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महिलाओं का अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक
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अमर उजाला फाउंडेशन एवं बीएमडी ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में अपराजिता के तहत महिला सशक्तीकरण पर विचार गोष्ठी में महिलाओं ने खुलकर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कनीना क्षेत्र की समाज सेविकाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि हासिल करने वाली 20 महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि बीएमडी ग्रुप के चेयरमैन लक्की सीगड़ा ने महिला सशक्तीकरण के लिए महिलाओं का उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। वर्तमान समय में माहौल बदला है। महिलाओं ने खेतों से लेकर आसमान तक अपनी प्रतिभा दिखाई है।
शादी की उम्र 21 करना सार्थक कदम
लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष होने पर लड़कियों को में तरक्की के खूब अवसर मिलेंगे। वर्तमान समय में अपनी प्रतिभा के दम पर बेटियों ने विशेष पहचान बनाई है। अब दौर बदल गया है बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
-मनीषा यादव, सुपरवाइजर
अब वक्त बदल गया है बंद हो घूंघट प्रथा:
समाज में जो घूंघट प्रथा बनी हुई है वह हटनी चाहिए। राजा महाराजाओं के समय विशेष परिस्थितियों में महिलाओं पर लागू की गई घूंघट प्रथा अब बंद होनी चाहिए। वर्तमान समय में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर समाज में विशेष पहचान बनाई है।
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-मंजू, गृहणी
बेटियों के जन्म पर भी मने उत्सव
पहले का दौर अब बदल चुका है। बेटा बेटी में भेदभाव भी समाप्त होने लगा है। समाज की जागरूकता के कारण ही आज बेटियों के जन्म को भी उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है। इस समय परिस्थितियां बदली हैं। महिलाओं को सम्मान भी मिलने लगा है।
-गीता, समाज सेविका।
महिला दें महिला का साथ
महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले महिलाओं को ही साथ देना होगा। महिला आपसी सहयोग से समाज के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। आधुनिक दौर में अब महिला भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही हैं।
-रचना, ककराला।
अपने आप को न समझें कमजोर
महिला अपने आप को कमजोर न समझे उसके लिए रक्षा के लिए शासन एवं प्रशासन मुस्तैद हो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए महिलाओं को अचार, पापड़ बनाकर लघु उद्योग स्थापित करने में अपनी भूमिका निभा रही है।
-बनारसी देवी, एफपीओ संचालिका।
दहेज रूपी कलंक मिटाने को आएं आगे
दहेज लेना और देना दोनों बंद कर देना चाहिए। आजकल हर रोज घटना सुनने को मिल रही है कि किसी ने दहेज में कार मांगी, किसी ने दहेज में पैसों की मांग की जबकि दहेज लेना और देना दोनों जुर्म है। दहेज प्रथा बंद होने से समाज में बहुत अच्छा सुधार होगा।
-सुनीता यादव, गृहणी।
वर्तमान समय में महिला नहीं पीछे
आजकल महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अपने घर का कार्य करने के बाद अचार, पापड़ बनाने का काम कर आजीविका चलाती है। आसपास रहने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में प्रयासरत है। महिलाओं को थोड़ा बहुत समय निकालकर अपना हुनर दिखाना चाहिए।
-कविता यादव, गृहणी।
सरकारी योजनाओं का उठाएं लाभ
महिलाएं स्वयं सहायता समुह बनाकर लघु उद्योग लगाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो सकती हैं। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न करने के लिए लोन दिए जा रहे हैं जिससे लघु उद्योग लगाकर आर्थिक रूप से प्रगति कर सकती हैं।
-सबिता, स्वयंसेविका।
घर की रसोई में है बीमारियों का समाधान
आयुर्वेद घर की रसोई से शुरू होता है। बहुत सारी बीमारियों का समाधान रसोई में ही है। प्राचीन समय में महिलाएं आयुर्वेद का सहारा लेकर घर में बीमारियों का समाधान करने का प्रयास कर लेती थी। आज के समय में महिलाओं को पुराने जमाने के नुक्से जो कि आजकल आयुर्वेद में अच्छे तरीके से समझाएं गए हैं उनको जानना चाहिए और उनका प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. निकिता आयुर्वेदाचार्य।
बेसहारा पशुओं का बनें सहारा
