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अधिकतर रोगों की जड़ आधुनिक जीवनशैली : डॉ. यशपाल
Wed, 19 Mar 2025 12:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 19 Mar 2025 12:01 AM IST
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फोटो नंबर- 03पीजी कॉलेज में कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के साथ प्राचार्या डॉ.पूर्ण प्
नारनौल। राजकीय महाविद्यालय में स्वास्थ्य की चुनौतियां और भारतीय जीवनशैली विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
महाविद्यालय प्रेस प्रवक्ता और यूथ रेडक्रॉस अधिकारी प्रोफेसर डॉ. चंद्र मोहन ने प्रमुख वक्ता आरोग्य भारती के प्रांत सचिव योगी डॉ. यशपाल आर्य और जिला महेंद्रगढ़ के सचिव योगाचार्य डॉ. नितिन कुमार रहे। डॉ. यशपाल आर्य ने बताया कि आज अधिकतर रोगों की जड़ आधुनिक जीवनशैली है।
योगाचार्य डॉ. नितिन कुमार ने कहा कि आज भारत में सर्वत्र जहां योग्य डॉक्टर्स, अच्छे अस्पताल और रोग परीक्षण के उत्कृष्ट उपकरण उपलब्ध है। पहले की तुलना में माता-पिता अच्छा खाना अपने परिवारों में उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद भी अस्पताल में बढ़ती रोगियों की कतारें चिंता का विषय है। महाविद्यालय कुलसचिव डॉ. सत्यपाल सुलोदिया बताया कि रसोई घर में डस्टबिन को स्वच्छ रखें। स्वच्छ जल का सेवन करें।
सीनियर प्रोफेसर डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि एक समय था जब हमारी दादी-नानी भोजन विज्ञान की अच्छी जानकारी रखती थीं, लेकिन आज अज्ञानता के कारण अपनी रसोई में और बाजार में अपना समाज बेमेल भोजन का सेवन करता है। इसके कारण कई प्रकार के रोगों से लोग ग्रस्त हो रहे हैं। कार्यक्रम प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा की अध्यक्षता में किया गया। संगोष्ठी के अंत में महाविद्यालय उपप्राचार्य डॉ. जगजीत सिंह मोर ने बाहर से आए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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महाविद्यालय प्रेस प्रवक्ता और यूथ रेडक्रॉस अधिकारी प्रोफेसर डॉ. चंद्र मोहन ने प्रमुख वक्ता आरोग्य भारती के प्रांत सचिव योगी डॉ. यशपाल आर्य और जिला महेंद्रगढ़ के सचिव योगाचार्य डॉ. नितिन कुमार रहे। डॉ. यशपाल आर्य ने बताया कि आज अधिकतर रोगों की जड़ आधुनिक जीवनशैली है।
योगाचार्य डॉ. नितिन कुमार ने कहा कि आज भारत में सर्वत्र जहां योग्य डॉक्टर्स, अच्छे अस्पताल और रोग परीक्षण के उत्कृष्ट उपकरण उपलब्ध है। पहले की तुलना में माता-पिता अच्छा खाना अपने परिवारों में उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बावजूद भी अस्पताल में बढ़ती रोगियों की कतारें चिंता का विषय है। महाविद्यालय कुलसचिव डॉ. सत्यपाल सुलोदिया बताया कि रसोई घर में डस्टबिन को स्वच्छ रखें। स्वच्छ जल का सेवन करें।
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सीनियर प्रोफेसर डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि एक समय था जब हमारी दादी-नानी भोजन विज्ञान की अच्छी जानकारी रखती थीं, लेकिन आज अज्ञानता के कारण अपनी रसोई में और बाजार में अपना समाज बेमेल भोजन का सेवन करता है। इसके कारण कई प्रकार के रोगों से लोग ग्रस्त हो रहे हैं। कार्यक्रम प्राचार्या डॉ. पूर्ण प्रभा की अध्यक्षता में किया गया। संगोष्ठी के अंत में महाविद्यालय उपप्राचार्य डॉ. जगजीत सिंह मोर ने बाहर से आए अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
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