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Mahendragarh-Narnaul News: एमएसपी पर बाजरे बेचने पर भी किसान को 150-200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान

Tue, 06 Oct 2026 02:42 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:42 AM IST
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Hafed will procure millet only after cleaning with electric graders; traders have also lowered prices.
फोटो नंबर- 11नई अनाज मंडी में सरसों की तुलाई करते श्रमिक। संवाद
नारनौल। सोमवार को बाजरे की सरकारी खरीद शुरू होने की उम्मीद में बैठे किसानों को पूरे दिन इंतजार करना पड़ा। मार्केट कमेटी कार्यालय में अधिकारियों और व्यापारियों की बैठक लंबे समय तक चलती रही। आखिरकार शाम 4 बजे के बाद खरीद शुरू हुई लेकिन इसके बावजूद किसानों को 150-200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान होगा।
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बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय है, मगर हैफेड बाजरा तभी खरीद रही है जब उसकी इलेक्ट्रिक झरने से सफाई हो। इस सफाई पर प्रति क्विंटल 150 रुपये तक मजदूरी लगती है जबकि सामान्य खरीद में यह खर्च सिर्फ 10 रुपये आता है। यानी एमएसपी पर बेचने के बाद भी किसान के हाथ में 2700 से 2750 रुपये ही आएंगे, जो 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल का सीधा नुकसान है। इसी कारण किसान हैफेड को बाजरा बेचने में रुचि नहीं ले रहे।
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सरकारी खरीद शुरू होने से पहले खुली मंडी में बाजरे का भाव 2200 से 2400 रुपये के आसपास था। अब व्यापारी 2100 से 2250 रुपये में खरीद कर रहे हैं। पहले जे-फार्म 2301 रुपये पर जारी हो रहे थे लेकिन बैठक में तय हुआ कि व्यापारी 2300 रुपये से कम भाव पर भी जे-फार्म जारी कर सकेंगे। यदि कोई किसान व्यापारी को 2200 रुपये पर बाजरा बेचता है, तो उसे 600 रुपये भावांतर मिलेंगे, फिर भी कुल दाम एमएसपी से कम रहेगा।
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नारनौल की नई अनाज मंडी में सोमवार को 80 गेटपास जारी हुए और 2 हजार क्विंटल बाजरे की आवक हुई। पिछले पांच दिनों में करीब 160 गेटपास जारी हुए हैं और 5 हजार क्विंटल बाजरा मंडी में पहुंचा है।
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1 अक्तूबर को बाजरा लेकर मंडी पहुंचा था और 5 दिन से मंडी में रहकर बाजरा खरीद का इंतजार कर रहा हूं। सोमवार को 4 बजे बाजरा खरीद शुरू तो हुई है लेकिन एमएसपी से कम पर ही बाजरा बेचना पड़ेगा।-विनोद कुमार, किसान, गांव भूषण खुर्द
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चार महीने धूप में तप कर फसल उगाते हैं और फिर मंडी में बैठकर उसे बेचने का इंतजार करते हैं। सरकार एमएसपी निर्धारित करती है और किसानों को फसल का भाव कम मिलता है। यह खरीद व्यवस्था किसानों का शोषण करने वाली है।-इंद्र यादव, किसान, गांव रामबास

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वर्जन:
मार्केट कमेटी कार्यालय में बैठक के बाद बाजरे की खरीद शुरू की गई है। बाजार भाव के अनुसार व्यापारी जे-फार्म जारी कर सकते हैं। वहीं बाजरे की गुणवत्ता व जांच के बाद हैफेड की ओर से भी खरीद की जा सकती है। बाजरा खरीद सुचारू व सुगम बनाई गई है।-बाबूलाल यादव, चेयरमैन, मार्केट कमेटी, नारनौल।
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