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पाकिस्तान कभी भूल नहीं पाएगा कारगिल युद्ध का सबक : कारगिल योद्धा जयप्रकाश
Mon, 27 Mar 2023 11:16 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 27 Mar 2023 11:16 PM IST
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कारगिल योध्दा को सम्मानित करते ट्रस्ट के सदस्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। घुसपैठियों की संख्या और स्थिति की सही जानकारी न होने के कारण भारत को कारगिल युद्ध के शुरुआती दिनों में अधिक क्षति उठानी पड़ी लेकिन भारतीय सैनिकों की बहादुरी और सेना के रण-कौशल के कारण पाकिस्तान को अंत में मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान कभी भूल नहीं पाएगा कारगिल युद्ध का सबक। यह कहना है कारगिल युद्ध के योद्धा हवलदार जयप्रकाश का। यह बात उन्होंने मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय हुडा सेक्टर स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में आयोजित संक्षिप्त समारोह में कही।
उन्होंने कहा कि युद्ध के समय सभी सैनिकों के मन में सिर्फ एक ही भावना होती है और वह यह कि देश के लिए मर-मिटेंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। कारगिल युद्ध के अपने अनुभवों को साझा करते हुए जयप्रकाश ने बताया कि हमारी 18 ग्रेनेडियर्स अल्फा कंपनी को बताया गया था कि आतंकवादी घुसपैठ हुई है और हमें टाइगर हिल पर सामने से चढ़ना है। -4 डिग्री तापमान और बेहद खराब मौसम में ऊपर चढ़ने पर हमारी कंपनी का ऊंचाई पर पहले से ही मोर्चा संभाले बैठे पाकिस्तानी सेना के लगभग डेढ़ सौ हथियारबंद सैनिकों से सामना हुआ तब हमें घुसपैठ की गंभीरता का पता चला। संख्या बल में कम होते हुए भी चार दिनों तक हम भूखे-प्यासे बहादुरी से दुश्मनों से लोहा लेते रहे। अनेक पाकिस्तानी सैनिक मारे गये और बाकी भाग खड़े हुए। हमारी कंपनी के 35 जवानों में से केवल एक रवि करण शहीद हुए लेकिन तोलोलिंग पहाड़ी पर दूसरी ओर से हमसे पहले चढ़ने वाली कंपनी के अधिकतर सैनिक शहीद हो गए। इस कंपनी के सिकंदराबाद (उत्तर प्रदेश) निवासी 19 वर्षीय कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव को बाद में परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। हवलदार जयप्रकाश ने पुरानी स्मृतियों को याद करते हुए बताया की वह आज भी अपनी कंपनी द्वारा तोलोलिंग पहाड़ी पर तिरंगा ध्वज फहराने का फोटो देखते हैं तो उनका हृदय गर्व से भर जाता है। इस अवसर पर चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव और ट्रस्टी डॉ. कांता भारती ने अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंट कर हवलदार जयप्रकाश को सम्मानित किया। डॉ. मानव ने कहा कि देश की सुरक्षा और स्थिरता में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारतीय सेना इस भूमिका को बखूबी निभा रही है और इसीलिए प्रत्येक भारतवासी को अपनी सेना पर गर्व है। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. रामा तक्षक, कवि संजय पाठक, दलजीत शास्त्री, महेंद्र सिंह गौड़, कृष्ण कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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नारनौल। घुसपैठियों की संख्या और स्थिति की सही जानकारी न होने के कारण भारत को कारगिल युद्ध के शुरुआती दिनों में अधिक क्षति उठानी पड़ी लेकिन भारतीय सैनिकों की बहादुरी और सेना के रण-कौशल के कारण पाकिस्तान को अंत में मुंह की खानी पड़ी। पाकिस्तान कभी भूल नहीं पाएगा कारगिल युद्ध का सबक। यह कहना है कारगिल युद्ध के योद्धा हवलदार जयप्रकाश का। यह बात उन्होंने मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा स्थानीय हुडा सेक्टर स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में आयोजित संक्षिप्त समारोह में कही।
उन्होंने कहा कि युद्ध के समय सभी सैनिकों के मन में सिर्फ एक ही भावना होती है और वह यह कि देश के लिए मर-मिटेंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। कारगिल युद्ध के अपने अनुभवों को साझा करते हुए जयप्रकाश ने बताया कि हमारी 18 ग्रेनेडियर्स अल्फा कंपनी को बताया गया था कि आतंकवादी घुसपैठ हुई है और हमें टाइगर हिल पर सामने से चढ़ना है। -4 डिग्री तापमान और बेहद खराब मौसम में ऊपर चढ़ने पर हमारी कंपनी का ऊंचाई पर पहले से ही मोर्चा संभाले बैठे पाकिस्तानी सेना के लगभग डेढ़ सौ हथियारबंद सैनिकों से सामना हुआ तब हमें घुसपैठ की गंभीरता का पता चला। संख्या बल में कम होते हुए भी चार दिनों तक हम भूखे-प्यासे बहादुरी से दुश्मनों से लोहा लेते रहे। अनेक पाकिस्तानी सैनिक मारे गये और बाकी भाग खड़े हुए। हमारी कंपनी के 35 जवानों में से केवल एक रवि करण शहीद हुए लेकिन तोलोलिंग पहाड़ी पर दूसरी ओर से हमसे पहले चढ़ने वाली कंपनी के अधिकतर सैनिक शहीद हो गए। इस कंपनी के सिकंदराबाद (उत्तर प्रदेश) निवासी 19 वर्षीय कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव को बाद में परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। हवलदार जयप्रकाश ने पुरानी स्मृतियों को याद करते हुए बताया की वह आज भी अपनी कंपनी द्वारा तोलोलिंग पहाड़ी पर तिरंगा ध्वज फहराने का फोटो देखते हैं तो उनका हृदय गर्व से भर जाता है। इस अवसर पर चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव और ट्रस्टी डॉ. कांता भारती ने अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र भेंट कर हवलदार जयप्रकाश को सम्मानित किया। डॉ. मानव ने कहा कि देश की सुरक्षा और स्थिरता में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारतीय सेना इस भूमिका को बखूबी निभा रही है और इसीलिए प्रत्येक भारतवासी को अपनी सेना पर गर्व है। कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. रामा तक्षक, कवि संजय पाठक, दलजीत शास्त्री, महेंद्र सिंह गौड़, कृष्ण कुमार शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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