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71 साल से उधार के जिला मुख्यालय के भरोसे महेंद्रगढ़
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महेंद्रगढ का किला
- फोटो : Narnol
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71 साल पहले मिला महेंद्रगढ़ नाम आज भी खुद सार्थक करने का प्रयास कर रहा है। महेंद्रगढ़ शहर अपने अस्तित्व के लिए दशकों से जिला मुख्यालय की जंग लड़ रहा है। दक्षिण हरियाणा के महत्वपूर्ण हिस्से महेंद्रगढ़ को एनसीआर का हिस्सा बना दिए जाने के बाद भी आज तक यह विकास के मामले में प्रदेश के अन्य जिलों की बराबरी पर नहीं आ सका। प्रदेश में सबसे अधिक पिछड़ा जिला नूंह तथा दूसरे नंबर पर महेंद्रगढ़ आंका जाता है। यहां के विकास का अंदाज इससे लगाए कि दिल्ली में जहां हवाई जहाज की स्पीड है। एनसीआर के बड़े हिस्से में मेट्रो है। इस हिस्से में अब भी ऊंट गाड़ी चलती हैं। महेंद्रगढ़ शहर में कचरा उठाने के लिए किसी मोटर वाहन का उपयोग नहीं होता यहां अब भी ऊंट गाड़ी कचरा उठाने आती है।
हरियाणा गठन के समय सात जिले अस्तित्व में थे। जिसमें महेंद्रगढ़ भी शामिल था। 1966 के बाद इसका कुछ हिस्सा अलग कर उसमें भिवानी का हिस्सा मिलाकर दादरी बनाया गया। इसका कुुछ हिस्सा तोड़कर उसमें गुरुग्राम का कुछ हिस्सा मिलाकर रेवाड़ी जिला बनाया गया। उद्योग की बात करें तो यहां एक भी बड़ा,मध्यम उद्योग नहीं है। जिले में कहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर तक विकसित नहीं किए गए। पूरे जिले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का केवल एक ही विकसित सेक्टर है। राजस्थान के साथ लगते इस जिले में 89 प्रतिशत जमीन रेतीली है। यहां नहरी पानी की पहुंच बेहद कम होने के कारण भूजल से ही खेती होती है। भूजल लगातार नीचे गिरते गिरते पूरा जिला डार्क जोन में आ चुका है।
2009 के बाद विकास की रफ्तार तेज हुई। जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट सेंट्रल यूनिवर्सिटी यहां 2013 में शुरू हुई। पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय ही यहां आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज बना। इसके बाद वर्ष 2015 में यहां लॉजिस्टिक हब की शुरूआत हुई। वर्ष 2018 में जिले के पहले मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ। रेतीली धरती को अपने पसीने से सींचते हुए इस क्षेत्र के मेहनती लोग शिक्षा के क्षेत्र में अपना मुुकाम हासिल कर रहे हैं। महेंद्रगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा हब बन चुका है। सीबीएससी दसवीं, बारहवीं, आईआईटी, नीट, सिविल सर्विस सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में महेंद्रगढ़ जिले के विद्यार्थी टॉप लिस्ट में रहते हैं। 2018 में महेंद्रगढ़ जिले के प्रथम कौशिक ने सिविल सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर पांचवां स्थान हासिल किया। महेंद्रगढ़ के गांव सुुरहेती पिलानिया का खिलाड़ी संदीप पूनिया ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बाजरा, सरसों उत्पादन में प्रदेश में महेंद्रगढ़ सबसे अव्वल जिला है।
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जानिए इतिहास
1857 से पहले यह हिस्सा नवाब झज्जर के अधीन आता था। 1857 की क्रांति में महराजा पटियाला ने अंग्रेजों की मदद की। जिस पर उन्होंने यह तात्कालिक नाम कानौड़ का यह एरिया महाराज पटियाला को दे दिया। 1861 में पटियाला महाराज नरेंद्र ने अपने बेटे नरेंद्र सिंह की स्मृति में इस इस क्षेत्र में बने प्राचीन महल को महेंद्र सिंह के नाम पर कर दिया। देश आजाद होने के बाद 1948 में महेंद्रगढ़, दादरी, बावल, नारनौल को मिलाकर महेंद्रगढ़ जिला का गठन किया गया। आजाद भारत में नियुुक्त किए गए पहले डीसी आरएस पलटा ने अपना कार्यालय नारनौल में स्थापित किया। तब से जिला मुख्यालय नारनौल में ही चल रहा है। 1954 में महेंद्रगढ़ नगर पालिका का गठन किया गया। वर्ष 1966 में यह हरियाणा गठन के समय महेंद्रगढ़ जिला था।
जिला एक नजर में
जिला का क्षेत्रफल 1939 वर्ग किलोमीटर
आबादी 922088
विधानसभा क्षेत्र नांगल चौधरी, अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल
पंचायत 370
उपमंडल नारनौल, कनीना, महेंद्रगढ़
मुुख्य शहर कस्बे नारनौल, महेंद्रगढ़, सतनाली, कनीना, नांगल चौधरी, अटेली
जवाहरलाल नेहरू आए तो कांग्रेस का विधायक जीता
