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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   From the 'Iron Mummy' to the soldier's mother, women recount their journey of maternal love and resilience.

Mahendragarh-Narnaul News: आयरन मम्मी से लेकर फौजी की मां तक महिलाओं ने तय किया सफर

Sat, 09 May 2026 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 11:15 PM IST
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From the 'Iron Mummy' to the soldier's mother, women recount their journey of maternal love and resilience.
फोटो नंबर- 16​शि​क्षिका सबीना के साथ उनके बच्चे पीहू व कर्तव्य। स्रोत : स्वयं
नारनौल। मातृ दिवस सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि मां की ममता और उनके संघर्ष को बयां करता है। जिले में अनेक महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने कमजोर आर्थिक स्थिति से लड़ते हुए अपने बच्चों को काबिल बनाया और स्वयं को साबित किया। कभी शिक्षिका, कभी कला के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अनेक महिलाओं ने अपने बच्चों के जीवन को संवारा है।
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वहीं सरहद पर तैनात फौजी बेटों की मां दोहरी भूमिका निभा रही हैं। वे न सिर्फ जन्मदात्री हैं बल्कि अपने जिगर के टुकड़े को मातृभूमि की रक्षा के लिए हंसते-हंसते विदा कर राष्ट्रप्रेम की मिसाल भी कायम कर रही हैं।
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घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इस कारण मैंने वर्ष 2014 में ब्यूटी पार्लर पर काम करना शुरू किया। काम सीखकर स्वयं का पार्लर खोला और अपने बच्चे को अच्छी स्कूली शिक्षा दिलाने में सफल रही। मेरा बेटा ग्राफिक्स का कोर्स कर रहा है। उम्मीद है वह अपने जीवन में बेहतर कर पाएगा।
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खामोश देवी, ब्यूटी पार्लर संचालिका
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पति का साथ निभाते हुए अपने बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए निजी स्कूल में बतौर शिक्षिका पढ़ाना शुरू किया। करीब 10 साल बाद अपना स्कूल खोला और मेरी सफलता में मेरे बच्चों का बहुत सहयोग रहा। मेरे बच्चे मुझे आयरन मम्मी कहकर बुलाते हैं।
सबीना, शिक्षिका
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पिछले साल मातृ दिवस के दौरान ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था और मेरा बेटा जोधपुर बॉर्डर पर तैनात था। रात भर नींद नहीं आती थी और बेटे के लिए चिंता बनी रहती थी। बेटे ने उस समय जो शब्द कहे वो मुझे गर्व से भर देते हैं। मेरे बेटे ने कहा, मां मैं जिंदा रहते हुए या शहीद होकर आपका सिर हमेशा ऊंचा रखूंगा।
सुकन्या तंवर, गृहिणी
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मेरा बेटा आईटीबीपी में इंस्पेक्टर आनंद कुमार देश की सेवा में सीमा पर तैनात है। मातृ दिवस पर उसका पास होना जरूरी नहीं, उसका सुरक्षित और खुश रहना ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है।
बीरमती, गृहिणी
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एक डॉक्टर होने के साथ-साथ मैं एक बेटी भी हूं, मेरी सफलता में मेरी मां का योगदान बहुत बड़ा है। अस्पताल में रोज देखती हूं कि मां सिर्फ परिवार नहीं संभालती बल्कि हर मुश्किल में सबसे पहले खड़ी रहती है।

सोनिका सोनी, मेडिकल ऑफिसर
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मेरा बेटा यूएसए में है। बेटे की सफलता पर गर्व तो होता है लेकिन याद हमेशा बनी रहती है। मातृ दिवस पर बेटे की याद भावुक कर देती है। वीडियो कॉल पर ही सही, बेटे की आवाज सुनकर हर दिन खास लगने लगता है।
सीमा शर्मा, गृहिणी
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