आजकल अधिकतर महिलाएं सब्जी के छिलके पॉलिथीन में बांध कर बाहर फेंक देती हैं जिसको आवारा पशु खाते हैं जिससे आवारा पशु बीमार हो जाते हैं। कई बार यह देखने को मिला है कि आवारा मवेशियों के पेट में पॉलिथीन जाने की वजह से उसकी मौत हो जाती है। महिलाएं अपने सभी कार्यों को देखते हुए पॉलिथीन का कम प्रयोग करें।
-डॉ. प्रवीन, पशु चिकित्सक।
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शादी की उम्र 21 करना सार्थक कदम
लड़कियों की शादी की उम्र 21 वर्ष होने पर लड़कियों को में तरक्की के खूब अवसर मिलेंगे। वर्तमान समय में अपनी प्रतिभा के दम पर बेटियों ने विशेष पहचान बनाई है। अब दौर बदल गया है बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं।
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-मनीषा यादव, सुपरवाइजर
अब वक्त बदल गया है बंद हो घूंघट प्रथा:
समाज में जो घूंघट प्रथा बनी हुई है वह हटनी चाहिए। राजा महाराजाओं के समय विशेष परिस्थितियों में महिलाओं पर लागू की गई घूंघट प्रथा अब बंद होनी चाहिए। वर्तमान समय में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा के दम पर समाज में विशेष पहचान बनाई है।
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-मंजू, गृहणी
बेटियों के जन्म पर भी मने उत्सव
पहले का दौर अब बदल चुका है। बेटा बेटी में भेदभाव भी समाप्त होने लगा है। समाज की जागरूकता के कारण ही आज बेटियों के जन्म को भी उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है। इस समय परिस्थितियां बदली हैं। महिलाओं को सम्मान भी मिलने लगा है।
-गीता, समाज सेविका।
महिला दें महिला का साथ
महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सबसे पहले महिलाओं को ही साथ देना होगा। महिला आपसी सहयोग से समाज के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकती हैं। आधुनिक दौर में अब महिला भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही हैं।
-रचना, ककराला।
अपने आप को न समझें कमजोर
महिला अपने आप को कमजोर न समझे उसके लिए रक्षा के लिए शासन एवं प्रशासन मुस्तैद हो अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए महिलाओं को अचार, पापड़ बनाकर लघु उद्योग स्थापित करने में अपनी भूमिका निभा रही है।
-बनारसी देवी, एफपीओ संचालिका।
दहेज रूपी कलंक मिटाने को आएं आगे
दहेज लेना और देना दोनों बंद कर देना चाहिए। आजकल हर रोज घटना सुनने को मिल रही है कि किसी ने दहेज में कार मांगी, किसी ने दहेज में पैसों की मांग की जबकि दहेज लेना और देना दोनों जुर्म है। दहेज प्रथा बंद होने से समाज में बहुत अच्छा सुधार होगा।
-सुनीता यादव, गृहणी।
वर्तमान समय में महिला नहीं पीछे
आजकल महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। अपने घर का कार्य करने के बाद अचार, पापड़ बनाने का काम कर आजीविका चलाती है। आसपास रहने वाली महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में प्रयासरत है। महिलाओं को थोड़ा बहुत समय निकालकर अपना हुनर दिखाना चाहिए।
-कविता यादव, गृहणी।
सरकारी योजनाओं का उठाएं लाभ
महिलाएं स्वयं सहायता समुह बनाकर लघु उद्योग लगाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो सकती हैं। सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न करने के लिए लोन दिए जा रहे हैं जिससे लघु उद्योग लगाकर आर्थिक रूप से प्रगति कर सकती हैं।
-सबिता, स्वयंसेविका।
घर की रसोई में है बीमारियों का समाधान
आयुर्वेद घर की रसोई से शुरू होता है। बहुत सारी बीमारियों का समाधान रसोई में ही है। प्राचीन समय में महिलाएं आयुर्वेद का सहारा लेकर घर में बीमारियों का समाधान करने का प्रयास कर लेती थी। आज के समय में महिलाओं को पुराने जमाने के नुक्से जो कि आजकल आयुर्वेद में अच्छे तरीके से समझाएं गए हैं उनको जानना चाहिए और उनका प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. निकिता आयुर्वेदाचार्य।
बेसहारा पशुओं का बनें सहारा
आजकल अधिकतर महिलाएं सब्जी के छिलके पॉलिथीन में बांध कर बाहर फेंक देती हैं जिसको आवारा पशु खाते हैं जिससे आवारा पशु बीमार हो जाते हैं। कई बार यह देखने को मिला है कि आवारा मवेशियों के पेट में पॉलिथीन जाने की वजह से उसकी मौत हो जाती है। महिलाएं अपने सभी कार्यों को देखते हुए पॉलिथीन का कम प्रयोग करें।
-डॉ. प्रवीन, पशु चिकित्सक।