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Mahendragarh-Narnaul News: खेती को नई दिशा दे रहा एकीकृत बागवानी विकास केंद्र

Sun, 07 Sep 2025 12:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 07 Sep 2025 12:14 AM IST
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Integrated Horticulture Development Center is giving new direction to agriculture
फोटो नंबर- 04पोली हाउस में तैयार की जा रही पौध में पानी डालते कर्मचारी। स्रोत-प्रशासन
नारनौल। गांव सुंदरह स्थित एकीकृत बागवानी विकास केंद्र नई तकनीक के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। यहां से सीखकर किसान परंपरागत की बजाय प्राकृतिक खेती की ओर रुझान दिखा रहे है। इससे किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
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इनसे अन्य किसान भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित हो रहे हैं। अब तक लगभग 900 किसानों को नेट हाउस, पॉली हाउस, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और सूक्ष्म सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा चुका है। केंद्र में हाईटेक ग्रीन हाउस में कोकोपीट, वर्मीकुलाइट और परलाइट जैसे मृदा रहित माध्यम का उपयोग करके पौध तैयार की जाती है। इन मिट्टी रहित पौधों की गुणवत्ता और रोग-प्रतिरोधक क्षमता सामान्य पौधों से कहीं बेहतर होती है।
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यह केंद्र 12.5 एकड़ भूमि पर बनाया है। वर्ष 2019-20 से लेकर अभी तक केंद्र ने 1 करोड़ 49 लाख से अधिक सब्जी की पौध तैयार की जा चुकी है। बेल वाली सब्जी के पौधों की लागत 1.20 रुपये प्रति पौधा है जबकि बिना बेल वाली सब्जियों के पौधों की लागत 1.40 रुपये प्रति पौधा है, जो किसानों के लिए काफी किफायती है। वहीं केंद्र के 4.5 एकड़ क्षेत्र में किन्नू, माल्टा, खजूर, अनार और बेर जैसे फल भी उगाए जाते हैं।
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ये हैं किसानों के लिए सुविधाएं

केंद्र द्वारा किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। खेती के लिए आवश्यक मशीनें जैसे रोटावेटर, पावर टिलर, मल्चिंग मशीन और स्प्रे टैंक आदि किराये पर उपलब्ध कराई जाती हैं जिससे छोटे किसानों को भी आधुनिक खेती करने में आसानी होती है। वहीं प्रत्येक सीजन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण फसलें उगाने और वर्षभर उत्पादन बनाए रखने की तकनीक भी सिखाई जाती है।

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वर्जन :
जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में बागवानी की काफी संभावनाएं है। गांव सुंदरह स्थित केंद्र द्वारा किसानों को नवीनतम तकनीक अपनाने और अधिक उपज लेने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसे आसपास के जिलों के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। प्राकृतिक खेती में रुझान दिखा रहे हैं।- कैप्टन मनोज कुमार, उपायुक्त, नारनौल।
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