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Mahendragarh-Narnaul News: पूछ में लगी आग से हनुमान ने सोने की लंका जला दी
Tue, 30 Sep 2025 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 30 Sep 2025 11:42 PM IST
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फोटो 01 हनुमान को पकड़कर रावण के सामने पेश करते हुए। स्वय
नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला ट्रस्ट चांदुवाड़ा में सोमवार रात अशोक वाटिका और लंका दहन की लीला का किया गया।
रामलीला के 10वें दिन की लीला में बाली वध के उपरांत सुग्रीव अपने राजपाट के काम व लोभ में माता सीता की खोज को भुला देते हैं। तब प्रभु के आदेश पर क्रोध से भरकर लक्ष्मण किष्किंधा नगरी जाकर सुग्रीव को उनकी भूल का एहसास करवाते हैं और सुग्रीव त्राहिमाम करते हुए प्रभु राम की शरण में पहुंचते हैं।
उसके बाद श्रीराम के आदेश अनुसार वानरों की अलग अलग टुकड़ियां सभी दिशाओं में माता सीता की खोज में निकलती हैं। प्रभु राम अपने अनन्य भक्त हनुमान को निशानी के तौर पर अपनी मुद्रिका सीता को दिखाने के लिए देते हैं। माता सीता की खोज में अथाह समुद्र को देख हनुमान भी असमंजस में पड़ जाते हैं, तब वरिष्ठ जामवंत द्वारा उनकी शक्ति का स्मरण करवाने पर हनुमान 100 योजन समुद्र लांघकर लंका में जाकर अशोक वाटिका में माता सीता से मुलाकात करते हैं।
तब अक्षय कुमार उन्हें रोकने का प्रयत्न करता है और हनुमान के हाथों परलोक पहुंच जाता है। इसके बाद रावण के दूसरे पुत्र अत्यंत पराक्रमी मेघनाथ हनुमान को बंदी बना कर रावण के सामने प्रस्तुत करता है और रावण हनुमान की पूछ में आग लगवा देते हैं। इसके उपरांत हनुमान उस अग्नि से रावण की सोने की लंका का ही दहन कर वहां से पलायन करते हैं। मुख्य अतिथि एएसडीओ संजय सिंघल व रजत चौधरी रहे व अध्यक्षता गौरव अग्रवाल ने की। ट्रस्ट प्रधान संजय गर्ग ने कार्यकारिणी के साथ सभी अतिथिगणों को पटका व माला पहनाकर सम्मानित किया।
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रामलीला के 10वें दिन की लीला में बाली वध के उपरांत सुग्रीव अपने राजपाट के काम व लोभ में माता सीता की खोज को भुला देते हैं। तब प्रभु के आदेश पर क्रोध से भरकर लक्ष्मण किष्किंधा नगरी जाकर सुग्रीव को उनकी भूल का एहसास करवाते हैं और सुग्रीव त्राहिमाम करते हुए प्रभु राम की शरण में पहुंचते हैं।
उसके बाद श्रीराम के आदेश अनुसार वानरों की अलग अलग टुकड़ियां सभी दिशाओं में माता सीता की खोज में निकलती हैं। प्रभु राम अपने अनन्य भक्त हनुमान को निशानी के तौर पर अपनी मुद्रिका सीता को दिखाने के लिए देते हैं। माता सीता की खोज में अथाह समुद्र को देख हनुमान भी असमंजस में पड़ जाते हैं, तब वरिष्ठ जामवंत द्वारा उनकी शक्ति का स्मरण करवाने पर हनुमान 100 योजन समुद्र लांघकर लंका में जाकर अशोक वाटिका में माता सीता से मुलाकात करते हैं।
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तब अक्षय कुमार उन्हें रोकने का प्रयत्न करता है और हनुमान के हाथों परलोक पहुंच जाता है। इसके बाद रावण के दूसरे पुत्र अत्यंत पराक्रमी मेघनाथ हनुमान को बंदी बना कर रावण के सामने प्रस्तुत करता है और रावण हनुमान की पूछ में आग लगवा देते हैं। इसके उपरांत हनुमान उस अग्नि से रावण की सोने की लंका का ही दहन कर वहां से पलायन करते हैं। मुख्य अतिथि एएसडीओ संजय सिंघल व रजत चौधरी रहे व अध्यक्षता गौरव अग्रवाल ने की। ट्रस्ट प्रधान संजय गर्ग ने कार्यकारिणी के साथ सभी अतिथिगणों को पटका व माला पहनाकर सम्मानित किया।
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