{"_id":"585d6e874f1c1b3d77e39607","slug":"money-crises-bank-curency-patint-hospital","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी : 45 दिन बाद भी बैंकों में कैश की मारामारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नोटबंदी : 45 दिन बाद भी बैंकों में कैश की मारामारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:06 AM IST
विज्ञापन
कैश की मारामारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के 45 दिन बीतने के बाद भी उपभोक्ताओं को कैश से राहत नहीं मिली है। लोगों को अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि मरीजों के लिए भी बैंकों में पैसे नहीं हैं। कैशलेस सिस्टम ने मरीजों को भी बैंक और एटीएम आने के लिए मजबूर कर दिया है। मरीजों को भी बैंक से केवल 4000 हजार रुपये मिल रहे हैं।
नोटबंदी को 45 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक बैंकों में कैश की समस्या दूर नहीं है। चेस्ट ब्रांच पटियाला बैंक में एक सप्ताह पहले दो करोड़ रुपये आए थे उसके बाद चेस्ट ब्रांच में कैश नहीं आया। चेस्ट ब्रांच में एक सप्ताह से बैंक में कैश नहीं आ रहा जबकि चेस्ट ब्रांच से नगर के 15 बैंक जुड़े हैं जो यहीं से कैश लेकर उपभोक्ताओं को वितरित करते हैं। कैैश के अभाव में बैंक उपभोक्ताओं द्वारा जमा राशि से ही काम चला रहे हैं। शुक्रवार को घंटों लाइन में लगने के बाद 4-4 हजार रुपये प्रति उपभोक्ता बांटे गए। ओबीसी में तो लंच से पहले ही कैश खत्म हो गया था। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक में छह हजार रुपये प्रति उपभोक्ता दिया जा रहा था।
लकवा ग्रस्त मरीज बैंक पहुंचा
ऐसा ही एक केस शुक्रवार को एक बैंक में सामने आया। उसको मात्र चार हजार रुपये ही बैंक से दिए गए। गांव कुराहवटा का हरिराम 76 वर्ष का है। हरिराम आर्मी से हवलदार पद से रिटायर्ड हैं। डेढ़ महीने पहले हरिराम को लकवा मार गया था। इसके बाद से वह एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। उसके पौते सतपाल ने बताया कि उसके दादा हरिराम का खाता पीएनबी में है। उसे ऑटो में लेकर आना पड़ता है। एक बार लाने पर ऑटो 400 रुपये लेता है। वह बैंक में आठ बार आ चुके हैं। हर बार चार हजार रुपये की राशि मिली है जबकि शुक्रवार को छह हजार रुपये मिले हैं। इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण दादा को स्वयं बैंक आना पड़ता है जबकि उनके मुंह और पेशाब की जगह नलकी लगी हुई है। उनसे चला फिरा भी नहीं जाता है। नलकी से खिलाया जाता है। पैसों के अभाव में इलाज करवाने में काफी परेशानी आ रही है।
विज्ञापन
दो दिन रहेगी बैंकों की छुट्टी
अब उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी। 24 दिसंबर को चौथा शनिवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी जबकि 25 दिसंबर क्रिसमस और रविवार है इसलिए छुट्टी रहेगी। दो दिन उपभोक्ताओं को डेबिट कार्ड और पे-टीएम का सहारा ही लेना पड़ेगा। शहर के एटीएम से कैश की उम्मीद लगाना बेकार ही होगा। अभी तक छुट्टी के दिन शहर के किसी भी एटीएम में कैश नहीं डाला गया है। उपभोक्ताओं को निराश ही लौटना पड़ा है।
वर्जन:
बैंक में पिछले एक सप्ताह से कैश नहीं आ रहा। कैश की बड़ी दिक्कत आ रही है। अभी बैंकों में जमा रुपयों से ही काम चलाया जा रहा है। लोगों को चार हजार रुपये प्रति उपभोक्ता दिए जा रहे हैं। - पंकज भाटिया, मैनेजर पटियाला बैंक।
विज्ञापन
नोटबंदी को 45 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक बैंकों में कैश की समस्या दूर नहीं है। चेस्ट ब्रांच पटियाला बैंक में एक सप्ताह पहले दो करोड़ रुपये आए थे उसके बाद चेस्ट ब्रांच में कैश नहीं आया। चेस्ट ब्रांच में एक सप्ताह से बैंक में कैश नहीं आ रहा जबकि चेस्ट ब्रांच से नगर के 15 बैंक जुड़े हैं जो यहीं से कैश लेकर उपभोक्ताओं को वितरित करते हैं। कैैश के अभाव में बैंक उपभोक्ताओं द्वारा जमा राशि से ही काम चला रहे हैं। शुक्रवार को घंटों लाइन में लगने के बाद 4-4 हजार रुपये प्रति उपभोक्ता बांटे गए। ओबीसी में तो लंच से पहले ही कैश खत्म हो गया था। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक में छह हजार रुपये प्रति उपभोक्ता दिया जा रहा था।
विज्ञापन
लकवा ग्रस्त मरीज बैंक पहुंचा
ऐसा ही एक केस शुक्रवार को एक बैंक में सामने आया। उसको मात्र चार हजार रुपये ही बैंक से दिए गए। गांव कुराहवटा का हरिराम 76 वर्ष का है। हरिराम आर्मी से हवलदार पद से रिटायर्ड हैं। डेढ़ महीने पहले हरिराम को लकवा मार गया था। इसके बाद से वह एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। उसके पौते सतपाल ने बताया कि उसके दादा हरिराम का खाता पीएनबी में है। उसे ऑटो में लेकर आना पड़ता है। एक बार लाने पर ऑटो 400 रुपये लेता है। वह बैंक में आठ बार आ चुके हैं। हर बार चार हजार रुपये की राशि मिली है जबकि शुक्रवार को छह हजार रुपये मिले हैं। इलाज के लिए पैसे नहीं होने के कारण दादा को स्वयं बैंक आना पड़ता है जबकि उनके मुंह और पेशाब की जगह नलकी लगी हुई है। उनसे चला फिरा भी नहीं जाता है। नलकी से खिलाया जाता है। पैसों के अभाव में इलाज करवाने में काफी परेशानी आ रही है।
विज्ञापन
दो दिन रहेगी बैंकों की छुट्टी
अब उपभोक्ताओं को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी। 24 दिसंबर को चौथा शनिवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी जबकि 25 दिसंबर क्रिसमस और रविवार है इसलिए छुट्टी रहेगी। दो दिन उपभोक्ताओं को डेबिट कार्ड और पे-टीएम का सहारा ही लेना पड़ेगा। शहर के एटीएम से कैश की उम्मीद लगाना बेकार ही होगा। अभी तक छुट्टी के दिन शहर के किसी भी एटीएम में कैश नहीं डाला गया है। उपभोक्ताओं को निराश ही लौटना पड़ा है।
वर्जन:
बैंक में पिछले एक सप्ताह से कैश नहीं आ रहा। कैश की बड़ी दिक्कत आ रही है। अभी बैंकों में जमा रुपयों से ही काम चलाया जा रहा है। लोगों को चार हजार रुपये प्रति उपभोक्ता दिए जा रहे हैं। - पंकज भाटिया, मैनेजर पटियाला बैंक।