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Mahendragarh-Narnaul News: मुकुंदपुरा बावड़ी को 5.77 करोड़ से मिलेगा 17वीं सदी जैसा वैभव
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फोटो नंबर 20 नारनौल का चोर गुंबद। संवाद
नारनौल। पर्यटन को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने के उद्देश्य से स्मारकों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य संरक्षित स्मारक मुकुंदपुरा बावड़ी को 17वीं सदी जैसा वैभव लौटाने के लिए 5.77 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की गई है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने टेंडर जारी कर दिया है।
ऐतिहासिक विरासत को संवारने के लिए राज्य संरक्षित स्मारक मिर्जा अली जान की बावड़ी, फोर्ट इस्लामपुर, छत्ता राय बालमुकुंद दास, चोर गुंबद, शोभा सरोवर, त्रिपोलिया गेटवे, पीर तुर्कमान, बावड़ी पॉलीटेक्निक और राज्य संरक्षित स्मारक मुकुंदपुरा बावड़ी पर करीब 47 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं जिनमें कुछ का जीर्णोद्धार कार्य हो चुका है। वहीं कुछ ऐतिहासिक स्मारकों का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, 5 करोड़ 77 लाख रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना से मुकुंदपुरा बावड़ी को नया जीवन मिलेगा। यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी बल्कि नारनौल को पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने में भी सहायक होगी।
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बता दें कि इसको लेकर प्रदेश के विरासत और पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने 18 सितंबर 2025 को नारनौल के चोर गुंबद व नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 95.17 करोड़ रुपये से राज्य के 20 स्मारकों के जीर्णोद्धार का शुभारंभ किया था। इनमें 9 स्मारक जिला महेंद्रगढ़ के शामिल थे।
नारनौल के अलावा कैथल के भाई की बावड़ी, जींद के किला जफरगढ़ और सफीदों किला पर, भिवानी के तोशाम किला, गुरुग्राम के सोहना में लाल गुंबद, बादशाहपुर बावड़ी, फरीदाबाद के रानी की छतरी, नूंह के डेहरा मंदिर व तावड़ू के गुंबद परिसर, फरुखनगर के शीशमहल, पलवल के मानपुर स्थित ऐतिहासिक केसुरिया खेड़ा का जीर्णोद्धार लाखों रुपये की लागत से करवाया जा रहा है।
शाहजहां के शासनकाल में बनी थी बावड़ी
मुकुंदपुरा बावड़ी एक ऐतिहासिक और छोटी जल संरचना है जिसे 17वीं शताब्दी में शाहजहां के शासनकाल के दौरान बाल मुकुंद दास ने बनवाई थी। यह दो मंजिला मेहराबदार दीर्घाओं के साथ एक साधारण लेकिन सुंदर वास्तुकला है जो अब उपेक्षित अवस्था में है।
मुकुंदपुरा बावड़ी जल संरक्षण के लिए अनूठा उदाहरण
मुकुंदपुरा बावड़ी क्षेत्र की पुरानी जल संरक्षण प्रणाली का एक अनूठा उदाहरण है जिसे अब संरक्षण की आवश्यकता थी। मुकुंदपुरा बावड़ी को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है। इसका अब दो फेज में जीर्णोद्धार किया जाएगा।
वर्जन:
मुकुंदपुरा बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए 5.77 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है जिसका जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।-अश्वनी कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी, नारनौल
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ऐतिहासिक विरासत को संवारने के लिए राज्य संरक्षित स्मारक मिर्जा अली जान की बावड़ी, फोर्ट इस्लामपुर, छत्ता राय बालमुकुंद दास, चोर गुंबद, शोभा सरोवर, त्रिपोलिया गेटवे, पीर तुर्कमान, बावड़ी पॉलीटेक्निक और राज्य संरक्षित स्मारक मुकुंदपुरा बावड़ी पर करीब 47 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं जिनमें कुछ का जीर्णोद्धार कार्य हो चुका है। वहीं कुछ ऐतिहासिक स्मारकों का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है।
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कुल मिलाकर, 5 करोड़ 77 लाख रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना से मुकुंदपुरा बावड़ी को नया जीवन मिलेगा। यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी बल्कि नारनौल को पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने में भी सहायक होगी।
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बता दें कि इसको लेकर प्रदेश के विरासत और पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने 18 सितंबर 2025 को नारनौल के चोर गुंबद व नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 95.17 करोड़ रुपये से राज्य के 20 स्मारकों के जीर्णोद्धार का शुभारंभ किया था। इनमें 9 स्मारक जिला महेंद्रगढ़ के शामिल थे।
नारनौल के अलावा कैथल के भाई की बावड़ी, जींद के किला जफरगढ़ और सफीदों किला पर, भिवानी के तोशाम किला, गुरुग्राम के सोहना में लाल गुंबद, बादशाहपुर बावड़ी, फरीदाबाद के रानी की छतरी, नूंह के डेहरा मंदिर व तावड़ू के गुंबद परिसर, फरुखनगर के शीशमहल, पलवल के मानपुर स्थित ऐतिहासिक केसुरिया खेड़ा का जीर्णोद्धार लाखों रुपये की लागत से करवाया जा रहा है।
शाहजहां के शासनकाल में बनी थी बावड़ी
मुकुंदपुरा बावड़ी एक ऐतिहासिक और छोटी जल संरचना है जिसे 17वीं शताब्दी में शाहजहां के शासनकाल के दौरान बाल मुकुंद दास ने बनवाई थी। यह दो मंजिला मेहराबदार दीर्घाओं के साथ एक साधारण लेकिन सुंदर वास्तुकला है जो अब उपेक्षित अवस्था में है।
मुकुंदपुरा बावड़ी जल संरक्षण के लिए अनूठा उदाहरण
मुकुंदपुरा बावड़ी क्षेत्र की पुरानी जल संरक्षण प्रणाली का एक अनूठा उदाहरण है जिसे अब संरक्षण की आवश्यकता थी। मुकुंदपुरा बावड़ी को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है। इसका अब दो फेज में जीर्णोद्धार किया जाएगा।
वर्जन:
मुकुंदपुरा बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए 5.77 करोड़ का टेंडर जारी किया गया है जिसका जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।-अश्वनी कुमार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी, नारनौल