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Mahendragarh-Narnaul News: मोना ने पोलियो से नहीं मानी हार, हाैसले से साधा लक्ष्य पर निशाना

Sun, 01 Sep 2024 03:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 01 Sep 2024 03:04 AM IST
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Mona did not accept defeat from polio, aimed at the target with courage
फोटो नंबर-20नारनौल : मोना अग्रवाल।
नारनौल/नांगल चौधरी। पेरिस पैरालंपिक 2024 की शूटिंग प्रतियोगिता में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव कालबा की पुत्रवधू मोना अग्रवाल के कांस्य पदक जीतने पर ग्रामीणों ने जमकर खुशी मनाई। गांव कालबा की सरपंच संतोष ने बताया कि पोलियो के संक्रमण ने भले ही मोना के चलने-फिरने में रुकावट डाल दी, लेकिन उनके हौसले को रोक नहीं पाया। अब कांस्य पदक जीतकर गांव युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीणों ने मोना के परिजनों को बधाई देते हुए लड्डू बांटे। अब मोना अग्रवाल का तीन व पांच सितंबर को भी मैच होना है।
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सरपंच संतोष देवी ने बताया कि पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली हमारे गांव की पुत्रवधू मोना अग्रवाल की कहानी काफी प्रेरक है। मोना ने एक साथ कई चुनौतियों को पार करते हुए यह कामयाबी हासिल की है। दो बच्चों के साथ-साथ परिवार की देखरेख, नौकरी की जिम्मेदारी संभालते हुए 37 साल की उम्र में मोना ने जो हासिल किया, वह बहुत बड़ी बात है। उनकी 5 साल की बेटी और 3 साल का बेटा भी है। इस मौके पर गांव के पूर्व सरपंच कुलदीप सिंह, पूर्व सरपंच रामनिवास व पूर्व सरपंच सतेंद्र के अलावा गांव के नंबरदार दाताराम, उदमीराम, मनीष कुमार सहित गांव के प्रबुद्ध जनों ने मोना के परिजनों को बधाई व शुभकामनाएं दीं।
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जयपुर में रह रहा है मोना अग्रवाल का परिवार

मोना के पति रविंद्र चौधरी दो भाई हैं और परिवार के साथ वर्तमान में जयपुर में रह रहे हैं। मोना के भतीजे संदीप पहलवान ने बताया कि इस कामयाबी से आज हम सभी खुश हैं। उनकी कहानी हमें बताती है कि किसी भी परिस्थिति में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। संदीप ने बताया कि मोना का पहली बार 2023 में क्रोएशिया के ओसिजेक में होने वाले डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप में चयन हुआ था, यहां उन्होंने कांस्य पदक जीता। पहले प्रयास में पदक जीतने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2022 एशियाई पैरा खेलों और लीमा में 2023 डब्ल्यूएसपीएस चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। फिर उन्होंने नई दिल्ली में हुए डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप 2024 में गोल्ड मेडल जीता। वर्ल्ड कप में उन्होंने पैरा शूटर अवनी लेखरा को पीछे छोड़ दिया था। तभी उनसे पदक की काफी उम्मीदें बढ़ गई थीं।
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मोना पहले शॉटपुट, डिस्कस, जेवलिन थ्रो में आजमाना चाहती थीं हाथ

परिजनों ने बताया कि मोना पहले शॉटपुट, डिस्कस, जेवलिन थ्रो में हाथ आजमाना चाहती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने शूटिंग में कॅरिअर बनाने का फैसला किया। 2021 में उन्होंने शूटिंग में हाथ आजमाने की ठानी थी। तब उनकी बेटी आरवी दो साल की थी। दो छोटे बच्चों का ध्यान रखना, बैंक की नौकरी के साथ-साथ अभ्यास जारी रखना आसान नहीं था। हालांकि पति रविंद्र भी खिलाड़ी हैं, तो घरवालों का भरपूर सहयोग मिला। परिवार वालों के सहयोग के कारण वे लगातार अभ्यास भी करती रहीं।
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