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Mahendragarh-Narnaul News: जागृति ने तीन बार हार के बाद भी नहीं हारी हिम्मत, चौथी बार जीता कांस्य पदक
Thu, 15 Jan 2026 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:54 PM IST
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फोटो 01 जागृति
नारनौल। मन में अगर कुछ कर गुजरने की धुन हो तो सफलता एक दिन कदम जरूर चूमती है। ऐसा ही हुआ नारनौल के मोहल्ला पीरआगा निवासी जागृति के साथ। उन्होंने तीन बार हार के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और चौथी बार जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।
24 अप्रैल 2011 को जन्मी जागृति ने महज 11 साल की उम्र में एक वीडियो में ओलंपियन गरिमा चौधरी का सम्मान समारोह देखा था तो मन में जूडो सीखने की इच्छा हुई। जागृति की इच्छा पर पिता ने शहर के सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में उसका दाखिला करवा दिया।
जागृति ने साल 2022 में जब जूडो सीखना शुरू किया तो उसकी उम्र महज 11 साल की थी और वह 5वीं कक्षा की छात्रा थी। इस दौरान एक साल की ट्रेनिंग के बाद साल 2023 में उसने स्कूली गेम, कैथल व सब जूनियर कैथल दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया लेकिन हार गई।
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इसके बाद साल 2024 में जागृति ने कैथल में ही आयोजित स्कूली गेम प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में भी जागृति हार गई। तीन बार हारने के बावजूद भी जागृति ने हिम्मत नही हारी और लगातार अभ्यास जारी रखा।
साल 2025 में भिवानी में हुई सब जूनियर प्रतियोगिता में जागृति ने जूडो स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 14 साल की उम्र में पहला कांस्य पदक जीता।
जागृति फिलहाल इसी साल सितंबर में होने वाली स्कूली गेम्स प्रतियोगिता की तैयारी में जुटी हुई है। जागृति ने कहा कि इस बार वह स्वर्णपदक जीतकर कोच, माता पिता व अपने शहर का नाम रोशन करेगी।
वर्जन :
जागृति में सीखने की बेहतर क्षमता है। वह ध्यान लगाकर अभ्यास करती रही तो भविष्य में देश के लिए सोना जीत सकती है। वह आगामी प्रतियोगिता के लिए प्रतिदिन 5 से 6 घंटे अभ्यास कर रही है।-विक्की, जूडो कोच, सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, नारनौल।
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24 अप्रैल 2011 को जन्मी जागृति ने महज 11 साल की उम्र में एक वीडियो में ओलंपियन गरिमा चौधरी का सम्मान समारोह देखा था तो मन में जूडो सीखने की इच्छा हुई। जागृति की इच्छा पर पिता ने शहर के सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में उसका दाखिला करवा दिया।
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जागृति ने साल 2022 में जब जूडो सीखना शुरू किया तो उसकी उम्र महज 11 साल की थी और वह 5वीं कक्षा की छात्रा थी। इस दौरान एक साल की ट्रेनिंग के बाद साल 2023 में उसने स्कूली गेम, कैथल व सब जूनियर कैथल दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया लेकिन हार गई।
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इसके बाद साल 2024 में जागृति ने कैथल में ही आयोजित स्कूली गेम प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में भी जागृति हार गई। तीन बार हारने के बावजूद भी जागृति ने हिम्मत नही हारी और लगातार अभ्यास जारी रखा।
साल 2025 में भिवानी में हुई सब जूनियर प्रतियोगिता में जागृति ने जूडो स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मात्र 14 साल की उम्र में पहला कांस्य पदक जीता।
जागृति फिलहाल इसी साल सितंबर में होने वाली स्कूली गेम्स प्रतियोगिता की तैयारी में जुटी हुई है। जागृति ने कहा कि इस बार वह स्वर्णपदक जीतकर कोच, माता पिता व अपने शहर का नाम रोशन करेगी।
वर्जन :
जागृति में सीखने की बेहतर क्षमता है। वह ध्यान लगाकर अभ्यास करती रही तो भविष्य में देश के लिए सोना जीत सकती है। वह आगामी प्रतियोगिता के लिए प्रतिदिन 5 से 6 घंटे अभ्यास कर रही है।-विक्की, जूडो कोच, सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम, नारनौल।