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अधिकारी न गांवों की सरकार, कैसे हो समस्याओं का उपचार

Tue, 22 Feb 2022 11:50 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 11:50 PM IST
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Officials are not the government of the villages, how should the problems be solved
गांव मालड़ा में रोड पर भरा दूषित पानी। संवाद - फोटो : Narnol
प्रदेश में पंचायतें भंग हुए एक वर्ष पूरा हो गया है, लेकिन पंचायत का चुनाव नहीं होने से गांवों की हालत बद से बदतर हो गई है। रास्तों में फैले कीचड़ और कूड़ों के ढेर गांवों की सुंदरता बिगाड़ रहे हैं। गांवों की समस्याओं की ओर ध्यान देने के लिए न तो ग्रामीण सरकार है और न ही ग्राम सचिव। यहां तक कि खंड पंचायत विकास अधिकारी के पद भी खाली पड़े हैं। लगभग 340 पंचायतों वाले जिले में आठ खंडों में से तीन में पंचायत विकास अधिकारी के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा जिले में ग्राम सचिव के 113 में से 49 पद खाली पड़े हैं। एक खंड अधिकारी के पास दो-तीन खंड तथा एक ग्राम सचिव को चार-चार गांव हैं। गांवों के निवर्तमान सरपंचों की माने तो गांवों में सफाई से लेकर अन्य सुविधाएं बुरी स्थिति में हैं।
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गांवों में चारों ओर फैली गंदगी, नालियां भी जाम
पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद से गांवों में गंदगी बढ़ने लगी है। नालियां भी सफाई के अभाव में अवरुद्ध हो गई हैं। निवर्तमान सरपंच चाह कर भी कार्य नहीं करवा पा रहे हैं, क्योंकि अब सफाईकर्मी उनकी नहीं सुनते हैं। उनका सीधा सा जवाब होता है कि अधिकारी ने उनकी जहां ड्यूटी लगाई है वे वहीं कार्य करेंगे। ऐसे में गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नालियां की सफाई नहीं होने से उनका गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। कई गांवों में तो आज भी कच्चे रास्ते पड़े हैं, जिससे बारिश के दिनों में पानी भर जाता है। स्ट्रीट लाइटें भी खराब रहती हैं। गांवों में सरकारी जमीन पर भी अतिक्रमण हो रहा है।
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अभी चुनाव होना संभव नहीं
पंचायत चुनाव का मामला पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रहा है। जिस कारण अभी चुनाव होना संभव नहीं दिखाई दे रहा है। पंचायतों के भंग होने के बाद से ही सरकार ने गांवों में सफाई व अन्य विकास कार्यों का जिम्मा ब्लॉक पंचायत अधिकारियों को सौंप दिया है। मगर अधिकारी गांवों में सफाई करवाने में विफल साबित हो रहे हैं। पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व सफाई कर्मी नियमित रूप से गांवों में सफाई करते थे। लेकिन कार्यकाल खत्म होने के बाद जैसे ही गांवों का प्रशासक बीडीपीओ को बनाया गया है, तब से सफाई कर्मी भी अपनी मनमानी करने लगे हैं। ग्रामीणों की बार-बार मांग के बावजूद भी साफ-सफाई नहीं कर रहे हैं। कई महीनों से नारनौल, सीहमा और नांगल चौधरी में खंड पंचायत विकास अधिकारी के पद खाली पड़े हैं।
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खंड का नाम कुल पद रिक्त पद
महेंद्रगढ़ 22 09
कनीना 18 08
सतनाली 09 03
सीहमा 11 06
नारनौल 11 06
अटेली 16 07
निजामपुर 10 04
नांगल चौधरी 16 06
कुल 113 49
ग्रामीणों की परेशानी निवर्तमान सरपंचों की जुबानी।
कूड़े कचरे के लगे ढेर, सफाई व्यवस्था का बुरा हाल
गांवों में पंचायतें भंग होने से गांवों में विकास कार्य रुके पड़े हैं। गांवों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं और सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। ब्लॉक में एक ग्राम सचिव के पास तीन से चार गांवों का प्रभार है, जिससे ग्रामीणों की समस्याओं का सही तरीके से निदान नहीं हो पा रहा है। नांवा में करीब 80 एकड़ भूमि में सौर ऊर्जा से संचालित नलकूप लगवाकर फलदार पौधे आदि लगाने की योजना थी जो रुकी पड़ी है। पंचायत भंग होने से गांवों के विकास पर ग्रहण लगा हुआ है और ग्रामीण भारी परेशान हैं। -कृष्ण सिंह तंवर, निवर्तमान सरपंच, गांव नावां।
एक वर्ष में नहीं हुआ कोई काम:
पंचायत का कार्यकाल खत्म होने के बाद एक भी ईंट गांव में विकास कार्य पर नहीं लगी, जिसके चलते गांव का विकास मानों रुक गया हो। युवाओं की सबसे बड़ी मांग व्यायामशाला बनाने की थी, लेकिन पंचायत कार्यकाल खत्म होने के बाद व्यायामशाला का काम भी रुका हुआ है। व्यायामशाला की चहारदीवारी करने के बाद पंचायत का कार्यकाल खत्म हो गया था। उसके बाद गांव में कोई विकास कार्य नहीं हुआ। -राजेंद्र, सरपंच प्रतिनिधि, गांव पांचनोता
नहीं बनाया जा रहा लिंक रोड
सीहमा खंड के गांव सागरपुर में समस्याओं का अंबार बना हुआ है जिसके आमजन परेशान है। उनके गांव से भौड़ी, गुजरवास, सिलारपुर, अटाली, दुलोठ जाट और खामपुरा का लिंक रास्ता कच्चा पड़ा है जिसके चलते राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर है। इन रस्तों को बनाने की मांग अनेक बार जिला प्रशासन व स्थानीय विधायक सीताराम यादव अटेली से की जा चुकी है लेकिन समस्या जस की तस है। ग्रामीणों ने गांव से सभी लिंक रस्तों को पक्का बनाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। रोहताश, निवर्तमान सरपंच, सागरपुर।
कोर्ट का फैसला आने के बाद होगा चुनाव
कोर्ट का फैसला आने के बाद पंचायतों का चुनाव होगा। अधिकारियों की कमी है। इन पदों को जल्द ही भरा जाएगा। पूर्व चुने हुए प्रतिनिधियों का हमारे पास सुझाव आया था कि जब तक चुनाव नहीं होता तब तक जिम्मेदार लोगों की कमेटी बना दी जाए, अभी उस पर विचार किया जा रहा है। देवेंद्र बबली, ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री, हरियाणा सरकार।

हमारे पास बीडीपीओ के तीन तथा ग्राम सचिव के पद खाली हैं, लेकिन खंड विकास पंचायत अधिकारियों को दो-दो खंड दिए हैं। इसी प्रकार ग्राम सचिवों को भी अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। इससे ही हम काम चल रहे हैं। खाली पद सरकार द्वारा भरे जाने हैं। गांवों के विकास कार्यों के लिए बीडीपीओ को प्रशासक बनाया गया है। उनके पास जो भी समस्या आती है वो पूरी करते हैं। ओमप्रकाश, जिला ग्रामीव विकास एवं पंचायत अधिकारी, महेंद्रगढ़।

 व्यायामशाला की अधूरी पड़ी चहारदीवारी। संवाद

व्यायामशाला की अधूरी पड़ी चहारदीवारी। संवाद- फोटो : Narnol

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