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16 जून से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई
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नारनौल। प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूल के विद्यार्थी भी 16 जून से ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। ऑनलाइन पढ़ाई की मॉनिटरिंग के लिए 1750 मेंटरों को प्रशिक्षित किया गया है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकारी स्कूलों में लगातार छात्रों की संख्या में कमी आती जा रही है। इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा निदेशालय ने यह कदम उठाने का निर्णय लिया था।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी 16 जून से ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करेंगे ऐसा प्रदेश में पहली बार होगा। इससे पहले शिक्षा विभाग ने एजुसेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का प्लान तैयार किया था लेकिन कुछ ही समय बाद यह योजना रद्द हो गई थी। इस बार ऐसी नौबत का सामना ना करना पड़े इसके लिए एससीईआरटी ने 1750 मेंटर तैयार किए हैं। जो इस ऑनलाइन एजुकेशन पर बारीकी से नजर रखेंगे। इस ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से उन बच्चों को पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिन्होंने कोरोना में अपने मां-बाप को खो दिया हो। खास बात यह है कि ये मेंटर न केवल बच्चों से फीडबैक लेंगे बल्कि अभिभावकों व अध्यापकों से भी जानकारी लेंगे। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि जिन विद्यार्थियों को कोई समस्या आएगी तो उसका तुरंत निवारण भी हो सकेगा। फीडबैक के आधार पर पढ़ाई के तरीकों में जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाएगा।
ऑनलाइन एजुकेशन के इस पूरे प्लान में गणित और साइंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा इसके लिए एक्सपर्ट टीचर को ऑनलाइन क्लास लेने का जिम्मा सौंपा गया है। ऑनलाइन अध्यापन का यह कार्य अभी स्कूल खुलने तक ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है। अगर कोविड-19 के चलते स्कूल खुलने में देरी हुई तो यह प्रक्रिया आगे भी जारी रखी जाएगी। इस बाबत जिला शिक्षा अधिकारी सुनील वत्स ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जाएगी। इस कार्य के लिए प्रदेश के 1750 मेंटर को प्रशिक्षित कर तैयार किया गया है। प्रत्येक मेंटर रोजाना 2 विद्यार्थी, दो अभिभावक और 2 शिक्षकों से पढ़ाई के बारे में फीडबैक लेंगे। इसके बाद जरूरी हुई तो विषय विशेषज्ञों से बात कर पढ़ाई के तरीकों में बदलाव भी किया जाएगा। इसके अलावा मेंटर यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ आ रही है या नहीं। मेंटर रोजाना प्रदेश में लगभग 3500 अभिभावक 3500 शिक्षक और 3500 विद्यार्थियों से बात करेंगे।
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-बच्चों की जाएगी काउंसलिंग
मेंटर बच्चों से बातचीत के दौरान सबसे पहले उनके स्वास्थ्य के बारे में पता करेंगे। इसके अलावा कोविड-19 कारण अगर बच्चों ने अपने माता पिता को खोया है तो उसके बारे में पता करेंगे। ऐसे बच्चों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। बच्चों से सबसे आखिर में पढ़ाई के बारे में पूछा जाएगा। उनसे पढ़ाई में दिक्कत के बारे में भी फीडबैक लिया जाएगा। सिस्टम में अगर कोई बदलाव की आवश्यकता होगी तो वह अभिभावकों, विद्यार्थियों और अध्यापकों के अनुभव के आधार पर किया जाएगा।
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सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी 16 जून से ऑनलाइन शिक्षा ग्रहण करेंगे ऐसा प्रदेश में पहली बार होगा। इससे पहले शिक्षा विभाग ने एजुसेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का प्लान तैयार किया था लेकिन कुछ ही समय बाद यह योजना रद्द हो गई थी। इस बार ऐसी नौबत का सामना ना करना पड़े इसके लिए एससीईआरटी ने 1750 मेंटर तैयार किए हैं। जो इस ऑनलाइन एजुकेशन पर बारीकी से नजर रखेंगे। इस ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से उन बच्चों को पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिन्होंने कोरोना में अपने मां-बाप को खो दिया हो। खास बात यह है कि ये मेंटर न केवल बच्चों से फीडबैक लेंगे बल्कि अभिभावकों व अध्यापकों से भी जानकारी लेंगे। ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि जिन विद्यार्थियों को कोई समस्या आएगी तो उसका तुरंत निवारण भी हो सकेगा। फीडबैक के आधार पर पढ़ाई के तरीकों में जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाएगा।
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ऑनलाइन एजुकेशन के इस पूरे प्लान में गणित और साइंस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा इसके लिए एक्सपर्ट टीचर को ऑनलाइन क्लास लेने का जिम्मा सौंपा गया है। ऑनलाइन अध्यापन का यह कार्य अभी स्कूल खुलने तक ही जारी रखने का निर्णय लिया गया है। अगर कोविड-19 के चलते स्कूल खुलने में देरी हुई तो यह प्रक्रिया आगे भी जारी रखी जाएगी। इस बाबत जिला शिक्षा अधिकारी सुनील वत्स ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जाएगी। इस कार्य के लिए प्रदेश के 1750 मेंटर को प्रशिक्षित कर तैयार किया गया है। प्रत्येक मेंटर रोजाना 2 विद्यार्थी, दो अभिभावक और 2 शिक्षकों से पढ़ाई के बारे में फीडबैक लेंगे। इसके बाद जरूरी हुई तो विषय विशेषज्ञों से बात कर पढ़ाई के तरीकों में बदलाव भी किया जाएगा। इसके अलावा मेंटर यह भी जानने का प्रयास करेंगे कि बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ आ रही है या नहीं। मेंटर रोजाना प्रदेश में लगभग 3500 अभिभावक 3500 शिक्षक और 3500 विद्यार्थियों से बात करेंगे।
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-बच्चों की जाएगी काउंसलिंग
मेंटर बच्चों से बातचीत के दौरान सबसे पहले उनके स्वास्थ्य के बारे में पता करेंगे। इसके अलावा कोविड-19 कारण अगर बच्चों ने अपने माता पिता को खोया है तो उसके बारे में पता करेंगे। ऐसे बच्चों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। बच्चों से सबसे आखिर में पढ़ाई के बारे में पूछा जाएगा। उनसे पढ़ाई में दिक्कत के बारे में भी फीडबैक लिया जाएगा। सिस्टम में अगर कोई बदलाव की आवश्यकता होगी तो वह अभिभावकों, विद्यार्थियों और अध्यापकों के अनुभव के आधार पर किया जाएगा।