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72 क्रशर स्टोन बंद करने के लिए एनजीटी ने दोबारा दिया आदेश

Sat, 05 Dec 2020 11:45 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2020 11:45 PM IST
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NGT re-orders to shut down 72 crusher stones
जिले के 72 स्टोन क्रशरों को एनजीटी ने फिर से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही क्षेत्र के गांवों में अधिक क्रशर लगे होने, डार्क जोन और स्वास्थ्य समेत अन्य पर रिपोर्ट आठ अप्रैल से पहले प्रशासन को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को देनी होगी। इससे पहले एनजीटी ने 24 जुलाई 2019 को क्रशर बंद करने का आदेश दिया था।
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बता दें कि जिले में अवैध रुप से चल रहे क्रशर के मामलों को सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर तेजपाल यादव ने पहले एनजीटी में याचिका डाली थी। इस पर एनजीटी ने 72 क्रशर को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी को सुनवाई करने को कहा था। इस पर तीन दिसंबर को एनजीटी ने फैसला दिया। एनजीटी के चीफ जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने 24 जुलाई 2019 के फैसले को यथावत रखते हुए 72 स्टोन क्रशरों को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्टोन क्रशरों की वहन क्षमता पर आदेश देते हुए कहा कि एक निश्चित क्षेत्र में अधिक स्टोन क्रशर खड़ा करना, उस क्षेत्र के वहन क्षमता के खिलाफ है। एनजीटी ने कहा हैं कि जिला प्रशासन दूरी मापदंड की अवहेलना कर रहे 72 स्टोन क्रशरों को बंद करने के साथ, वहन क्षमता और डार्क जोन सहित कई पहलुओं पर 8 अप्रैल 2021 से पहले रिपोर्ट सौंपे। इंजीनियर तेजपाल यादव ने अपने वकील राजकुमार के माध्यम से बार-बार इस बिंदु को उठाया कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत व राजनीतिक संरक्षण में खेतों में स्टोन क्रशरों को खड़ा किया गया है। ऐसे में क्षेत्र की जनता प्रदूषण से क्यों पिसे। इस पर एनजीटी ने महेंद्रगढ़ जिले के प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में लोगों की स्वास्थ्य जांच करने व इससे संबंधित पूरी रिपोर्ट सौंपने के प्रशासन व हरियाणा सरकार को आदेश दिए हैं। एनजीटी ने कहा कि महेंद्रगढ़ जिले के अंदर ईंट-भट्ठे की संख्या भी पर्यावरण की वहन क्षमता के हिसाब से ज्यादा है तो स्टोन क्रशरों को चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। किसी भी इंडस्ट्री का चलना उस क्षेत्र के लोगों के स्वच्छ वायु में सांस लेने व जीने के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। स्टोन क्रशर संचालकों के वकील बार-बार एनजीटी से 24 जुलाई 2019 के आदेश पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना की। लेकिन,एनजीटी ने 24 जुलाई 2019 के 72 स्टोन क्रशर को तुरंत बंद करने व उस आदेश के सभी पहलुओं को यथावत रखने के आदेश दिए। सामाजिक कार्यकर्ता तेजपाल यादव ने खुशी प्रकट करते हुए कहा कि महेंद्रगढ़ जिले के 72 स्टोन क्रशरों को बंद करने के साथ-साथ पूरे जिले के पर्यावरण प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य की जांच होना हरियाणा के पर्यावरण इतिहास में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम है। प्रदूषण की वजह से टीबी, दमा, अस्थमा, सिल्कॉसिस, चर्म रोग व सांस की बीमारियों से प्रभावित मिले तो सरकार से क्षतिपूर्ति की मांग की जाएगी।
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एनजीटी का 24 जुलाई 2019 का आदेश :
खातोली जाट निवासी तेजपाल यादव ने साल 2018 में एडवोकेट राजकुमार के माध्यम से एनजीटी कोर्ट में स्टोन क्रशरों और पर्यावरण प्रदूषण के विरोध मे एनजीटी में याचिका दायर की थी। इसमें तीन क्रशरों की एनओसी रद्द करने का आदेश दिया। जिले के सभी स्टोन क्रशरों की जांच करने के आदेश दिए गए थे। तीन बड़े अधिकारियों पर गाज भी गिरी थी। तेजपाल यादव ने कानूनी कार्रवाई के साथ जन-जागृति अभियान की शुरुआत की। नांगल चौधरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों में जनसभाएं करके पर्यावरण के बारे में लोगों को जागरूक किया। प्रदूषण प्रभावित 35 गांवों के हजारों लोगों को साथ लेकर स्टोन क्रशरों के खिलाफ प्रदर्शन किए। तत्कालीन उपायुक्त जगदीश शर्मा ने एनजीटी में खुद व्यक्तिगत रूप से पेश होकर रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट पर एनजीटी ने 24 जुलाई 2019 को 72 स्टोन क्रशरों को तुरंत बंद करने, संबंधित भ्रष्ट व सम्मलित अधिकारियों पर कार्रवाई करने, पर्यावरण की क्षतिपूर्ति हेतु क्रशर संचालकों को हर्जाना भरने व डार्क जोन सहित सभी पहलुओं पर जांच करने के आदेश दिए थे।
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क्यों पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक :
24 जुलाई 2019 के क्रशरों के खिलाफ आए एनजीटी के फैसले के बाद क्रशर संचालक सुप्रीम कोर्ट में चले गए। सुप्रीम कोर्ट में क्रशर संचालकों को कुछ समय की राहत मिल गई। तेजपाल यादव ने प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ंको इस केस की पैरवी के लिए आग्रह किया। नवंबर में इस केस को सुप्रीम कोर्ट से वापस एनजीटी में स्थानांतरित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में एनजीटी को एक तय समय सीमा मे सुनने के लिए कहा। एनजीटी ने 4 हफ्तों में दोनों पक्षों को सुनकर तीन दिसंबर फैसला दिया।
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