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गोधन पुरातन काल से ही जीवन में संतुलन का परिचायक रहा

Sat, 07 May 2022 12:21 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 12:21 AM IST
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Godhan has been a sign of balance in life since ancient times.
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ में शुक्रवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला, गोधन आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। नवाचार एवं उद्भवन केंद्र द्वारा उन्नत भारत अभियान के तहत विश्वविद्यालय के गोद लिए गांवों के किसानों के लिए आयोजित कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला उपायुक्त श्याम लाल पुनिया व एसडीएम दिनेश कुमार शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि गोधन पुरातन काल से ही जीवन में संतुलन का परिचायक रहा है।
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उपायुक्त श्याम लाल पुनिया ने कहा कि अवश्य ही इस तरह के प्रयासों से गोधन के विकास व किसानों के प्रशिक्षण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मनुष्य की मूल प्रवृत्ति प्रकृति से जुड़ाव की रही है और वह प्रकृति से प्रेम करता है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबल फ्यूचर की परिकल्पना को साकार करने के लिए मिलकर प्रयास करने होंगे। उपायुक्त ने आयोजन में सम्मिलित कृषि विज्ञान केंद्र, महेंद्रगढ़ के वरिष्ठ समन्यवयक रमेश यादव, नाबार्ड के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विशेषज्ञों का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अवश्य ही उनके ज्ञान का लाभ प्रतिभागियों को प्राप्त होगा।
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एसडीएम दिनेश कुमार ने कहा कि धरातल पर जनमानस से जुड़े किसी भी विषय में विश्वविद्यालय के प्रयास को जिला प्रशासन अंजाम तक पहुंचाने के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंनें आयोजन में सम्मिलित हिसार की लाडवा गोशाला के प्रतिनिधियों मोहन शर्मा, रजनीश, रविंद्र का आभार व्यक्त किया। नवाचार एवं उद्भवन केंद्र की संयोजक प्रो. सुनीता श्रीवास्तव ने कार्यशाला के उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से गोधन विकास के विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी। साथ ही साथ कृषि क्षेत्र में जारी बदलावों पर भी विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यशाला का मुख्य आकर्षण लाडवा गोशाला है जो कि अपने कुशल प्रबंधन के लिए न सिर्फ भारत बल्कि एशिया के स्तर पर अपनी एक अलग पहचान रखती है। कार्यक्रम में गोधन आधारित वस्तुओं की प्रदर्शनी भी आयोजन स्थल पर लगाई गई है।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान का उल्लेख करते हुए किसानों के विकास और भारत निर्माण में उनके योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसान विभिन्न चुनौतियों के बावजूद मानव जाति के कल्याण हेतु निरंतर प्रयासरत है। और उनके सहयोग के लिए विश्वविद्यालय इस तरह के आयोजन भविष्य में भी करता रहेगा। कृषि विज्ञान केंद्र के रमेश यादव, आरपीएस ग्रुप के प्रतिनिधि डॉ. महेश यादव, लाडवा गोशाला के प्रबंधक मोहन शर्मा ने प्रतिभागियों को कृषि व गोधन विकास के मोर्चे पर तकनीकी बदलावों के साथ व्यावहारिक पक्षों से भी अवगत कराया। कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन नवाचार एवं उद्भवन केंद्र के सुनील अग्रवाल ने किया और धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा पीठ के सहआचार्य डॉ. दिनेश चहल ने दिया। आयोजन में विश्वविद्यालय की विभिन्न पीठों के अधिष्ठात, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों सहित जांट, पाली, भुरजट, धोली और खुडाना गांवों के प्रतिनिधि भारी संख्या में उपस्थित रहे।
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