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अब वार्षिक चार्ज के नाम पर हो रही जेब ढीली
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Wed, 13 Apr 2016 11:59 PM IST
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सरकार और विभाग की सख्ती के कारण निजी स्कूल संचालकों ने इस बार एडमिशन फीस से बचने का नया तरीका निकाल लिया है। अब निजी स्कूल दाखिले के लिए फीस नहीं ले रहे हैं। लेकिन वे इसी फीस को वार्षिक चार्ज के रूप में वसूल रहे हैं। निजी स्कूलों की इस मनमानी के कारण अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है। शहर में कई तो ऐसे स्कूल भी हैं, जिन्होंने नर्सरी कक्षा में ही 10-10 हजार रुपये वार्षिक चार्ज लगा रखे हैं। ऐसे में गरीबों के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत ही मुश्किल भरा हो गया है।
एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इसके बाद से निजी स्कूलों में जमकर दाखिले हो रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग होने का फायदा ये निजी स्कूल संचालक उठा रहे हैं। हर कोई अपने बच्चे का दाखिला निजी स्कूल में कराना चाहता है। जिसके कारण स्कूल संचालक अभिभावकों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। गत दिनों शिक्षा मंत्री के दूसरी बार दाखिले में एडमीशन फीस न लेने का निर्देश दिया था। उसके बाद सरकार व विभाग द्वारा की गई सख्ती के कारण अब निजी स्कूल संचालकों ने दाखिला फीस लेने का नया तरीका ईजाद कर लिया है। जिसके कारण अभिभावक के विरोध करने की कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाती।
प्रपत्र में दाखिला फीस का जिक्र नहीं
इस बार निजी स्कूल संचालकों ने अपने स्कूल की फीस का जो प्रपत्र छपवाया हुआ है, उसमें एडमीशन फीस का कहीं जिक्र तक नहीं है। किसी स्कूल ने यदि एडमीशन फीस का जिक्र किया हुआ है तो वह नाम मात्र 1000 या 1500 रुपये तक ही है, जबकि दाखिला फीस से ज्यादा जोर एनुअल चार्ज में दिया हुआ है। फीस प्रपत्र को देखने से पता चलेगा कि उसमें दाखिला फीस से ज्यादा वार्षिक चार्ज दिया हुआ है। जिसके कारण मजबूरी में अभिभावक इसका विरोध भी नहीं कर सकते।
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कई तरह के लगा रखे हैं चार्ज
निजी स्कूलों द्वारा छपवाए गए प्रपत्र की ओर गौर किया जाए तो पता चलेगा कि निजी स्कूल संचालकों ने अपने प्रपत्र में रजिस्ट्रेशन चार्ज, सिक्योरिटी, एक्जाम, एनुअल चार्ज, ट्यूशन फीस व अन्य कई तरह के चार्ज लगाए हुए मिल जाएंगे। इनमें एडमिशन फीस का जिक्र नहीं होगा। इसकी जगह कई स्कूल संचालकों ने एंट्रेंस फीस या अन्य फीस जोड़ दी है।
हजारों रुपयों की हो रही वसूली
एडमिशन फीस नहीं लेने के कारण निजी स्कूल संचालक हजारों रुपये एनुअल चार्ज के रूप में ले रहे हैं। स्कूलों के एनुअल चार्ज पर नजर डालें तो किसी भी निजी स्कूल संचालक ने पांच हजार रुपये से कम नहीं है। वहीं शहर के तीन-चार बड़े स्कूल तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने नर्सरी के बच्चों के ही एनुअल चार्ज दस हजार रुपये किए हुए हैं। ऐसे में नर्सरी के बच्चों के दाखिले के समय ही अभिभावक कम से कम 15 से 20 हजार रुपये स्कूल संचालक को दे आता है।
मारे-मारे फिर रहे अभिभावक
मोहल्ला नई सराय के अशोक कुमार, जमालपुर के दिनेश शर्मा, खड़खड़ी के पंकज कुमार आदि ने बताया कि बच्चों के दाखिलों के लिए वे कई स्कूलों में जा चुके। उन्होंने बताया कि इस महंगाई के जमाने में बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। स्कूल संचालक एक बार में ही मोटी फीस वसूल रहे हैं। दो बच्चों का पिता तो कम से कम 50 हजार रुपये दाखिला के समय स्कूल में दे आता है। वहीं हर माह नर्सरी के बच्चों के ही दो से तीन हजार रुपये प्रतिमाह के अलावा कम से कम 700 रुपये ट्रांसपोर्ट फीस के देने होंगे। ऐसे में केवल नर्सरी में पढ़ने वाले दो बच्चों के ही छह हजार रुपये मासिक खर्च हो जाएंगे। 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले अभिभावक के लिए ये बहुत ज्यादा है।
