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आदर्श रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का अभाव
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रेलवे स्टेशन महेंद्रगढ़ को रेलवे मंत्रालय की ओर से आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया है, लेकिन इस स्टेशन पर आदर्श सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। हालात यह है कि स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव चल रहा है। केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल भले देश के यात्रियों को अच्छी सुविधा देने का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। प्लेट फॉर्म नंबर दो पर पानी, शौचालय तथा टीन शेड की सुविधा तक नहीं है। विकलांगों को चढ़ने एवं उतरने के लिए रैंप नहीं है। इसके अलावा तीन साल पहले बनाया गया स्टेशन भवन का प्लास्टर उतरने लगा है।
बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन को 2006 में आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया था। आदर्श स्टेशन का दर्जा कागजों में ही चलता रहा, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई। 2008 में आवाम परिवर्तन के दौरान रेलवे स्टेशन पर एक दो भवन बढ़े मिले, लेकिन सुविधा फिर भी नदारद रही। 2018 में लगभग 30 लाख रुपये रेलवे का नया भवन, वेटिंग हॉल, शौचालय आदि बनाए गए थे, लेकिन सुविधा तो तब भी नहीं दी गई। आज आधी अधूरी सेवाओं के बल पर ही कागजों में महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन आदर्श स्टेशन के नाम पर चल रहा है।
तीन वर्ष पहले बनाए गए भवन का उतरने लगा प्लास्टर
तीन वर्ष पहले 2018 में रेलवे स्टेशन का पुराना भवन तोड़कर नया भवन बनाया गया था। इस पर 30 लाख रुपये खर्च किए गए थे। 24 जनवरी 2018 को जयपुर मंडल के जीएम टीपी सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के एक वर्ष बाद ही भवन का प्लास्टर उतरने लग गया था। निर्माण के दौरान यहां के लोगों ने इसमें घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने का मुद्दा भी उठाया था और रेलवे अधिकारियों को शिकायत भी दी थी। बावजूद इसके रेलवे अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप घटिया सामग्री लगाने की वजह से एक वर्ष बाद ही प्लास्टर उतरने लगा था। शौचालय में दरारें आ गईं।
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बाक्स
लॉकडाउन से पहले करते थे 1500 यात्री प्रतिदिन सफर
बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन जिले का स्टेशन है। इस स्टेशन पर लॉकडाउन से पहले लगभग 32 गाड़ियां चल रही थीं। सभी एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव इस स्टेशन पर होता था। इसलिए 30 किलोमीटर दूर गांव तक के लोग महेंद्रगढ़ स्टेशन से ही यात्रा करते थे। स्टेशन से प्रतिदिन 1500 यात्री यात्रा करते थे। इससे रेलवे को लगभग सवा लाख रुपये प्रतिदिन राजस्व प्राप्त होता था। बावजूद इसके यात्रियों को पूरी सुविधा नहीं दी जा रही। अभी आठ से दस गाड़ियां ही चल रही हैं।
बाक्स:
पूरे स्टेशन पर एक आरओ से चलता है काम
बता दें कि गर्मी ने दस्तक दे दी है। दिन का तापमान 28 डिग्री से ऊपर ही रहता है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर मात्र एक आरओ से काम चलाया जा रहा है। यह आरओ भी प्लेट फॉर्म नंबर 1 पर एक संस्था की ओर से लगाया गया था। प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर आरओ तो दूर बूथ के नलों में भी पानी नहीं आ रहा। अगर यात्रियों को पानी पीने के लिए पुल पार कर प्लेट फॉर्म नंबर एक पर जाना पड़ता है। प्लेट फॉर्म नंबर 1 पर एक वाटर कूल लगाया हुआ तो है, लेकिन वो खराब पड़ा हुआ है।
प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर नहीं है कोई सुविधा :
बता दें कि प्लेट फॉर्म नंबर दो यात्रियों के ट्रेन में चढ़ने एवं उतरने के लिए ही बनाया गया है। इसके अलावा इस प्लेट फॉर्म पर कोई सुविधा नहीं है। इतने बड़े प्लेट फॉर्म पर कहीं शौचालय की सुविधा नहीं है और न ही पानी की सुविधा। यात्रियों के लिए बैठने के लिए कुर्सियां तो है, लेकिन बारिश और धूप से बचाव के लिए बड़े टीन शेड नहीं हैं। रेलवे ने कुर्सियों के ऊपर छोटे-छोटे टीन शेड तो लगाए हैं, लेकिन बारिश और धूप में उससे बचाव नहीं हो पाता।
