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Mahendragarh-Narnaul News: नारनौल की नागपुरिया बावड़ी संरक्षित स्मारक घोषित
Sat, 09 Aug 2025 12:37 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 09 Aug 2025 12:37 AM IST
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फोटो नंबर-12नागपुरियों की बावड़ी दिखाते स्थानीय लोग। स्त्रोत-स्वयं
- फोटो : हाईवे पर पेड़ गिरने के बाद लगा जाम।
नारनौल। हरियाणा सरकार ने जिला महेंद्रगढ़ के नारनौल शहर में स्थित 18वीं शताब्दी की नागपुरिया बावड़ी को हरियाणा प्राचीन तथा ऐतिहासिक संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष अधिनियम 1964 के तहत एक संरक्षित स्मारक के रूप में अंतिम रूप से अधिसूचित किया है।
यह कदम क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। विरासत और पर्यटन विभाग द्वारा 15 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना संख्या 12/250-2024/पुरा/3117-25 के माध्यम से यह घोषणा की गई है।
उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने बताया कि नागपुरिया बावड़ी 18वीं शताब्दी में नारनौल के स्थानीय व्यापारियों द्वारा बनाई गई थी, जो बाद में नागपुर चले गए थे। यह बावड़ी प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपनी सीढ़ीदार बनावट के लिए जानी जाती है। आगंतुकों को पानी के स्रोत तक ले जाती है।
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इसकी तीन मंजिला इमारत जटिल नक्काशी से सुसज्जित है, जो उस युग के कलात्मक कौशल और स्थापत्य परिष्कार को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक संरचना सुंदर बड़ा-छोटा तालाब, एक धर्मशाला और ठाकुरजी को समर्पित एक मंदिर के पास स्थित है।
इस अधिसूचना के माध्यम से बावड़ी को अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा की राज्य सुरक्षा के तहत लाया गया है। यह संरक्षण सुनिश्चित करेगा कि बावड़ी की ऐतिहासिक और स्थापत्य अखंडता बनी रहे और इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके। यह नारनौल के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने का भी काम करेगा।
इंसेट
अंतिम अधिसूचना की प्रतियां विभागों में भेजी
अंतिम अधिसूचना की प्रतियां आवश्यक कार्रवाई के लिए विभिन्न सरकारी विभागों को भेजी गई हैं, जिनमें उपायुक्त, जिला राजस्व अधिकारी, उपमंडल अधिकारी नागरिक, तहसीलदार नारनौल और नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अधिसूचना की प्रतियां अशोक कुमार परिचर, छत्ता राय बाल मुकुंद दास, नारनौल को वितरित और स्मारक पर चिपकाने के निर्देश के साथ भेजी गई हैं, ताकि इसकी अनुपालन रिपोर्ट विभाग को सौंपी जा सके।
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यह कदम क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। विरासत और पर्यटन विभाग द्वारा 15 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना संख्या 12/250-2024/पुरा/3117-25 के माध्यम से यह घोषणा की गई है।
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उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने बताया कि नागपुरिया बावड़ी 18वीं शताब्दी में नारनौल के स्थानीय व्यापारियों द्वारा बनाई गई थी, जो बाद में नागपुर चले गए थे। यह बावड़ी प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपनी सीढ़ीदार बनावट के लिए जानी जाती है। आगंतुकों को पानी के स्रोत तक ले जाती है।
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इसकी तीन मंजिला इमारत जटिल नक्काशी से सुसज्जित है, जो उस युग के कलात्मक कौशल और स्थापत्य परिष्कार को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक संरचना सुंदर बड़ा-छोटा तालाब, एक धर्मशाला और ठाकुरजी को समर्पित एक मंदिर के पास स्थित है।
इस अधिसूचना के माध्यम से बावड़ी को अब पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा की राज्य सुरक्षा के तहत लाया गया है। यह संरक्षण सुनिश्चित करेगा कि बावड़ी की ऐतिहासिक और स्थापत्य अखंडता बनी रहे और इसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके। यह नारनौल के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने का भी काम करेगा।
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अंतिम अधिसूचना की प्रतियां विभागों में भेजी
अंतिम अधिसूचना की प्रतियां आवश्यक कार्रवाई के लिए विभिन्न सरकारी विभागों को भेजी गई हैं, जिनमें उपायुक्त, जिला राजस्व अधिकारी, उपमंडल अधिकारी नागरिक, तहसीलदार नारनौल और नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अधिसूचना की प्रतियां अशोक कुमार परिचर, छत्ता राय बाल मुकुंद दास, नारनौल को वितरित और स्मारक पर चिपकाने के निर्देश के साथ भेजी गई हैं, ताकि इसकी अनुपालन रिपोर्ट विभाग को सौंपी जा सके।