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Mahendragarh-Narnaul News: 50 वर्षों से काबिज दुकानदारों का किराया दोबारा शुरू करने के आदेश
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फोटो संख्या:69- नगर पालिका महेंद्रगढ़ में दुकानदारों की समस्या सुनते नगर पालिका प्रधान रमेश सैन
महेंद्रगढ़। नगर पालिका कार्यालय में वीरवार को प्रधान रमेश सैनी ने अधिकारियों की बैठक ली जहां बालाजी चौक से आईटीआई रोड पर स्थित नगर पालिका की दुकानों का किराया बंद होने का मुद्दा रखा गया। प्रधान ने अधिकारियों को दस दिनों के भीतर किराया वसूली प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
प्रधान ने बताया कि बालाजी चौक से आईटीआई रोड तक करीब 50 वर्ष पहले नगर पालिका की ओर से 50 से अधिक दुकानें बनाकर नियमानुसार आवंटित की गई थीं।
दुकानदार दशकों से समय पर किराया जमा कर रहे थे लेकिन पूर्व सचिव प्रशांत पराशर ने बिना किसी ठोस कारण, बिना नोटिस और बिना किसी कानूनी आधार के मौखिक आदेशों से किराया लेना बंद कर दिया था।
प्रधान ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सचिव के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इस संबंध में न तो प्रधान से विचार-विमर्श किया गया और न ही उच्च अधिकारियों से अनुमति ली गई।
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इस मनमाने फैसले से नगर पालिका को भारी वित्तीय हानि हुई है और दुकानदारों को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। इस मौके पर नगर पालिका सचिव गौरव सांगवान, एमई राजेश कौशिक, जेई नवदीप सिंह व दुकानदार उपस्थित रहे।
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मलकियत विवाद पर होगी कानूनी घेराबंदी
मामले में नया मोड़ तब आया जब यह संज्ञान में लाया गया कि पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग और आईटीआई संस्थान ने इन दुकानों पर अपनी मलकियत का दावा करते हुए न्यायालय में केस दायर कर दिया है। इस पर प्रधान ने कड़ा रुख अपनाते हुए सचिव को आदेश दिया कि तहसीलदार के माध्यम से तुरंत उक्त भूमि की दोबारा पैमाइश करवाई जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। नगर पालिका के अधिवक्ता से परामर्श लेकर अन्य विभागों की ओर से किए गए दावों का मजबूती से जवाब दिया जाए। उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत कराया जाए।
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प्रधान ने बताया कि बालाजी चौक से आईटीआई रोड तक करीब 50 वर्ष पहले नगर पालिका की ओर से 50 से अधिक दुकानें बनाकर नियमानुसार आवंटित की गई थीं।
दुकानदार दशकों से समय पर किराया जमा कर रहे थे लेकिन पूर्व सचिव प्रशांत पराशर ने बिना किसी ठोस कारण, बिना नोटिस और बिना किसी कानूनी आधार के मौखिक आदेशों से किराया लेना बंद कर दिया था।
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प्रधान ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सचिव के अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इस संबंध में न तो प्रधान से विचार-विमर्श किया गया और न ही उच्च अधिकारियों से अनुमति ली गई।
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इस मनमाने फैसले से नगर पालिका को भारी वित्तीय हानि हुई है और दुकानदारों को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। इस मौके पर नगर पालिका सचिव गौरव सांगवान, एमई राजेश कौशिक, जेई नवदीप सिंह व दुकानदार उपस्थित रहे।
मलकियत विवाद पर होगी कानूनी घेराबंदी
मामले में नया मोड़ तब आया जब यह संज्ञान में लाया गया कि पुलिस विभाग, लोक निर्माण विभाग और आईटीआई संस्थान ने इन दुकानों पर अपनी मलकियत का दावा करते हुए न्यायालय में केस दायर कर दिया है। इस पर प्रधान ने कड़ा रुख अपनाते हुए सचिव को आदेश दिया कि तहसीलदार के माध्यम से तुरंत उक्त भूमि की दोबारा पैमाइश करवाई जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। नगर पालिका के अधिवक्ता से परामर्श लेकर अन्य विभागों की ओर से किए गए दावों का मजबूती से जवाब दिया जाए। उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर इस पूरे मामले से अवगत कराया जाए।