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एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। इसके बाद से निजी स्कूलों में जमकर दाखिले हो रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का मोह भंग होने का फायदा ये निजी स्कूल संचालक उठा रहे हैं। हर कोई अपने बच्चे का दाखिला निजी स्कूल में कराना चाहता है। जिसके कारण स्कूल संचालक अभिभावकों को दोनों हाथों से लूट रहे हैं। गत दिनों शिक्षा मंत्री के दूसरी बार दाखिले में एडमीशन फीस न लेने का निर्देश दिया था। उसके बाद सरकार व विभाग द्वारा की गई सख्ती के कारण अब निजी स्कूल संचालकों ने दाखिला फीस लेने का नया तरीका ईजाद कर लिया है। जिसके कारण अभिभावक के विरोध करने की कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं रह जाती।
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प्रपत्र में दाखिला फीस का जिक्र नहीं
इस बार निजी स्कूल संचालकों ने अपने स्कूल की फीस का जो प्रपत्र छपवाया हुआ है, उसमें एडमीशन फीस का कहीं जिक्र तक नहीं है। किसी स्कूल ने यदि एडमीशन फीस का जिक्र किया हुआ है तो वह नाम मात्र 1000 या 1500 रुपये तक ही है, जबकि दाखिला फीस से ज्यादा जोर एनुअल चार्ज में दिया हुआ है। फीस प्रपत्र को देखने से पता चलेगा कि उसमें दाखिला फीस से ज्यादा वार्षिक चार्ज दिया हुआ है। जिसके कारण मजबूरी में अभिभावक इसका विरोध भी नहीं कर सकते।
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कई तरह के लगा रखे हैं चार्ज
निजी स्कूलों द्वारा छपवाए गए प्रपत्र की ओर गौर किया जाए तो पता चलेगा कि निजी स्कूल संचालकों ने अपने प्रपत्र में रजिस्ट्रेशन चार्ज, सिक्योरिटी, एक्जाम, एनुअल चार्ज, ट्यूशन फीस व अन्य कई तरह के चार्ज लगाए हुए मिल जाएंगे। इनमें एडमिशन फीस का जिक्र नहीं होगा। इसकी जगह कई स्कूल संचालकों ने एंट्रेंस फीस या अन्य फीस जोड़ दी है।
हजारों रुपयों की हो रही वसूली
एडमिशन फीस नहीं लेने के कारण निजी स्कूल संचालक हजारों रुपये एनुअल चार्ज के रूप में ले रहे हैं। स्कूलों के एनुअल चार्ज पर नजर डालें तो किसी भी निजी स्कूल संचालक ने पांच हजार रुपये से कम नहीं है। वहीं शहर के तीन-चार बड़े स्कूल तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने नर्सरी के बच्चों के ही एनुअल चार्ज दस हजार रुपये किए हुए हैं। ऐसे में नर्सरी के बच्चों के दाखिले के समय ही अभिभावक कम से कम 15 से 20 हजार रुपये स्कूल संचालक को दे आता है।
मारे-मारे फिर रहे अभिभावक
मोहल्ला नई सराय के अशोक कुमार, जमालपुर के दिनेश शर्मा, खड़खड़ी के पंकज कुमार आदि ने बताया कि बच्चों के दाखिलों के लिए वे कई स्कूलों में जा चुके। उन्होंने बताया कि इस महंगाई के जमाने में बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। स्कूल संचालक एक बार में ही मोटी फीस वसूल रहे हैं। दो बच्चों का पिता तो कम से कम 50 हजार रुपये दाखिला के समय स्कूल में दे आता है। वहीं हर माह नर्सरी के बच्चों के ही दो से तीन हजार रुपये प्रतिमाह के अलावा कम से कम 700 रुपये ट्रांसपोर्ट फीस के देने होंगे। ऐसे में केवल नर्सरी में पढ़ने वाले दो बच्चों के ही छह हजार रुपये मासिक खर्च हो जाएंगे। 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले अभिभावक के लिए ये बहुत ज्यादा है।