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थाली से गायब हुई सब्जी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 Dec 2016 10:35 PM IST
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नोटबंदी का असर सब्जियों की बिक्री पर भी पड़ा है। हालांकि मौसम परिवर्तन के कारण सब्जियों के दामों में गिरावट आई है, लेकिन बाजार में खुले की समस्या को लेकर हरी सब्जी की मांग में 25 फीसदी कम हो गई है, जबकि आलू और प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत गिरावट आई है। उसके बाद भी आमजन की थाली से सब्जी गायब हो गई है। इससे न केवल खुदरा विक्रेता परेशान है बल्कि थोक व्यापारियों पर भी विपरीत असर पड़ा है। विक्रेताओं का कहना है कि सब्जी की खरीद फरोख्त तो हो रही है लेकिन उपभोक्ता कम मात्रा में ही सब्जी ले जा रहे हैं। पहले सब्जी महंगी होने पर भी उपभोक्ता 10 किलो सब्जी ले जाते थे लेकिन अब मात्र 5 किलो ही लेकर जा रहे हैं जबकि सब्जी पहले 25 फीसदी सस्ती हुई है।
महेंद्रगढ़ की सब्जी मंडी में सब्जी विक्रेता बिक्री घटने से खासे परेशान है। अब वे अधिक सब्जी लेने की बजाय कम ही खरीद रहे हें, ताकि शाम तक उसे बेच दे और इसमें कुछ बचे ना। हालांकि मौसम में बदलाव की वजह से लोकल एरिया से ही मौसमी सब्जियां की सप्लाई शुरू हो गई है। ऐसे में बजार में मौसमी सब्जियों के रेट में गिरावट भी आई। महीना भर पहले 120 रुपये किलो बिकने वाली मटर अब 20 रुपये किलो हो गई हैं। फूलगोभी के दाम 40 रुपये से गिरकर 10 रुपये आ गए हैं। आलू 15 रुपये किलो बिकते थे अब 8रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
सब्जी पहले ( रुपये प्रति किलो ) अब ( रुपये प्रति किलो )
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टमाटर 20 20
गाजर 20 10
गोभी 15 10
आलू 15 08
मटर 120 20
प्याज 20 12
बैंगन 15 08
शिमला मिर्च 30 20
नोटबंदी के एक सप्ताह तक मंडी में जबरदस्त आर्थिक मंदी थी। अभी मंडी में 80 फीसदी सुधार है। खुले की दिक्कत अभी भी बनी हुई है। मौसमी सब्जी मंडी में आने से सब्जियां सस्ती हुई हैं। प्रधानमंत्री का देश हित में यह एक ऐतिहासिक फैसला था। कोई भी नया काम होता है तो दिक्कतें तो आती हैं लेकिन कुछ दिनों पर वो ठीक हो जाती हैं। -रामनिवास सैनी, सब्जी विक्रेता
नोटबंदी के बाद से सब्जी की बिक्री में काफी गिरावट आई है। पहले लोग 10 किलो सब्जी ले जाते थे किंतु अब कैश के अभाव में 5 किलो ही लेकर जा रहे हैं। जबकि इस समय सब्जी भी सस्ती हो गई है। सब्जी की बिक्री कम होने से बचत बिल्कुल नहीं आ रही। -बंसीलाल, सब्जी विक्रेता
आलू और प्याज की कीमतों में नोटबंदी के बाद 50 फीसदी गिरावट आई है। पहले आलू 15 रुपये किलो बिकते थे अब 8 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। नोटबंदी से उनकी दुकानदार पर 25 फीसदी असर पड़ा है। लोग कैश के अभाव में पहले से कम सब्जी खरीद रहे हैं। प्रधानमंत्री ने नोटबंदी कर अपनी पारी का मास्टर स्ट्रोक खेला है। उनके इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। -सुनील सैनी, आलू एवं प्याज विक्रेता
नोटबंदी के बाद सब्जी की बिक्री पर 30 से 35 फिसदी असर पड़ा है। ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं जो आ रहे हैं वो सब्जी कम लेकर जा रहे हैं। कम से कम सब्जी लेने के बाद भी शाम के समय सब्जी बच जाती है। बची हुई सब्जी अगले दिन तक खराब हो जाती है फिर लावारिस पशुओं को डालनी पड़ती है। इस समय उनकी मजदूरी भी मुश्किल से निकल रही है। -मुकेश।
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महेंद्रगढ़ की सब्जी मंडी में सब्जी विक्रेता बिक्री घटने से खासे परेशान है। अब वे अधिक सब्जी लेने की बजाय कम ही खरीद रहे हें, ताकि शाम तक उसे बेच दे और इसमें कुछ बचे ना। हालांकि मौसम में बदलाव की वजह से लोकल एरिया से ही मौसमी सब्जियां की सप्लाई शुरू हो गई है। ऐसे में बजार में मौसमी सब्जियों के रेट में गिरावट भी आई। महीना भर पहले 120 रुपये किलो बिकने वाली मटर अब 20 रुपये किलो हो गई हैं। फूलगोभी के दाम 40 रुपये से गिरकर 10 रुपये आ गए हैं। आलू 15 रुपये किलो बिकते थे अब 8रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
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सब्जी पहले ( रुपये प्रति किलो ) अब ( रुपये प्रति किलो )
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टमाटर 20 20
गाजर 20 10
गोभी 15 10
आलू 15 08
मटर 120 20
प्याज 20 12
बैंगन 15 08
शिमला मिर्च 30 20
नोटबंदी के एक सप्ताह तक मंडी में जबरदस्त आर्थिक मंदी थी। अभी मंडी में 80 फीसदी सुधार है। खुले की दिक्कत अभी भी बनी हुई है। मौसमी सब्जी मंडी में आने से सब्जियां सस्ती हुई हैं। प्रधानमंत्री का देश हित में यह एक ऐतिहासिक फैसला था। कोई भी नया काम होता है तो दिक्कतें तो आती हैं लेकिन कुछ दिनों पर वो ठीक हो जाती हैं। -रामनिवास सैनी, सब्जी विक्रेता
नोटबंदी के बाद से सब्जी की बिक्री में काफी गिरावट आई है। पहले लोग 10 किलो सब्जी ले जाते थे किंतु अब कैश के अभाव में 5 किलो ही लेकर जा रहे हैं। जबकि इस समय सब्जी भी सस्ती हो गई है। सब्जी की बिक्री कम होने से बचत बिल्कुल नहीं आ रही। -बंसीलाल, सब्जी विक्रेता
आलू और प्याज की कीमतों में नोटबंदी के बाद 50 फीसदी गिरावट आई है। पहले आलू 15 रुपये किलो बिकते थे अब 8 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं। नोटबंदी से उनकी दुकानदार पर 25 फीसदी असर पड़ा है। लोग कैश के अभाव में पहले से कम सब्जी खरीद रहे हैं। प्रधानमंत्री ने नोटबंदी कर अपनी पारी का मास्टर स्ट्रोक खेला है। उनके इस फैसले का हम स्वागत करते हैं। -सुनील सैनी, आलू एवं प्याज विक्रेता
नोटबंदी के बाद सब्जी की बिक्री पर 30 से 35 फिसदी असर पड़ा है। ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं जो आ रहे हैं वो सब्जी कम लेकर जा रहे हैं। कम से कम सब्जी लेने के बाद भी शाम के समय सब्जी बच जाती है। बची हुई सब्जी अगले दिन तक खराब हो जाती है फिर लावारिस पशुओं को डालनी पड़ती है। इस समय उनकी मजदूरी भी मुश्किल से निकल रही है। -मुकेश।