वर्ष 1950 से 1952 तक यहां से केएन बोहरा पहले निर्दलीय विधायक बने। जवाहरलाल नेहरू ने उनको कांग्रेस में शामिल होने के लिए बुलाया तो उन्होंने इनकार कर दिया। केएन बोहरा की मौत के बाद 1953 में उपचुनाव हुए। जिसमें चुनाव प्रचार करने के लिए जवाहरलाल नेहरू आए। नेहरू के प्रचार के बाद यहां कांग्रेेस के मंगल सिंह विधायक बने।
ऐतिहासिक की धरोहर सबसे ज्यादा
जल महल, बीरबल का छत्ता, ढोसी की पहाड़ी, चोर गुबंद, महेंद्रगढ़ का किला, माधोगढ़ का किला महेंद्रगढ़ जिले की सबसे बड़ी ऐतिहासिक धरोहर हैं। मुगल काल के महलों की विरासत को अभी तक संजो कर रखा है।
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हरियाणा गठन के समय सात जिले अस्तित्व में थे। जिसमें महेंद्रगढ़ भी शामिल था। 1966 के बाद इसका कुछ हिस्सा अलग कर उसमें भिवानी का हिस्सा मिलाकर दादरी बनाया गया। इसका कुुछ हिस्सा तोड़कर उसमें गुरुग्राम का कुछ हिस्सा मिलाकर रेवाड़ी जिला बनाया गया। उद्योग की बात करें तो यहां एक भी बड़ा,मध्यम उद्योग नहीं है। जिले में कहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर तक विकसित नहीं किए गए। पूरे जिले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का केवल एक ही विकसित सेक्टर है। राजस्थान के साथ लगते इस जिले में 89 प्रतिशत जमीन रेतीली है। यहां नहरी पानी की पहुंच बेहद कम होने के कारण भूजल से ही खेती होती है। भूजल लगातार नीचे गिरते गिरते पूरा जिला डार्क जोन में आ चुका है।
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2009 के बाद विकास की रफ्तार तेज हुई। जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट सेंट्रल यूनिवर्सिटी यहां 2013 में शुरू हुई। पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय ही यहां आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज बना। इसके बाद वर्ष 2015 में यहां लॉजिस्टिक हब की शुरूआत हुई। वर्ष 2018 में जिले के पहले मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ। रेतीली धरती को अपने पसीने से सींचते हुए इस क्षेत्र के मेहनती लोग शिक्षा के क्षेत्र में अपना मुुकाम हासिल कर रहे हैं। महेंद्रगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षा हब बन चुका है। सीबीएससी दसवीं, बारहवीं, आईआईटी, नीट, सिविल सर्विस सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में महेंद्रगढ़ जिले के विद्यार्थी टॉप लिस्ट में रहते हैं। 2018 में महेंद्रगढ़ जिले के प्रथम कौशिक ने सिविल सर्विस परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर पांचवां स्थान हासिल किया। महेंद्रगढ़ के गांव सुुरहेती पिलानिया का खिलाड़ी संदीप पूनिया ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बाजरा, सरसों उत्पादन में प्रदेश में महेंद्रगढ़ सबसे अव्वल जिला है।
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जानिए इतिहास
1857 से पहले यह हिस्सा नवाब झज्जर के अधीन आता था। 1857 की क्रांति में महराजा पटियाला ने अंग्रेजों की मदद की। जिस पर उन्होंने यह तात्कालिक नाम कानौड़ का यह एरिया महाराज पटियाला को दे दिया। 1861 में पटियाला महाराज नरेंद्र ने अपने बेटे नरेंद्र सिंह की स्मृति में इस इस क्षेत्र में बने प्राचीन महल को महेंद्र सिंह के नाम पर कर दिया। देश आजाद होने के बाद 1948 में महेंद्रगढ़, दादरी, बावल, नारनौल को मिलाकर महेंद्रगढ़ जिला का गठन किया गया। आजाद भारत में नियुुक्त किए गए पहले डीसी आरएस पलटा ने अपना कार्यालय नारनौल में स्थापित किया। तब से जिला मुख्यालय नारनौल में ही चल रहा है। 1954 में महेंद्रगढ़ नगर पालिका का गठन किया गया। वर्ष 1966 में यह हरियाणा गठन के समय महेंद्रगढ़ जिला था।
जिला एक नजर में
जिला का क्षेत्रफल 1939 वर्ग किलोमीटर
आबादी 922088
विधानसभा क्षेत्र नांगल चौधरी, अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल
पंचायत 370
उपमंडल नारनौल, कनीना, महेंद्रगढ़
मुुख्य शहर कस्बे नारनौल, महेंद्रगढ़, सतनाली, कनीना, नांगल चौधरी, अटेली
जवाहरलाल नेहरू आए तो कांग्रेस का विधायक जीता
वर्ष 1950 से 1952 तक यहां से केएन बोहरा पहले निर्दलीय विधायक बने। जवाहरलाल नेहरू ने उनको कांग्रेस में शामिल होने के लिए बुलाया तो उन्होंने इनकार कर दिया। केएन बोहरा की मौत के बाद 1953 में उपचुनाव हुए। जिसमें चुनाव प्रचार करने के लिए जवाहरलाल नेहरू आए। नेहरू के प्रचार के बाद यहां कांग्रेेस के मंगल सिंह विधायक बने।
ऐतिहासिक की धरोहर सबसे ज्यादा
जल महल, बीरबल का छत्ता, ढोसी की पहाड़ी, चोर गुबंद, महेंद्रगढ़ का किला, माधोगढ़ का किला महेंद्रगढ़ जिले की सबसे बड़ी ऐतिहासिक धरोहर हैं। मुगल काल के महलों की विरासत को अभी तक संजो कर रखा है।