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Mahendragarh-Narnaul News: एक-एक पौधा जोड़ मंजू ने बनाई बगिया
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फोटो संख्या:59- गांव जाटवास में पौधो को पानी देती मंजू--संवाद
महेंद्रगढ़। गांव जाटवास निवासी मंजू ने पंद्रह साल की मेहनत से एक सुंदर बगिया तैयार की है। इस बगिया में अब साठ से अधिक पौधे हैं। वह अपने पौधों को सहयोगी मानती हैं और उनसे बातें करके मानसिक शांति पाती हैं।
मंजू ने यह बगिया 15 साल पहले शुरू की थी। शुरुआत में पौधों की देखभाल के बावजूद वे मुरझा जाते थे। हर साल वह एक नया पौधा लगाती थीं। इसकी प्रेरणा उनको किसानों से ही मिली। शुरुआत तुलसी के पौधे से हुई और बाद में पूजा करते हुए उनको पौधे लगाने का विचार आया और उनको पौधों की संख्या बढ़ाई।
अब भी हर बारिश में कुछ पौधे खरीदकर लाती हैँ जबकि कुछ पौधे घर पर लगे पौधों से तैयार करती हैं। लगातार प्रयास से अब उनकी बगिया में 60 पौधे हैं। जब उनका मन दुखी होता है तो उन्हें पौधों के पास शांति मिलती है।
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वह अपने पौधों का पोषण गोबर खाद और सामान्य पानी से करती हैं। पौधों की बेहतर देखभाल के लिए वह नर्सरी संचालकों से सुझाव भी लेती हैं। यह बगिया उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
प्लास्टिक बर्तनों का पुन:प्रयोग
मंजू प्लास्टिक के बर्तनों को फेंकने की बजाय उनमें पौधे लगा रही हैं। इससे प्लास्टिक सड़कों पर भी नहीं जा रहा है और उनको पौधे लगाने के लिए अधिक खर्च भी नहीं करना पड़ रहा है। उनको पेंट करके वे गमले बना रही हैं और फिर दीवार व जमीन के हिसाब से गमले को सेट कर देती हैं।
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मंजू ने यह बगिया 15 साल पहले शुरू की थी। शुरुआत में पौधों की देखभाल के बावजूद वे मुरझा जाते थे। हर साल वह एक नया पौधा लगाती थीं। इसकी प्रेरणा उनको किसानों से ही मिली। शुरुआत तुलसी के पौधे से हुई और बाद में पूजा करते हुए उनको पौधे लगाने का विचार आया और उनको पौधों की संख्या बढ़ाई।
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अब भी हर बारिश में कुछ पौधे खरीदकर लाती हैँ जबकि कुछ पौधे घर पर लगे पौधों से तैयार करती हैं। लगातार प्रयास से अब उनकी बगिया में 60 पौधे हैं। जब उनका मन दुखी होता है तो उन्हें पौधों के पास शांति मिलती है।
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वह अपने पौधों का पोषण गोबर खाद और सामान्य पानी से करती हैं। पौधों की बेहतर देखभाल के लिए वह नर्सरी संचालकों से सुझाव भी लेती हैं। यह बगिया उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
प्लास्टिक बर्तनों का पुन:प्रयोग
मंजू प्लास्टिक के बर्तनों को फेंकने की बजाय उनमें पौधे लगा रही हैं। इससे प्लास्टिक सड़कों पर भी नहीं जा रहा है और उनको पौधे लगाने के लिए अधिक खर्च भी नहीं करना पड़ रहा है। उनको पेंट करके वे गमले बना रही हैं और फिर दीवार व जमीन के हिसाब से गमले को सेट कर देती हैं।