपीडी रही है। वहीं एक पोस्टमार्टम भी किया गया है। इसके अलावा सामान्य प्रसव व सिजेरियन भी किए गए हैं।
डॉ. रमेश चंद्र आर्य, सिविल सर्जन नारनौल।