वर्जन
रेलवे स्टेशन संबंधित समस्या के संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। भवन की रिपेयरिंग के बारे में भी लिखा गया है।
- अशोक यादव, स्टेशन अधीक्षक महेंद्रगढ़।
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बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन को 2006 में आदर्श रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया गया था। आदर्श स्टेशन का दर्जा कागजों में ही चलता रहा, लेकिन यात्रियों की सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई। 2008 में आवाम परिवर्तन के दौरान रेलवे स्टेशन पर एक दो भवन बढ़े मिले, लेकिन सुविधा फिर भी नदारद रही। 2018 में लगभग 30 लाख रुपये रेलवे का नया भवन, वेटिंग हॉल, शौचालय आदि बनाए गए थे, लेकिन सुविधा तो तब भी नहीं दी गई। आज आधी अधूरी सेवाओं के बल पर ही कागजों में महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन आदर्श स्टेशन के नाम पर चल रहा है।
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तीन वर्ष पहले बनाए गए भवन का उतरने लगा प्लास्टर
तीन वर्ष पहले 2018 में रेलवे स्टेशन का पुराना भवन तोड़कर नया भवन बनाया गया था। इस पर 30 लाख रुपये खर्च किए गए थे। 24 जनवरी 2018 को जयपुर मंडल के जीएम टीपी सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के एक वर्ष बाद ही भवन का प्लास्टर उतरने लग गया था। निर्माण के दौरान यहां के लोगों ने इसमें घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने का मुद्दा भी उठाया था और रेलवे अधिकारियों को शिकायत भी दी थी। बावजूद इसके रेलवे अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप घटिया सामग्री लगाने की वजह से एक वर्ष बाद ही प्लास्टर उतरने लगा था। शौचालय में दरारें आ गईं।
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लॉकडाउन से पहले करते थे 1500 यात्री प्रतिदिन सफर
बता दें कि महेंद्रगढ़ रेलवे स्टेशन जिले का स्टेशन है। इस स्टेशन पर लॉकडाउन से पहले लगभग 32 गाड़ियां चल रही थीं। सभी एक्सप्रेस गाड़ियों का ठहराव इस स्टेशन पर होता था। इसलिए 30 किलोमीटर दूर गांव तक के लोग महेंद्रगढ़ स्टेशन से ही यात्रा करते थे। स्टेशन से प्रतिदिन 1500 यात्री यात्रा करते थे। इससे रेलवे को लगभग सवा लाख रुपये प्रतिदिन राजस्व प्राप्त होता था। बावजूद इसके यात्रियों को पूरी सुविधा नहीं दी जा रही। अभी आठ से दस गाड़ियां ही चल रही हैं।
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पूरे स्टेशन पर एक आरओ से चलता है काम
बता दें कि गर्मी ने दस्तक दे दी है। दिन का तापमान 28 डिग्री से ऊपर ही रहता है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर मात्र एक आरओ से काम चलाया जा रहा है। यह आरओ भी प्लेट फॉर्म नंबर 1 पर एक संस्था की ओर से लगाया गया था। प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर आरओ तो दूर बूथ के नलों में भी पानी नहीं आ रहा। अगर यात्रियों को पानी पीने के लिए पुल पार कर प्लेट फॉर्म नंबर एक पर जाना पड़ता है। प्लेट फॉर्म नंबर 1 पर एक वाटर कूल लगाया हुआ तो है, लेकिन वो खराब पड़ा हुआ है।
प्लेट फॉर्म नंबर 2 पर नहीं है कोई सुविधा :
बता दें कि प्लेट फॉर्म नंबर दो यात्रियों के ट्रेन में चढ़ने एवं उतरने के लिए ही बनाया गया है। इसके अलावा इस प्लेट फॉर्म पर कोई सुविधा नहीं है। इतने बड़े प्लेट फॉर्म पर कहीं शौचालय की सुविधा नहीं है और न ही पानी की सुविधा। यात्रियों के लिए बैठने के लिए कुर्सियां तो है, लेकिन बारिश और धूप से बचाव के लिए बड़े टीन शेड नहीं हैं। रेलवे ने कुर्सियों के ऊपर छोटे-छोटे टीन शेड तो लगाए हैं, लेकिन बारिश और धूप में उससे बचाव नहीं हो पाता।
वर्जन
रेलवे स्टेशन संबंधित समस्या के संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। भवन की रिपेयरिंग के बारे में भी लिखा गया है।
- अशोक यादव, स्टेशन अधीक्षक महेंद्रगढ़।