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कूड़े के ढेर पर मिले कई मृत गोवंश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Feb 2017 12:17 AM IST
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कचरे के ढेर पर मृत गोवंश
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प्रदेश सरकार गायों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। गो वंश को बचाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं तथा गो तस्करी रोकने के लिए भी सरकार सख्त है। वहीं अनेक गो रक्षा दल गो माता की सेवा व उनकी रक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। गाय या गोवंश के मरने के बाद हिंदू लोग पूरे धार्मिक तरीके से उसको दफनाते हैं लेकिन नारनौल में गाय के मरने के बाद उन्हें कूड़े के ढेर पर डाल दिया जाता है। सोमवार को कुछ गो भक्तों ने रघुनाथपुरा की पहाड़ियों के पास स्थित डंपिंग गए तो वहां कई गाय मृत देखी। इस पर उन्होंने वहां गायों के न दफनाने पर रोष प्रकट किया तथा अधिकारियों से इसकी शिकायत की।
ज्ञात हो कि गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ियों पर शहर का कूड़ा करकट डाला जाता है। यहीं पर ही मृत पशुओं को नगर परिषद के कर्मी डाल आते हैं। रविवार रात को सिंघाना रोड पर होंडा चौक के पास एक सांड़ की मौत हो गई थी। सोमवार सुबह जब लोगों ने मृत सांड़ को देखा तो उन्होंने इसकी सूचना नगर परिषद को दी। सूचना मिलने के बाद नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा सांड़ को दफनाने के लिए कहा। कई लोगों ने नगर परिषद के कर्मचारियों को नमक भी दान स्वरूप दिया कि सांड़ के दफनाने के बाद उस पर नमक आदि डाल दिया जाए। बाद में नगर परिषद के कर्मचारी सांड़ को दफनाने की बजाय वैसे ही कूड़े के ढेर पर डाल आये थे।
संदेह होने पर पहाड़ी पर गये युवक
सांड़ को दफनाने की बात कुछ युवकों ने नप कर्मियों से पूछी जिस पर नप कर्मियों ने कहा कि वे उसे दबा आये। इस पर जमालपुर के एक युवक मुकेश को कुछ संदेह हुआ तो वह अपने साथ कुछ युवकों को लेकर डंपिंग सेंटर पहुंचा जहां पर उसने देखा कि वहां कई गायें मरी हुई पड़ी हैं और मृतक साड़ को भी यहीं डाला हुआ था। जिसके आसपास ही नमक का ढेर भी लगा हुआ था।
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आठ से दस गाय मिली कूड़े के ढेर पर
मुकेश ने बताया कि वहां पर आठ से दस गायें कूड़े के ढेर पर पड़ी हुई थी। वहीं पर ही नमक के ढेर भी लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने नगर परिषद के कर्मचारियों व नप प्रधान को भी सूचना दी लेकिन किसी ने इनका कोई समाधान नहीं किया। बाद में मीडिया के लोग वहां पहुंचे तो देखा कि वहां पर गाय, सांड़ व गो वंश मृत पड़े थे। वहीं कई जगह नप कर्मियों ने गड्ढे भी खोद रखे थे लेकिन उन गड्ढों को भरा नहीं गया था।
एक कर्मचारी ने जताया था विरोध
वहां पर काम करने वाले नप के एक कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने शुरू में इसका विरोध किया था कि गायों को दफनाये बिना नहीं जाएं, लेकिन किसी ने उसकी सुनी ही नहीं।
संगठनों ने जताया रोष
गायों के कूड़े के ढेर पर मृत मिलने पर विभिन्न संगठनों ने रोष प्रकट किया है। विश्व हिंदु परिषद व बजरंग दल के गो रक्षा दल, अनाथ गोशाला व गो पूजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि गो माता को मिट्टी देना बहुत जरूरी है। नप कर्मियों ने ऐसा न कर पाप किया है। ऐसे कर्मचारियों को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए।
हिंदू धर्म में गोमाता की पूजा की जाती है। गाय में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए गो वंश के मरने के बाद उसे मिट्टी देना बहुत जरूरी है। यदि नप कर्मियों ने गाय को कूड़े के ढेर में डाल दिया तो यह बहुत गलत हे। ऐसे नप कर्मियों को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। -हेमंत शर्मा, प्रधान गो रक्षा दल
गोशाला में यदि कोई गो वंश मर जाता है तो वे नीरपुर के पास नदी में गड्ढा आदि खुदवाकर उसे मिट्टी देते हैं। अगर नप कर्मियों ने ऐसा नहीं किया तो यह पाप है।- आकाश यादव, प्रधान अनाथ गोशाला
मुझे इस बारे में बाद में जानकारी लगी। मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि गो वंश को मिट्टी दी जाए। उनकी समिति नप के कर्मचारियों को साथ लेकर गायों को दफनाने का पूरा प्रयास करेगी। - जितू कपिल, संयोजक गो पूजन समिति
