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Mahendragarh-Narnaul News: व्याख्यान में भारतीय परंपरा व संस्कृति पर प्रकाश डाला
Tue, 23 Jul 2024 11:57 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 23 Jul 2024 11:57 PM IST
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फोटो संख्या: 53 हकेंवि में आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान में प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए कुलद
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ के हिंदी विभाग द्वारा व्याख्यानमाला की शृंखला में सप्तसिंधु क्षेत्र में हिंदी भाषा का महत्व विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने सप्तसिंधु शब्द के महत्व को व्याख्यायित करते हुए भारतीय परंपरा व संस्कृति पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, प्रो. सुषमा यादव सम कुलपति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने मुख्य वक्ता के स्वागत भाषण से किया। प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने सप्तसिंधु शब्द के महत्व को व्याख्यायित करते हुए बताया कि ऋग्वेद में सप्तसिंधु शब्द का प्रयोग हमें देखने को मिलता है, जिसका संबंध सात नदियों के योग से है जो सिंधु क्षेत्र में जाकर मिलती हैं। सप्त सिंधु क्षेत्र भारत की आत्मा है। यह एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है, जो संस्कृति, सभ्यता और भाषा के विकास का मुख्य केंद्र है। हिंदी के प्रचार और प्रसार में आमजन के साथ-साथ यहां के विभिन्न सम्राटों, शासकों एवं संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर प्रो. पवन शर्मा, कुलानुशासक प्रो. नंद किशोर, प्रो. नीलम सांगवान, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. आनंद शर्मा, डॉ. दिनेश, डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. अंकुश विज, डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. कामराज सिंधु, डॉ. अरविंद सिंह तेजावत मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, प्रो. सुषमा यादव सम कुलपति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. बीरपाल सिंह यादव ने मुख्य वक्ता के स्वागत भाषण से किया। प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने सप्तसिंधु शब्द के महत्व को व्याख्यायित करते हुए बताया कि ऋग्वेद में सप्तसिंधु शब्द का प्रयोग हमें देखने को मिलता है, जिसका संबंध सात नदियों के योग से है जो सिंधु क्षेत्र में जाकर मिलती हैं। सप्त सिंधु क्षेत्र भारत की आत्मा है। यह एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है, जो संस्कृति, सभ्यता और भाषा के विकास का मुख्य केंद्र है। हिंदी के प्रचार और प्रसार में आमजन के साथ-साथ यहां के विभिन्न सम्राटों, शासकों एवं संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर प्रो. पवन शर्मा, कुलानुशासक प्रो. नंद किशोर, प्रो. नीलम सांगवान, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. आनंद शर्मा, डॉ. दिनेश, डॉ. नरेंद्र परमार, डॉ. अंकुश विज, डॉ. कमलेश कुमारी, डॉ. कामराज सिंधु, डॉ. अरविंद सिंह तेजावत मौजूद रहे।
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