{"_id":"ace7006c30bd9c792d6443bcf01a5f4b","slug":"panvhayat-election-supreme-court-disision-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘सुप्रीम’ चाबुक से बदली चुनावी फिजा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘सुप्रीम’ चाबुक से बदली चुनावी फिजा
Updated Tue, 22 Sep 2015 11:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में पंचायती चुनावों को लेकर एक बार फिर से लोग असमंजस में है कि अब रोक लगने के बाद चुनाव कब होंगे। चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर बैठे दावेदारों को भी निराशा हाथ लगी है। किसी ने चुनाव लड़ने के लिए बिजली के पूरे बिल भर दिए थे तो किसी ने बैंकों का कर्ज।
विज्ञापन
पहले चरण में तीनों ब्लाकों से 5000 लोगों ने नामांकन भी किया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सारी चुनावी फिजा ही बदल गई है। वहीं कई दावेदारों ने बैनर, पोस्टर और पैंफलेट पर लाखों रुपये फूंक दिए, अब चुनाव स्थगित होने से सब धरे रह गए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद जिले में गर्माया चुनावी माहौल ठंड़ा पड़ता दिख रहा है। वहीं अटेली गांव के लिए बनी सर्वसम्मति के समीकरण भी अब बदलने के आसार बन सकते हैं।
विज्ञापन
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले में एकदम से चुनाव प्रचार भी थम सा गया। पहले चरण के लिए जिला में अटेली, कनीना और सिहमा में मतदान होना था। इनके लिए 19 सितंबर तक लोगों ने नामांकन किया। कनीना खंड 55 पंचायतों, पंचायत समिति के 29 वार्डों, अटेली नांगल खंड में 43 पंचायतों, पंचायत समिति के 18 वार्डोें। वहीं सिहमा खंड के 30 पंचायतों, पंचायत समिति के 12 वार्डों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो गई थी। नामांकन करने वाले लोग अब छंटनी और सिंबल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, इनकी सारी तैयारी धरी रह गई। वहीं जिला परिषद के लिए भी पर्चे भरने वाले प्रत्याशी हताश हैं।
विज्ञापन
कोर्ट के फैसले से उदास हैं लोग
मंडी अटेली। पंचायत चुनावों पर 7 अक्तूबर तक रोक लगाने के आदेश को लेकर चुनावों में सक्रिय लोगों में अचानक मायूसी छा गई है। नए संशोधनों से जहां शिक्षित उम्मीदवार खुश थे वहीं अदालत के नए आदेशों से उन लोगों के चेहरे भी खिल उठे जो चुनावी योग्यता पूरी न करने के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाए थे।
चुनाव स्थगित होने से दावेदारों पर पड़ा आर्थिक बोझ
गांवों की चौपाल पर भी चर्चा का विषय बदल गया है। पहले जहां चुनाव में तिकड़म और हार-जीत को लेकर चर्चाएं होती थी अब वह स्थगन आदेश की ओर मुड़ गई हैं। चौपालों पर पंचायत चुनाव में हुई देरी और दोबारा चुनाव होने को लेकर कयास लगाने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।
24 जुलाई को चौथी पंचायती राज संस्था का कार्यकाल खत्म होने पर चार्ज ग्राम सचिवों को हैंडओवर कर दिया गया। डेढ़ महीने इंतजार के बाद चार सितंबर को चुनावी कार्यक्रम घोषित हुआ। विधानसभा में पारित नए अध्यादेश के मुताबिक नामांकन शुरू हुए। अध्यादेश के पारित होने से दावेदारों में खलबली मच गई और मापदंडों पर खरे नहीं उतरने पर अधिकांश बैकफुट पर हो गए। अब इस पर रोक लगने से फिर से लोगों की चर्चाओं का विषय बदल गया है।
दावेदारों को आर्थिक नुकसान भी
ग्रामीण हरिपाल, जयसिंह, उमेद कुमार, श्योताज, हवासिंह, कृष्ण कुमार, अमित सिंह व शिवचरण आदि ने बताया कि पंचायत स्तर पर संभावित सरपंच उम्मीदवारों ने खर्चा करना शुरू कर दिया। वोटरों को रिझाने के मकसद से देर रात तक मीटिंग होने लगी हैं। जिसमें रोजाना हजारों रुपयों का खर्चा हो रहा है। चुनाव स्थगित होने पर प्रत्याशियों का खर्चा कई गुणा बढ़ जाएगा, साथ उन्हें समीकरणों में उलट-फेर होने का डर रहेगा।
विकास कार्य प्रभावित
गांवों में विकास कार्य पंचायतों की मार्फत करवाए जा सकते हैं। चुनावों के दौरान चार्ज ग्राम सचिव के पास रहता है, जोकि जनहित से जुड़े कामकाज कर सकता है। गंभीर समस्याओं का समाधान जनप्रतिनिधियों द्वारा पारित प्रस्ताव से ही संभव है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द समाधान की गुहार लगाई है ताकि संवैधानिक संस्था का चुनाव हो सके।