मेरी जानकारी में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। नगर परिषद के कर्मचारियों को दबाने का भी बजट मिलता है। अगर कर्मचारी ऐसा नहीं कर रहे हैं तो यह गलत है। इस बारे में वे सफाई निरीक्षक से बात करेंगी। -भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल
नगर परिषद के कर्मचारी मृत गो वंश व अन्य पशुओं को उठाते हैं मगर उनको दबाया जाता है या नहीं इस बारे में मुझे नहीं पता।--अनिल कुमार, एओ, नगर परिषद नारनौल
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ज्ञात हो कि गांव रघुनाथपुरा की पहाड़ियों पर शहर का कूड़ा करकट डाला जाता है। यहीं पर ही मृत पशुओं को नगर परिषद के कर्मी डाल आते हैं। रविवार रात को सिंघाना रोड पर होंडा चौक के पास एक सांड़ की मौत हो गई थी। सोमवार सुबह जब लोगों ने मृत सांड़ को देखा तो उन्होंने इसकी सूचना नगर परिषद को दी। सूचना मिलने के बाद नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे तथा सांड़ को दफनाने के लिए कहा। कई लोगों ने नगर परिषद के कर्मचारियों को नमक भी दान स्वरूप दिया कि सांड़ के दफनाने के बाद उस पर नमक आदि डाल दिया जाए। बाद में नगर परिषद के कर्मचारी सांड़ को दफनाने की बजाय वैसे ही कूड़े के ढेर पर डाल आये थे।
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संदेह होने पर पहाड़ी पर गये युवक
सांड़ को दफनाने की बात कुछ युवकों ने नप कर्मियों से पूछी जिस पर नप कर्मियों ने कहा कि वे उसे दबा आये। इस पर जमालपुर के एक युवक मुकेश को कुछ संदेह हुआ तो वह अपने साथ कुछ युवकों को लेकर डंपिंग सेंटर पहुंचा जहां पर उसने देखा कि वहां कई गायें मरी हुई पड़ी हैं और मृतक साड़ को भी यहीं डाला हुआ था। जिसके आसपास ही नमक का ढेर भी लगा हुआ था।
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आठ से दस गाय मिली कूड़े के ढेर पर
मुकेश ने बताया कि वहां पर आठ से दस गायें कूड़े के ढेर पर पड़ी हुई थी। वहीं पर ही नमक के ढेर भी लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि इस बारे में उन्होंने नगर परिषद के कर्मचारियों व नप प्रधान को भी सूचना दी लेकिन किसी ने इनका कोई समाधान नहीं किया। बाद में मीडिया के लोग वहां पहुंचे तो देखा कि वहां पर गाय, सांड़ व गो वंश मृत पड़े थे। वहीं कई जगह नप कर्मियों ने गड्ढे भी खोद रखे थे लेकिन उन गड्ढों को भरा नहीं गया था।
एक कर्मचारी ने जताया था विरोध
वहां पर काम करने वाले नप के एक कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने शुरू में इसका विरोध किया था कि गायों को दफनाये बिना नहीं जाएं, लेकिन किसी ने उसकी सुनी ही नहीं।
संगठनों ने जताया रोष
गायों के कूड़े के ढेर पर मृत मिलने पर विभिन्न संगठनों ने रोष प्रकट किया है। विश्व हिंदु परिषद व बजरंग दल के गो रक्षा दल, अनाथ गोशाला व गो पूजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि गो माता को मिट्टी देना बहुत जरूरी है। नप कर्मियों ने ऐसा न कर पाप किया है। ऐसे कर्मचारियों को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए।
हिंदू धर्म में गोमाता की पूजा की जाती है। गाय में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए गो वंश के मरने के बाद उसे मिट्टी देना बहुत जरूरी है। यदि नप कर्मियों ने गाय को कूड़े के ढेर में डाल दिया तो यह बहुत गलत हे। ऐसे नप कर्मियों को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। -हेमंत शर्मा, प्रधान गो रक्षा दल
गोशाला में यदि कोई गो वंश मर जाता है तो वे नीरपुर के पास नदी में गड्ढा आदि खुदवाकर उसे मिट्टी देते हैं। अगर नप कर्मियों ने ऐसा नहीं किया तो यह पाप है।- आकाश यादव, प्रधान अनाथ गोशाला
मुझे इस बारे में बाद में जानकारी लगी। मेरा पूरा प्रयास रहेगा कि गो वंश को मिट्टी दी जाए। उनकी समिति नप के कर्मचारियों को साथ लेकर गायों को दफनाने का पूरा प्रयास करेगी। - जितू कपिल, संयोजक गो पूजन समिति
मेरी जानकारी में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। नगर परिषद के कर्मचारियों को दबाने का भी बजट मिलता है। अगर कर्मचारी ऐसा नहीं कर रहे हैं तो यह गलत है। इस बारे में वे सफाई निरीक्षक से बात करेंगी। -भारती सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल
नगर परिषद के कर्मचारी मृत गो वंश व अन्य पशुओं को उठाते हैं मगर उनको दबाया जाता है या नहीं इस बारे में मुझे नहीं पता।--अनिल कुमार, एओ, नगर परिषद नारनौल