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नसीबपुर शहीद स्मारक ना बनाना शहीदों का अपमान : कुलदीप सुरजनवास
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संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। नसीबपुर में शहीद स्मारक की मंजूरी के बावजूद अभी तक ना बनाना सरकार की नाकामी है और यह शहीदों का अपमान है। उक्त विचार इंकलाब युवा संगठन के अध्यक्ष कुलदीप सुरजनवास ने कहें। उन्होंने कहा कि 2016 में मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक बनाने के लिए अंबाला व नसीबपुर में एक साथ घोषणा की गई थी, जिसमें 1857 की क्रांति से लेकर आजाद भारत की सीमाओं से रक्षा के लिए जिसने भी शहादत दी है। उस शहीद की गौरव गाथा शहीद स्मारक में अंकित होगी जिससे हमारे क्षेत्र के युवाओं को अपने पूर्वजों के गौरव शाली इतिहास को जानकर पढ़कर अपने देश पर सर्वस्व लुटाने की प्रेरणा लेंगे। ये खुशी की बात है अंबाला में शहीद स्मारक लगभग बनकर तैयार हो गया। लेकिन नसीबपुर स्मारक के लिए अनेक बार आवाज उठाने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। कंसल्टेंसी एजेंसी के लिए टेंडर भी पास कर दिया था। लेकिन इसके बाद विधानसभा में मंत्री द्वारा इस संबंध में जो बयान दिया गया वह निराशाजनक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 1857 की क्रांति में यहां के वीर जवानों ने राव तुलाराम के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी थी और हजारों लोगों ने शहादत दी थी। अहीरवाल क्षेत्र का शायद ही कोई घर होगा जिसके सदस्य ने देश के लिए शहादत न दी हो। उन्होंने सरकार से नसीबपुर स्मारक को जल्द बनाने की मांग की है।
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महेंद्रगढ़। नसीबपुर में शहीद स्मारक की मंजूरी के बावजूद अभी तक ना बनाना सरकार की नाकामी है और यह शहीदों का अपमान है। उक्त विचार इंकलाब युवा संगठन के अध्यक्ष कुलदीप सुरजनवास ने कहें। उन्होंने कहा कि 2016 में मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक बनाने के लिए अंबाला व नसीबपुर में एक साथ घोषणा की गई थी, जिसमें 1857 की क्रांति से लेकर आजाद भारत की सीमाओं से रक्षा के लिए जिसने भी शहादत दी है। उस शहीद की गौरव गाथा शहीद स्मारक में अंकित होगी जिससे हमारे क्षेत्र के युवाओं को अपने पूर्वजों के गौरव शाली इतिहास को जानकर पढ़कर अपने देश पर सर्वस्व लुटाने की प्रेरणा लेंगे। ये खुशी की बात है अंबाला में शहीद स्मारक लगभग बनकर तैयार हो गया। लेकिन नसीबपुर स्मारक के लिए अनेक बार आवाज उठाने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। कंसल्टेंसी एजेंसी के लिए टेंडर भी पास कर दिया था। लेकिन इसके बाद विधानसभा में मंत्री द्वारा इस संबंध में जो बयान दिया गया वह निराशाजनक है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 1857 की क्रांति में यहां के वीर जवानों ने राव तुलाराम के नेतृत्व में लड़ाई लड़ी थी और हजारों लोगों ने शहादत दी थी। अहीरवाल क्षेत्र का शायद ही कोई घर होगा जिसके सदस्य ने देश के लिए शहादत न दी हो। उन्होंने सरकार से नसीबपुर स्मारक को जल्द बनाने की मांग की है।