नए राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगी नई शिक्षा नीति: प्रो. आरसी कुहाड़

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sat, 08 Aug 2020 11:54 PM IST
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ष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथि वक्ता व प्रो. आरसी कुहाड़
ष्ट्रीय वेबिनार के उद्घाटन सत्र में उपस्थित अतिथि वक्ता व प्रो. आरसी कुहाड़ - फोटो : Narnol

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महेंद्रगढ़। स्टूडेंट्स फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमेनिटी (शोध), सेंटर फॉर एजुकेशनल एंड सोशल स्टडीज (सीईएसएस), बेंगलुरु के सांझा प्रयासों से हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंविवि) में दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का उद्घाटन शनिवार को किया गया। इसका विषय है नई शिक्षा नीति 2020 और उभरता भारत। इस अवसर पर राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नेक) के निदेशक प्रो. एससी. शर्मा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति निर्माण समिति के सदस्य प्रो. एमके श्रीधर, इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. के. भूषण दास ने बतौर मुख्य अतिथि नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।
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उद्घाटन सत्र के दौरान हकेंविवि के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नए राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। भारत को ज्ञान का केंद्र और आत्मनिर्भर बनाने में यह शिक्षा नीति महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली है। शिक्षा नीति का दस्तावेज हम सभी सहभागियों के समक्ष उपलब्ध है। अब जरूरत है इसमें वर्णित लक्ष्य को पाने के लिए रोड मैप तैयार करना, जिसके माध्यम से भारत को वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया जा सके। शिक्षा मंत्रालय की ओर से 7 अगस्त को आयोजित कॉन्क्लेव में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई आपसी सहभागिता की अपील पर अमल करते हुए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति के सफलतम क्रियान्वयन हेतु मंथन शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल के निर्देशन में तैयार हुई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्षित उद्देश्यों को प्राप्त करने में भारत कामयाब होगा। प्रो. एससी शर्मा ने अपने संबोधन में शिक्षा नीति के संदर्भ में ब्रिटिश इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह से भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अंग्रेजी शासन में प्रभावित किया गया। आजाद भारत में किस तरह से शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के लिए कार्य हुआ।
युवाओं का भविष्य निर्माण के बेहतर अवसर मिलेंगे
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 निर्माण समिति के सदस्य प्रो. एम.के. श्रीधर ने इस शिक्षा नीति के मूल उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके निर्माण में हमारे समक्ष युवा शक्ति के बेहतर भविष्य का लक्ष्य था। इस नीति को इस तरह से तैयार किया गया है कि भारतीय युवा पीढ़ी को अपनी इच्छाओं, आकांक्षाओं की पूर्ति के भरपूर अवसर मिलेंगे। शिक्षा नीति के केंद्र में विद्यार्थियों और उनके सतत विकास को रखा गया है। उन्होंने बताया कि अब इस नीति के क्रियान्वयन की योजना का समय है। सभी शिक्षण संस्थानों से इसके लिए टास्क फोर्स के गठित करें। कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ ने टास्क फोर्स के गठन पर सहमति व्यक्त की।
भारत को ज्ञान के क्षेत्र में सबल बनाना होगा
मुख्य वक्ता इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. के. भूषण दास ने कहा कि यदि भारत को आत्मनिर्भर होना है, वैश्विक शक्ति के रूप में खुद को साबित करना है तो ज्ञान के क्षेत्र में सबल बनाना होगा। इसके बिना विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति की सफलता तभी संभव है जबकि उसके निर्माण और क्रियान्वयन में गंभीरता हो और उसके माध्यम से निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. आलोक पांडे ने संगठन के उद्देश्यों पर चर्चा की। शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. संजीव कुमार ने वेबिनार के विषय पर प्रकाश डाला। उद्घाटन सत्र में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. दिनेश कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सत्र का संचालन आयोजन सचिव पूजा राव ने किया।
दूसरे सत्र को इन्होंने किया संबोधित
वेबिनार के पहले दिन दूसरे सत्र में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. जी. गोपाल रेड्डी, आईयूसीटीई के निदेशक प्रो. बी.के. त्रिपाठी ने भारत को एकजुट करने में नई शिक्षा नीति की भूमिका पर विचार रखे। वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय की ज्वाइंट डीन, कॉलेज, एकेडमिक अफेयर्स एंड प्रोजेक्ट्स प्रो. पायल मग्गो ने बहुविषय समग्र शिक्षा और विश्वविद्यालय विषय पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. एस.के. शर्मा ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा विषय पर, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रो. सारिका शर्मा ने नई शिक्षा नीति और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य विषय पर, दिल्ली विश्वविद्यालय डॉ. मनु कटारिया ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भविष्य दृष्टिकोण विषय पर अपना मत प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
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