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हैफेड के पास नहीं फायर सेफ्टी की एनओसी
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हैफेड मील में बना अलग से बना फायर विंग ।
- फोटो : Narnol
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नारनौल। निजामपुर रोड पर बनी हैफेड ऑयल मिल में आग लगने की घटना के तीन दिन बाद भी इसके कारणों का पता नहीं लग पाया है। आग लगने के चलते लगभग दो करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। इस पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी जांच कर रही है। चंडीगढ़ से स्वयं निदेशक पूरे मामले को देख रहे हैं।
शुक्रवार को भी अधिकारियों ने स्टॉक की जांच की। आग लगने से लगभग 56 हजार लीटर सरसों का तेल व 36 सौ क्विंटल सरसों जलने का अनुमान लगाया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि हैफेड मिल के पास फायर विभाग से एनओसी तक नहीं है। मिल में फायर सेफ्टी का सिस्टम पूरी तरह से ठप्प है। कोई इंस्ट्रूमेंट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार अगर जरा सी भी सावधानी बरती जाती तो निश्चित तौर पर इतने बड़े नुकसान से बचा जा सकता था। आग लगने से जहां सामान जलकर राख हो गया वहीं पर एक गोदाम भी पूरी तरह से तबाह हो गया। छत व दीवारें गिर गई। आग लगने की घटना की जांच सभी तरह से की जा रही है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के साथ साथ चौकीदार से भी पूछताछ की जा रही है।
खराब पड़े उपकरण बता रहे हैं कहानी
मिल में फायर सेफ्टी की अलग से विंग है। मगर इसमें कोई साजो सामान नहीं है। जो है वह कंडम है। सबसे बड़ी बात यह है कि विभाग का इतना बड़ा प्लांट होने के बाद भी फायर विभाग से इसकी एनओसी तक नहीं ली गई थी। अब अधिकारी यह बात पूछने पर बता रहे हैं कि एनओसी लेने की प्रक्रिया जारी थी।
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मामले की जांच कर रहे केएस लाठर का कहना है कि बड़ा नुकसान हुआ है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। लगभग 56 हजार लीटर सरसों का तेल व 72 सौ सरसों के बैग जले हैं। स्टॉक की जांच हो गई है। अभी और भी जांच हो रही हैं। इसके पूरे होने पर ही कुछ बताया जा सकेगा।
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शुक्रवार को भी अधिकारियों ने स्टॉक की जांच की। आग लगने से लगभग 56 हजार लीटर सरसों का तेल व 36 सौ क्विंटल सरसों जलने का अनुमान लगाया जा रहा है। हैरत की बात यह है कि हैफेड मिल के पास फायर विभाग से एनओसी तक नहीं है। मिल में फायर सेफ्टी का सिस्टम पूरी तरह से ठप्प है। कोई इंस्ट्रूमेंट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार अगर जरा सी भी सावधानी बरती जाती तो निश्चित तौर पर इतने बड़े नुकसान से बचा जा सकता था। आग लगने से जहां सामान जलकर राख हो गया वहीं पर एक गोदाम भी पूरी तरह से तबाह हो गया। छत व दीवारें गिर गई। आग लगने की घटना की जांच सभी तरह से की जा रही है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के साथ साथ चौकीदार से भी पूछताछ की जा रही है।
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मिल में फायर सेफ्टी की अलग से विंग है। मगर इसमें कोई साजो सामान नहीं है। जो है वह कंडम है। सबसे बड़ी बात यह है कि विभाग का इतना बड़ा प्लांट होने के बाद भी फायर विभाग से इसकी एनओसी तक नहीं ली गई थी। अब अधिकारी यह बात पूछने पर बता रहे हैं कि एनओसी लेने की प्रक्रिया जारी थी।
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मामले की जांच कर रहे केएस लाठर का कहना है कि बड़ा नुकसान हुआ है। हर पहलू पर जांच की जा रही है। लगभग 56 हजार लीटर सरसों का तेल व 72 सौ सरसों के बैग जले हैं। स्टॉक की जांच हो गई है। अभी और भी जांच हो रही हैं। इसके पूरे होने पर ही कुछ बताया जा सकेगा।