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सरकारी आदेश ठेंगे पर, प्राइवेट लैब संचालक अपनी मनमर्जी से वसूल रहे टेस्ट की फीस
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नारनौल। प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि प्राइवेट लैब संचालक आदेश के बाद भी अपनी मनमर्जी से मरीजों से निर्धारित रेट से अधिक पैसे वसूल रहे हैं। प्रशासन को ऐसी लगभग एक दर्जन शिकायतें विभिन्न स्थानों से मिली हैं। इसकी जांच के लिए अब प्रशासन ने एक कमेटी गठित कर दी है जो सभी मामलों की जांच करेगी।
जब से रेट निर्धारित किए गए हैं सभी शिकायतें मई माह में ही प्रशासन के पास पहुंची हैं। पांच शिकायतें तो 25 मई के बाद आई हैं। इनमें दो नारनौल व तीन दूसरे स्थानों से है। प्रशासन अब इन शिकायतकर्ताओं को बुलाकर पूछताछ करने के बाद लैब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है।
नारनौल के नसीबपुर के रहने वाले ईश्वर ने बताया कि वह कोरोना पॉजिटिव था। ठीक होने के बाद वह दोबारा से सीटी स्कैन के लिए शहर के एक सेंटर पर गया तो उससे निर्धारित रेट से अधिक पैसे मांगे गए। जब उसने विरोध किया तो सेंटर ने उसका सीटी स्कैन करने से ही मना कर दिया। जब इसकी शिकायत उसने प्रशासन को दी तो उसका सीटी स्कैन किया गया।
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ये किए हैं रेट निर्धारित
राज्य सरकार के निर्देशानुसार कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न निजी अस्पतालों व प्रयोगशालाओं के लिए सीटी स्कैन आदि की दरें निर्धारित कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में जारी किए गए आदेश के अनुसार, एक सीटी / एचआरसीटी छाती स्कैन के लिए अब 2,100 रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसका उपयोग मध्यम से गंभीर रूप से बीमार कोविड -19 रोगियों के फेफड़ों में पानी के पाउच का पता लगाने के लिए किया जाता है।
इसी तरह, कोविड संक्रमण की गंभीरता का पता लगाने के लिए आईएल -6 के लिए 1000 रुपये तक सीमित कर दिए गए हैं। यह एक रक्त परीक्षण है। इसके अलावा डी-डिमर की लागत 400 रुपये होगी। यह जांच खून के थक्कों का पता लगाने के लिए है। संक्रमण की गंभीरता की जांच के लिए एलडीएच परीक्षण की लागत 250 रुपये होगी।
इसी प्रकार शरीर में सूजन की जांच के लिए अन्य परीक्षण, जैसे सीआरपी, प्रोकैल्सीटोनिन और फेरिटिन की कीमत क्रमश: 350, 1500 और 300 रुपए होगी। इनमें से अधिकांश रक्त परीक्षण हैं जहां घर संग्रह संभव है। ऐसी स्थिति में घर से नमूने एकत्रित करने की सूरत में 200 रुपए अतिरिक्त लगेंगे। ये दरें सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत स्वास्थ्य विभाग को सेवाएं प्रदान करने वाले सीटी स्कैन केंद्रों के लिए लागू नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि इन जांच के दौरान पीपीई किट, पैकिंग डॉक्यूमेंटेशन, रिपोर्टिंग अथवा जीएसटी का खर्चा शामिल है।
अगर कोई भी लैब संचालक निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूल करता है तो उसके खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो शिकायतें मिल रही हैं उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जिला की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को पत्र जारी कर दिया गया है।
-डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन
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जब से रेट निर्धारित किए गए हैं सभी शिकायतें मई माह में ही प्रशासन के पास पहुंची हैं। पांच शिकायतें तो 25 मई के बाद आई हैं। इनमें दो नारनौल व तीन दूसरे स्थानों से है। प्रशासन अब इन शिकायतकर्ताओं को बुलाकर पूछताछ करने के बाद लैब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है।
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नारनौल के नसीबपुर के रहने वाले ईश्वर ने बताया कि वह कोरोना पॉजिटिव था। ठीक होने के बाद वह दोबारा से सीटी स्कैन के लिए शहर के एक सेंटर पर गया तो उससे निर्धारित रेट से अधिक पैसे मांगे गए। जब उसने विरोध किया तो सेंटर ने उसका सीटी स्कैन करने से ही मना कर दिया। जब इसकी शिकायत उसने प्रशासन को दी तो उसका सीटी स्कैन किया गया।
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ये किए हैं रेट निर्धारित
राज्य सरकार के निर्देशानुसार कोविड-19 से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए विभिन्न निजी अस्पतालों व प्रयोगशालाओं के लिए सीटी स्कैन आदि की दरें निर्धारित कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में जारी किए गए आदेश के अनुसार, एक सीटी / एचआरसीटी छाती स्कैन के लिए अब 2,100 रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसका उपयोग मध्यम से गंभीर रूप से बीमार कोविड -19 रोगियों के फेफड़ों में पानी के पाउच का पता लगाने के लिए किया जाता है।
इसी तरह, कोविड संक्रमण की गंभीरता का पता लगाने के लिए आईएल -6 के लिए 1000 रुपये तक सीमित कर दिए गए हैं। यह एक रक्त परीक्षण है। इसके अलावा डी-डिमर की लागत 400 रुपये होगी। यह जांच खून के थक्कों का पता लगाने के लिए है। संक्रमण की गंभीरता की जांच के लिए एलडीएच परीक्षण की लागत 250 रुपये होगी।
इसी प्रकार शरीर में सूजन की जांच के लिए अन्य परीक्षण, जैसे सीआरपी, प्रोकैल्सीटोनिन और फेरिटिन की कीमत क्रमश: 350, 1500 और 300 रुपए होगी। इनमें से अधिकांश रक्त परीक्षण हैं जहां घर संग्रह संभव है। ऐसी स्थिति में घर से नमूने एकत्रित करने की सूरत में 200 रुपए अतिरिक्त लगेंगे। ये दरें सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत स्वास्थ्य विभाग को सेवाएं प्रदान करने वाले सीटी स्कैन केंद्रों के लिए लागू नहीं होंगी। उन्होंने बताया कि इन जांच के दौरान पीपीई किट, पैकिंग डॉक्यूमेंटेशन, रिपोर्टिंग अथवा जीएसटी का खर्चा शामिल है।
अगर कोई भी लैब संचालक निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूल करता है तो उसके खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। जो शिकायतें मिल रही हैं उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से जिला की इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को पत्र जारी कर दिया गया है।
-डॉ. अशोक कुमार, सिविल सर्जन