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Mahendragarh-Narnaul News: श्रीकृष्ण जन्म की कथा का किया वर्णन
Sun, 17 Mar 2024 01:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 17 Mar 2024 01:26 AM IST
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फोटो संख्या:64- श्रीमद्देवी भागवत कथा में कथा सुनाते कथावाचक पंडित हेमराज भारद्वाज--स्रोत संवाद
महेंद्रगढ़। मंदिर कमेटी व शहरवासियों के सहयोग से माता मसानी मंदिर में नौ दिवसीय श्रीमद्देवी भागवत कथा के तीसरे दिन भृगु द्वारा नारायण को श्राप व श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई गई।
कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि माता देवकी की आठवीं संतान रूप में स्वयं भगवान विष्णु कृष्ण अवतार के रूप में पृथ्वी पर जन्मे थे। उसी समय माता यशोदा ने एक पुत्री को जन्म दिया।
कथा वाचक ने कहा कि महर्षि भृगु, ब्रह्मदेव भगवान के पुत्र थे। शुक्राचार्य ख्याति और भृगु जी के पुत्र थे जो कि स्वयं दैत्य गुरु थे और हरिण्यकश्यप दैत्यराज को अति प्रिय थे। तब भगवान विष्णु ने देवताओं कि प्रार्थना को ध्यान रखकर ख्याति जो कि भृगु कि पत्नी थी का वध कर दिया, शीश काट दिया। इससे भृगु ऋषि बहुत दुखी हो गए और शुक्राचार्य भी बहुत क्रोधित हुए। क्योंकि उनकी माता का वध विष्णु ने कपट से किया था। भृगु ऋषि ने क्रोधित होकर विष्णु को भी श्राप दिया कि जिस तरह में अपनी पत्नी के वियोग में पीड़ित हूं ऐसे ही आपको आगे त्रेता युग में अपनी पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा। श्रीहरि त्रेता युग में श्रीराम बने और लक्ष्मी सीता बनी तथा दोनों का वियोग हुआ। उन्होंने बताया कि यह कथा 21 मार्च तक चलेगी।
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कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि माता देवकी की आठवीं संतान रूप में स्वयं भगवान विष्णु कृष्ण अवतार के रूप में पृथ्वी पर जन्मे थे। उसी समय माता यशोदा ने एक पुत्री को जन्म दिया।
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कथा वाचक ने कहा कि महर्षि भृगु, ब्रह्मदेव भगवान के पुत्र थे। शुक्राचार्य ख्याति और भृगु जी के पुत्र थे जो कि स्वयं दैत्य गुरु थे और हरिण्यकश्यप दैत्यराज को अति प्रिय थे। तब भगवान विष्णु ने देवताओं कि प्रार्थना को ध्यान रखकर ख्याति जो कि भृगु कि पत्नी थी का वध कर दिया, शीश काट दिया। इससे भृगु ऋषि बहुत दुखी हो गए और शुक्राचार्य भी बहुत क्रोधित हुए। क्योंकि उनकी माता का वध विष्णु ने कपट से किया था। भृगु ऋषि ने क्रोधित होकर विष्णु को भी श्राप दिया कि जिस तरह में अपनी पत्नी के वियोग में पीड़ित हूं ऐसे ही आपको आगे त्रेता युग में अपनी पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा। श्रीहरि त्रेता युग में श्रीराम बने और लक्ष्मी सीता बनी तथा दोनों का वियोग हुआ। उन्होंने बताया कि यह कथा 21 मार्च तक चलेगी।
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फोटो संख्या:64- श्रीमद्देवी भागवत कथा में कथा सुनाते कथावाचक पंडित हेमराज भारद्वाज--स्रोत संवाद