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Mahendragarh-Narnaul News: सात ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है नवाब मिर्जा अलीजान की बावड़ी
Wed, 20 Nov 2024 11:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 20 Nov 2024 11:04 PM IST
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नारनौल। शहर के ऐतिहासिक स्मारकों में एक नवाब मिर्जा अलीजान की बावड़ी भी है। इस बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए राज्य सरकार ने करीब 1.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। साल 2022 से लोक निर्माण विभाग अपनी देखरेख में बावड़ी के जीर्णोद्धार का कार्य करवा रहा है।
इस काम के लिए टेंडर भी अलॉट किया जा चुका है और साल 2025 में बावड़ी अपने पुराने स्वरूप में नजर आने लगेगी। बता दें कि नारनौल में काफी ऐतिहासिक स्मारक है, जो शहर की सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं। अब इन ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार भी विशेष ध्यान दे रही है।
राजा अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक बीरबल की नगरी नारनौल में सात से अधिक ऐतिहासिक स्मारक हैं। इनमें से मिर्जा अली जान की बावड़ी भी एक है। पानीपत के द्वितीय युद्ध के बाद नारनौल की बागडोर सम्राट अकबर के हाथों में आ गई थी। सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान यहां के नवाब मिर्जा अलीजान द्वारा 1556-1605 ईसवी में इस बावड़ी का निर्माण करवाया था।
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इस प्राचीन ऐतिहासिक इमारत के रखरखाव का जिम्मा डिपार्टमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम हरियाणा के पास है। इसी के तत्वावधान में राज्य सरकार ने अब इसके ऐतिहासिक महत्व को जिंदा रखने के लिए करीब 1.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पूर्व में भी इसका जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन कई दशकों तक ध्यान नहीं देने के चलते यह फिर से गिरने की कगार पर पहुंच गया था।
इंसेट
धूरस पत्थरों के आठ खंभों पर है स्थित
यह बावड़ी शहर के छोटा बड़ा तालाब के समीप है। शहर के उत्तर पश्चिम में बनी इस बावड़ी में एक धनुषाकार प्रवेश द्वार के रूप में इमारत के मुख्य ढांचे पर आयताकार छतरी के साथ एक तख्त भी स्थित है। इस छतरी में एक सजाया हुआ प्रालंब है, जो धूरस पत्थरों से बने आठ खंभों पर स्थित रहकर सभी दिशाओं में खुला हुआ है। नीचे सीढि़यों के साथ एक छज्जा भी है।
इंसेट
बावड़ी में मिर्जा व रानियां करती थीं स्नान
बावड़ी के मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वार पर तख्त स्थित है। दक्षिण में मुख्य धनुषाकार प्रवेशद्वार तीन मंजिला बावड़ी और एक कुएं के साथ जुड़ा हुआ है। इस कुएं के माध्यम से इस बावड़ी में पानी आता है। इस बावड़ी में मिर्जा अलीजान व उनकी रानियां स्नान करती थीं।
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इस काम के लिए टेंडर भी अलॉट किया जा चुका है और साल 2025 में बावड़ी अपने पुराने स्वरूप में नजर आने लगेगी। बता दें कि नारनौल में काफी ऐतिहासिक स्मारक है, जो शहर की सुंदरता को चार चांद लगा रहे हैं। अब इन ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार भी विशेष ध्यान दे रही है।
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राजा अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक बीरबल की नगरी नारनौल में सात से अधिक ऐतिहासिक स्मारक हैं। इनमें से मिर्जा अली जान की बावड़ी भी एक है। पानीपत के द्वितीय युद्ध के बाद नारनौल की बागडोर सम्राट अकबर के हाथों में आ गई थी। सम्राट अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान यहां के नवाब मिर्जा अलीजान द्वारा 1556-1605 ईसवी में इस बावड़ी का निर्माण करवाया था।
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इस प्राचीन ऐतिहासिक इमारत के रखरखाव का जिम्मा डिपार्टमेंट ऑफ आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम हरियाणा के पास है। इसी के तत्वावधान में राज्य सरकार ने अब इसके ऐतिहासिक महत्व को जिंदा रखने के लिए करीब 1.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। पूर्व में भी इसका जीर्णोद्धार किया गया था, लेकिन कई दशकों तक ध्यान नहीं देने के चलते यह फिर से गिरने की कगार पर पहुंच गया था।
इंसेट
धूरस पत्थरों के आठ खंभों पर है स्थित
यह बावड़ी शहर के छोटा बड़ा तालाब के समीप है। शहर के उत्तर पश्चिम में बनी इस बावड़ी में एक धनुषाकार प्रवेश द्वार के रूप में इमारत के मुख्य ढांचे पर आयताकार छतरी के साथ एक तख्त भी स्थित है। इस छतरी में एक सजाया हुआ प्रालंब है, जो धूरस पत्थरों से बने आठ खंभों पर स्थित रहकर सभी दिशाओं में खुला हुआ है। नीचे सीढि़यों के साथ एक छज्जा भी है।
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बावड़ी में मिर्जा व रानियां करती थीं स्नान
बावड़ी के मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वार पर तख्त स्थित है। दक्षिण में मुख्य धनुषाकार प्रवेशद्वार तीन मंजिला बावड़ी और एक कुएं के साथ जुड़ा हुआ है। इस कुएं के माध्यम से इस बावड़ी में पानी आता है। इस बावड़ी में मिर्जा अलीजान व उनकी रानियां स्नान करती थीं।